हिरासत से रिहा होने के बाद नेहा बोरा का दिल्ली पुलिस पर हमला (तस्वीर क्रेडिट@NewsRahulkumar)

हिरासत से रिहा होने के बाद नेहा बोरा का दिल्ली पुलिस पर हमला,मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग की माँग

नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के करीब 12 घंटे बाद रिहा हुईं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राजधानी में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले लोगों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। बोरा ने पुलिस की कार्रवाई,प्रदर्शनकारियों की हिरासत और दिल्ली के कई इलाकों में की गई बैरिकेडिंग पर सवाल उठाते हुए इसे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की माँग भी की।

आरके पुरम थाने से रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों को कई बार दिन या शाम के समय हिरासत में लिया जाता है और उन्हें पूरी रात थाने में रखने के बाद अगले दिन छोड़ा जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की जा रही है। बोरा के मुताबिक,शांतिपूर्ण विरोध करने वाले नागरिकों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करता है।

नेहा बोरा ने महिला प्रदर्शनकारियों को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखे जाने को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रात में हिरासत में रखने की कार्रवाई की कानूनी वैधता स्पष्ट की जानी चाहिए और पुलिस को नियमों का पालन करना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि हिरासत में लेने और रिहा करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

भारतीय कानून में महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर विशेष प्रावधान मौजूद हैं। सामान्य परिस्थितियों में किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। हालाँकि,कानून में कुछ अपवाद भी हैं, जिनके तहत निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के साथ कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए किसी विशेष मामले में पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी या नहीं, इसका निर्धारण घटनाक्रम,हिरासत की प्रकृति और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जा सकता है।

बोरा ने पुलिस से जुड़े इन्हीं सवालों को उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने माँग की कि हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया और प्रदर्शनकारियों को थाने में रखने के कारणों को स्पष्ट किया जाए।

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर अव्यवस्था फैलाने के आरोपों को खारिज करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि राजधानी के मध्य हिस्से में पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के कारण आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार,प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है,जबकि कई सड़कों पर लगाए गए अवरोधों से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के काम के लिए घर से निकलने वाले लोगों को रास्तों पर बैरिकेडिंग मिलने से अपने गंतव्य तक पहुँचने में दिक्कत होती है। बोरा ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन की कार्रवाई के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि नागरिकों को अपने काम पर जाने, आवाजाही करने और अपनी बात रखने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

हालाँकि,बैरिकेडिंग और पुलिस की तैनाती को लेकर प्रशासन का पक्ष तथा संबंधित स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के कारणों की विस्तृत जानकारी इस बयान में सामने नहीं आई। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के आरोपों और प्रशासन की ओर से दी जाने वाली संभावित सफाई को अलग-अलग देखना जरूरी है।

अपने बयान में नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की माँग भी उठाई। इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की अपील की। बोरा ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में आम नागरिकों के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन जाँच और उसमें आवश्यक संशोधन करना होता है। इस प्रक्रिया को लेकर उठने वाली आपत्तियों में मतदाताओं के नाम हटने की आशंका,दस्तावेजों की उपलब्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। नेहा बोरा ने अपनी माँग को नागरिकों के मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि आम लोगों को परेशानियों से राहत मिलनी चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग जैसी कार्रवाई की माँग एक गंभीर संवैधानिक विषय है। इस संबंध में किसी भी कदम के लिए निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। बोरा ने अपने बयान में यह माँग राजनीतिक और लोकतांत्रिक जवाबदेही के मुद्दे के रूप में उठाई,लेकिन आगे की किसी औपचारिक प्रक्रिया या प्रस्ताव के बारे में जानकारी सामने नहीं आई।

नेहा बोरा की रिहाई के बाद दिए गए बयान ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों,पुलिस की कार्रवाई और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर बोरा ने हिरासत,महिला अधिकारों और सड़क बंद किए जाने को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं,वहीं दूसरी ओर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल बोरा ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा,पुलिस कार्रवाई में कानूनी प्रक्रियाओं के पालन और एसआईआर पर रोक लगाने की माँग दोहराई है। उनके बयान के बाद यह देखना होगा कि संबंधित मुद्दों पर प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है तथा उनकी मांगों को लेकर आगे कोई औपचारिक कदम उठाया जाता है या नहीं।