वाशिंगटन,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल अमेरिका में होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा। ट्रंप के मुताबिक,रूस ने जी20 बैठकों में भाग लेने की इच्छा जताई है,लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुतिन स्वयं सम्मेलन में आएंगे या रूस की ओर से कोई अन्य प्रतिनिधि हिस्सा लेगा। यह बयान ऐसे समय आया है,जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है और युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। इस सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस की ओर से बैठकों में भाग लेने की इच्छा जताई गई है,लेकिन पुतिन की व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि रूसी राष्ट्रपति सम्मेलन में आते हैं,तो वह उनका स्वागत करेंगे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि जी20 की बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी भाग लेते रहे हैं। ईंधन की कीमतों से संबंधित सवालों के जवाब के दौरान उन्होंने खुद इस अंतर्राष्ट्रीय समूह का उल्लेख किया। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि रूस की भागीदारी को लेकर चर्चा हो रही है,हालाँकि पुतिन के दौरे पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
अमेरिका वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। इस दौरान कई बैठकें आयोजित की जानी हैं, जिनमें वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा,अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रमुख वैश्विक चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के अनुसार,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे।
इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। रूस और भारत,दोनों जी20 के सदस्य हैं। ऐसे में अमेरिका की अध्यक्षता में होने वाली इन बैठकों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
भारत इससे पहले सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है। उस सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सहयोग,विकास और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ था। जी20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें विकसित और विकासशील देश शामिल हैं। इसके सदस्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए बातचीत करते हैं।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि वह रूस और चीन,दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालाँकि,उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा समझौता इस साल हो पाएगा। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि परमाणु हथियारों पर नियंत्रण और बड़ी शक्तियों के बीच रणनीतिक संवाद उनके एजेंडे में शामिल हैं।
रूस और चीन दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियों में गिने जाते हैं। ऐसे में इन देशों के साथ किसी भी संभावित समझौते का असर अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु हथियारों की होड़ पर पड़ सकता है। हालाँकि,ट्रंप ने अपने बयान में प्रस्तावित समझौते की शर्तों,दायरे या संभावित बातचीत की समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें मामले से जुड़ी सभी बातें पता हैं और वह किसी समय पूरी जानकारी सार्वजनिक करेंगे। पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि क्या वह इस बात को भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने की थी। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात युद्ध का समाप्त होना है।
ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में औसतन हर महीने लगभग 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले महीने यह संख्या बढ़कर 32,000 रही थी। हालाँकि, उन्होंने इन आँकड़ों के समर्थन में विस्तृत जानकारी या स्वतंत्र सत्यापन का आधार प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए इन संख्याओं को ट्रंप के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह रूस और यूक्रेन,दोनों पक्षों से बातचीत करते हैं। उनके अनुसार,उन्हें लगता है कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करना चाहते हैं और उनका मुख्य ध्यान संघर्ष को रोकने पर है। हालाँकि,युद्ध समाप्त करने के लिए किन शर्तों पर सहमति बन सकती है और दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ रही है,इस बारे में उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की भूमिका अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में सुरक्षा गारंटी,क्षेत्रीय नियंत्रण और दोनों पक्षों की शर्तें प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में ट्रंप के बयान को उनके घोषित लक्ष्य के संदर्भ में देखा जा सकता है,लेकिन वास्तविक प्रगति का आकलन संबंधित पक्षों के ठोस फैसलों और बातचीत के परिणामों से ही होगा।
बातचीत के दौरान ट्रंप से यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है। इस पर उन्होंने साफ तौर पर इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका ने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है। हालाँकि,उन्होंने इस विषय पर अतिरिक्त विवरण नहीं दिया और न ही कथित प्रतिबंध से जुड़े किसी अन्य पहलू की व्याख्या की।
कुल मिलाकर,जी20 सम्मेलन में पुतिन की संभावित भागीदारी को लेकर ट्रंप का बयान अमेरिका और रूस के बीच संवाद की संभावनाओं पर ध्यान खींचता है। इसके साथ ही रूस और चीन के साथ परमाणु समझौते की इच्छा तथा यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने पर दिया गया जोर उनकी विदेश नीति के प्रमुख मुद्दों को सामने लाता है। फिलहाल पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है और परमाणु समझौते को लेकर भी कोई ठोस समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
