नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- दक्षिण भारतीय संगीत जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर तमिल संगीतकार और गायक देवा का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने 17 अक्टूबर को चेन्नई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके जाने से तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। देवा ने अपने लंबे संगीत सफर में ऐसी धुनें तैयार कीं,जिन्होंने कई पीढ़ियों के श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई। चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहे देवा ने तमिल सिनेमा के साथ-साथ कन्नड़,तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी अपना योगदान दिया। उनके संगीत की खास पहचान मधुर धुनों और तमिल सिनेमा की लोकप्रिय ‘गाना’ शैली से बनी।
देवा का असली नाम देवनेसन चोकलिंगम था,लेकिन संगीत की दुनिया में वह देवा के नाम से मशहूर हुए। अपनी मेहनत,रचनात्मकता और अलग संगीत शैली के दम पर उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत में एक विशिष्ट स्थान बनाया। उनके निधन की खबर से प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच शोक का माहौल है। फिलहाल उनके निधन के कारण की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई के टी नगर स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने की जानकारी दी गई है।
देवा का संगीत करियर दक्षिण भारतीय सिनेमा के विकास के कई अहम दौरों का गवाह रहा। उन्होंने फिल्मों के लिए गीतों की धुनें तैयार करने के साथ-साथ पार्श्व संगीत में भी योगदान दिया। अपने लंबे सफर में उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। इस दौरान उनकी रचनाएँ अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के दर्शकों तक पहुँचीं।
तमिल फिल्म संगीत में देवा की पहचान केवल एक संगीतकार के रूप में नहीं रही,बल्कि वह ऐसी धुनें बनाने के लिए भी जाने गए,जो आम श्रोताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो जाती थीं। उनकी रचनाओं में भावनात्मक मेलोडी और जोशीले संगीत का मेल देखने को मिलता था। यही वजह रही कि उनके संगीत ने रोमांटिक गीतों से लेकर मनोरंजन और उत्सव के माहौल वाले गानों तक अपनी अलग छाप छोड़ी।
देवा ने तमिल सिनेमा में अपनी विशेष पहचान बनाई,लेकिन उनका काम किसी एक भाषा तक सीमित नहीं रहा। कन्नड़,तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी उन्होंने संगीत दिया। अलग-अलग भाषाओं के फिल्मी माहौल के अनुरूप संगीत तैयार करने की उनकी क्षमता उनके लंबे करियर की महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल रही।
तमिल संगीत की दुनिया में देवा को खास तौर पर ‘गाना’ शैली के लिए याद किया जाता है। यह शैली अपनी स्थानीय अभिव्यक्ति,सहज शब्दों,लय और आम जनजीवन से जुड़ाव के कारण लोकप्रिय रही है। देवा ने इस संगीत को फिल्मों के माध्यम से व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी धुनों में स्थानीय रंग और लोकप्रिय संगीत का ऐसा मेल दिखाई देता था,जो श्रोताओं को आसानी से आकर्षित करता था। यही कारण है कि देवा का नाम तमिल फिल्म संगीत के उन कलाकारों में लिया जाता है,जिन्होंने क्षेत्रीय संगीत की एक विशिष्ट शैली को लोकप्रिय सिनेमा में मजबूत पहचान दिलाई।
उनके संगीत की लोकप्रियता का एक बड़ा आधार मेलोडी गीत भी रहे। देवा ने अपने करियर में ऐसे कई गीतों को संगीतबद्ध किया,जिन्हें दर्शकों ने लंबे समय तक पसंद किया। उनके गानों ने फिल्मों के भावनात्मक दृश्यों को प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ मनोरंजन से जुड़े दृश्यों में भी ऊर्जा भरने का काम किया। हालाँकि,उनके चर्चित गीतों की सूची लंबी है,लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि अलग-अलग तरह के संगीत को अपनी पहचान के साथ प्रस्तुत करना रही।
देवा के करियर का एक उल्लेखनीय पहलू तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों से उनका जुड़ाव रहा। उन्होंने रजनीकांत की फिल्मों के टाइटल कार्ड के लिए एक विशेष थीम तैयार की थी,जिसका इस्तेमाल लंबे समय तक उनकी फिल्मों में किया जाता रहा। यह थीम दर्शकों के लिए एक परिचित ध्वनि बन गई और सुपरस्टार की लोकप्रिय सिनेमाई छवि के साथ जुड़ गई।
फिल्मों में संगीत केवल गीतों तक सीमित नहीं होता। कई बार किसी कलाकार की पहचान किसी खास धुन,शुरुआती संगीत या पार्श्व संगीत से भी बन जाती है। देवा का यह योगदान इसी बात का उदाहरण है। किसी बड़े सितारे की फिल्मों के साथ लंबे समय तक जुड़ी रहने वाली धुन तैयार करना उनके संगीत कौशल और लोकप्रियता को दर्शाता है।
देवा का निधन दक्षिण भारतीय संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने करियर में कई भाषाओं की फिल्मों के लिए काम किया और तमिल संगीत को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसकी रचनाओं की संख्या से नहीं,बल्कि उस प्रभाव से भी बनती है जो उसका संगीत श्रोताओं पर छोड़ता है।
400 से अधिक फिल्मों में योगदान,चार दशक से ज्यादा का अनुभव और ‘गाना’ संगीत शैली के साथ उनकी विशिष्ट पहचान उन्हें तमिल फिल्म संगीत के उल्लेखनीय कलाकारों में शामिल करती है। उनके निधन से संगीत की दुनिया में एक युग का अंत महसूस किया जा रहा है।
देवा की धुनें,उनके गीत और फिल्मों में उनके संगीत का योगदान प्रशंसकों के बीच उनकी यादों को जीवित रखेंगे। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनका नाम उन संगीतकारों में शामिल रहेगा,जिन्होंने लोकप्रिय धुनों के जरिए क्षेत्रीय संगीत को व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
