कोलकाता,19 अक्टूबर (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। उत्तर कोलकाता के चोरबागान इलाके में स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार,17 अक्टूबर 2026 को मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई,जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडाल में दर्शन करने पहुँचे थे, लेकिन भीड़ बढ़ने के साथ ही हालात बेकाबू हो गए। लोगों के बीच अचानक मची भगदड़ के कारण कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। वहीं, प्रशासन ने घटना की जाँच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चोरबागान इलाके में दुर्गा पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माँ दुर्गा के दर्शन के लिए पहुँचे थे। शनिवार शाम पंडाल में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। इसी दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई और स्थिति बिगड़ने लगी। देखते ही देखते वहाँ भगदड़ मच गई,जिसमें कई लोग गिरकर घायल हो गए। इस दुर्घटना में 19 लोगों की जान चली गई। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के इलाके में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक ही स्थान पर पहुँचने से भीड़ का दबाव बढ़ गया था। हालाँकि,भगदड़ किस वजह से शुरू हुई और घटनास्थल पर उस समय क्या परिस्थितियाँ थीं,इसका स्पष्ट पता जाँच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल प्रशासन का ध्यान घायलों को इलाज उपलब्ध कराने,मृतकों की पहचान और हादसे से जुड़े तथ्यों को जुटाने पर है।
घटना के बाद राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुँचकर प्रभावित लोगों की मदद की। घायलों को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। प्रशासन और पुलिस ने घटनास्थल पर स्थिति को सँभालने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इस हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन,प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा आपातकालीन तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी रात में ही घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने वहाँ की स्थिति का जायजा लिया और घटना से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जाँच कराने की बात कही है,ताकि भगदड़ के कारणों का पता लगाया जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि आयोजन के दौरान किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक,वह इस मामले की जाँच कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने का अनुरोध करेंगे। इसके लिए वह हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखेंगे। इस प्रस्तावित जाँच का उद्देश्य हादसे से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों की पड़ताल करना और जिम्मेदारी तय करना है।
न्यायिक जाँच के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि पंडाल में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किस तरह की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा,यह भी जाँच का विषय होगा कि श्रद्धालुओं की संख्या के अनुपात में सुरक्षा प्रबंध पर्याप्त थे या नहीं और आपात स्थिति पैदा होने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।
चोरबागान भगदड़ मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच एजेंसियाँ घटना के समय की परिस्थितियों,आयोजन से जुड़े प्रबंधों और सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि भीड़ अचानक किस वजह से अनियंत्रित हुई और हादसे को रोकने के लिए मौके पर मौजूद इंतजाम पर्याप्त क्यों नहीं रहे।
जांच के दौरान आयोजन की जिम्मेदारी सँभालने वाले लोगों की भूमिका और भीड़ नियंत्रण से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा सकती है। हालाँकि,किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण जाँच में सामने आने वाले तथ्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। फिलहाल सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
इस हादसे के बाद पूजा आयोजनों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना, प्रवेश और निकास के रास्ते खुले रखना,भीड़ की निगरानी करना और आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। चोरबागान की घटना के बाद इन व्यवस्थाओं की समीक्षा की माँग उठना स्वाभाविक है।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की गई है। इस सहायता का उद्देश्य दुर्घटना के कारण अपनों को खोने वाले परिवारों को मुश्किल समय में आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है।
राज्य सरकार ने घायलों के इलाज और उनके जल्द स्वस्थ होने को लेकर भी चिंता जताई है। हादसे में घायल लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। मृतकों की संख्या और घायलों की स्थिति को देखते हुए राहत कार्यों के साथ-साथ घटना की निष्पक्ष जाँच की आवश्यकता भी बढ़ गई है।
कोलकाता के चोरबागान में हुई यह दुर्घटना दुर्गा पूजा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को रेखांकित करती है। अब सभी की नजर जाँच पर टिकी है। जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई,भीड़ को नियंत्रित करने में कहाँ चूक हुई और हादसे के लिए कौन जिम्मेदार था। प्रशासन की कार्रवाई और प्रस्तावित न्यायिक जाँच के निष्कर्ष आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करेंगे।
