फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (तस्वीर क्रेडिट@Microinteracti1)

फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों पर मैक्रों सख्त,बोले- तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को भरना होगा हर्जाना

पेर‍िस,19 अक्टूबर (युआईटीवी)- फ्रांस में महँगाई,ईंधन की बढ़ती कीमतों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश की व्यवस्था को कमजोर करने,सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और लूटपाट करने वालों को अपने कृत्यों की जिम्मेदारी उठानी होगी। राष्ट्रपति ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच अंतर करने पर भी जोर दिया।

टेलीविजन पर दिए गए अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा कि जिन लोगों ने नुकसान पहुँचाया है,उन्हें उसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि लूटपाट करने वालों से नुकसान की भरपाई कराई जानी चाहिए। राष्ट्रपति के मुताबिक,सरकार उन नागरिकों की जायज मांगों को समझती है,जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं सामने रख रहे हैं। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर हिंसा,तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मैक्रों का यह बयान ऐसे समय आया है,जब फ्रांस के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ हुई हैं और सैकड़ों पुलिसकर्मी तथा सुरक्षा बलों के सदस्य घायल हुए हैं। सरकार के सामने एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का समाधान तलाशना भी जरूरी है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि हिंसा के दौरान प्रभावित हुए पुलिसकर्मियों,स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों के साथ सरकार खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को इन घटनाओं के कारण नुकसान उठाना पड़ा है,उन्हें सहायता पहुँचाने के लिए कदम उठाए जाएँगे।

प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को संकट प्रबंधन से जुड़ी एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में हिंसा से प्रभावित लोगों की मदद और राहत पहुँचाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रभावित नागरिकों को जल्द सहायता उपलब्ध कराना और नुकसान के बाद सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया को गति देना है।

मैक्रों ने सरकार को शनिवार को हुई घटनाओं से सबक लेने का निर्देश भी दिया। उन्होंने विशेष रूप से खुफिया जानकारी जुटाने,संभावित खतरों का पहले से आकलन करने और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना होगा।

प्रदर्शनों के दौरान हिंसा किस तरह बढ़ी और किन परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव पड़ा,इसकी समीक्षा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार के सामने चुनौती है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हुए सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

शनिवार को फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों में हुए प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। इन प्रदर्शनों में किसान,छात्र,जलवायु कार्यकर्ता और ट्रेड यूनियनों से जुड़े सदस्य शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों, महँगाई,शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाया।

प्रदर्शनकारियों की मांगों में आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना,शिक्षा सुविधाओं में सुधार करना और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाना शामिल था। कई लोगों का कहना था कि रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से परिवारों के बजट पर दबाव पड़ रहा है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई है,क्योंकि इसका असर परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की लागत पर पड़ता है।

हालाँकि,कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन घटनाओं के सिलसिले में 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा के दौरान 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के सदस्य घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई गई।

इन आँकड़ों से पता चलता है कि प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। हालाँकि,शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों को हिंसा की घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। राष्ट्रपति मैक्रों ने भी अपने संबोधन में इसी अंतर को स्पष्ट करने की कोशिश की।

फ्रांस में सितंबर से ही छात्रों के कई बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं, पढ़ाई के अनुकूल माहौल और शैक्षणिक संस्थानों में परिस्थितियों में सुधार की माँग कर रहे हैं। मौजूदा प्रदर्शनों में भी शिक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह हाल के हफ्तों में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं को समझते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार केवल सुरक्षा संबंधी कदमों तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि प्रदर्शनकारियों की समस्याओं पर भी ध्यान देगी।

आने वाले दिनों में सरकार छात्रों,शिक्षकों,ट्रेड यूनियनों,नियोक्ता संगठनों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी। इस संवाद का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशना है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी फ्रांस में व्यापक सामाजिक असंतोष का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। छात्रों की मांगों के साथ-साथ रोजगार,जीवनयापन की लागत और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति भी चर्चा के केंद्र में है। ऐसे में सरकार के लिए विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।

मैक्रों ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि प्रदर्शनों के पीछे महँगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता भी एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिकों की खरीदने की क्षमता बढ़ाने और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

महँगाई का असर लोगों के दैनिक खर्चों पर पड़ता है। भोजन,परिवहन,ऊर्जा और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होने से सीमित आय वाले परिवारों के लिए खर्च संभालना कठिन हो सकता है। ईंधन महँगा होने से केवल वाहन चलाने की लागत ही नहीं बढ़ती,बल्कि माल ढुलाई और कई सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

इसी वजह से प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक राहत और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की माँग उठाई है। सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह लोगों की शिकायतों का समाधान करने के लिए प्रभावी कदम उठाए और साथ ही हिंसा की घटनाओं पर अंकुश लगाए।

फ्रांस में मौजूदा हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक चिंताओं और सामाजिक असंतोष का असर व्यापक जनप्रदर्शनों के रूप में सामने आ सकता है। राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा करने वालों के खिलाफ जवाबदेही तय करने का संदेश दिया है,जबकि सरकार छात्रों और अन्य वर्गों के साथ बातचीत की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की सुरक्षा रणनीति और आर्थिक-सामाजिक मुद्दों पर उठाए जाने वाले कदम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि देश में तनाव किस तरह कम होता है और सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ती है।