रेडवुड सिटी,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय स्क्वैश की उभरती हुई स्टार अनाहत सिंह का सिलिकॉन वैली ओपन में शानदार सफर सेमीफाइनल में समाप्त हो गया। मलेशिया की दिग्गज खिलाड़ी शिवसांगरी सुब्रमण्यम ने उन्हें 3-1 से हराकर टूर्नामेंट के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। मुकाबले की शुरुआत में अनाहत ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए पहला गेम अपने नाम किया,लेकिन इसके बाद मलेशियाई खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की और लगातार तीन गेम जीतकर भारतीय खिलाड़ी की चुनौती समाप्त कर दी। हालाँकि,सेमीफाइनल में हार के बावजूद इस टूर्नामेंट में अनाहत का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा। उन्होंने विश्व स्तर की शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर साबित किया कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्क्वैश में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं।
18 वर्षीय अनाहत के लिए यह मुकाबला अपनी प्रतिभा को एक बार फिर साबित करने का मौका था। विश्व रैंकिंग में 15वें स्थान पर मौजूद भारतीय खिलाड़ी ने टूर्नामेंट के शुरुआती दौर से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराकर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया,लेकिन अंतिम चार के मुकाबले में शिवसांगरी का अनुभव और निरंतरता उन पर भारी पड़ गई।
सिलिकॉन वैली ओपन के सेमीफाइनल में अनाहत सिंह ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की। उन्होंने शुरुआती गेम में अपने शॉट्स पर नियंत्रण बनाए रखा और मलेशियाई खिलाड़ी को दबाव में डाल दिया। अनाहत ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए पहला गेम 11-5 से जीत लिया। इस शुरुआत से भारतीय खिलाड़ी की जीत की उम्मीदें बढ़ गई थीं।
हालाँकि,पहला गेम गंवाने के बाद शिवसांगरी सुब्रमण्यम ने अपने खेल में बदलाव किया। उन्होंने कोर्ट पर बेहतर मूवमेंट दिखाया और अनाहत की कमजोरियों का फायदा उठाना शुरू किया। दूसरे गेम में मलेशियाई खिलाड़ी ने भारतीय स्टार को वापसी का अधिक मौका नहीं दिया और 11-6 से गेम जीतकर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।
इसके बाद शिवसांगरी ने अपनी लय बरकरार रखी। तीसरे गेम में उन्होंने तेज गति और सटीक शॉट्स की मदद से 11-4 से जीत दर्ज की। अब मुकाबले में बने रहने के लिए अनाहत को चौथा गेम जीतना जरूरी था,लेकिन मलेशियाई खिलाड़ी ने अपना दबदबा जारी रखा। चौथे गेम में शिवसांगरी ने 11-7 से जीत हासिल की और 37 मिनट तक चले मुकाबले को 3-1 से अपने नाम कर लिया।
इस हार के साथ अनाहत का सिलिकॉन वैली ओपन में सफर समाप्त हो गया,जबकि शिवसांगरी ने खिताबी मुकाबले में प्रवेश कर लिया। यह मलेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ अनाहत की कुल चौथी और पेशेवर स्क्वैश संघ के दौरे पर तीसरी हार रही।
शिवसांगरी सुब्रमण्यम और अनाहत सिंह के बीच मुकाबला पिछले कुछ समय से भारतीय स्क्वैश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा है। मलेशियाई खिलाड़ी ने इससे पहले आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन गेम्स के महिला एकल फाइनल में भी अनाहत को हराया था। उस मुकाबले में हार के बाद भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था।
हालाँकि,एशियन गेम्स में अनाहत की उपलब्धि ऐतिहासिक रही। वह एशियाई खेलों के महिला एकल स्क्वैश फाइनल में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इस उपलब्धि ने भारतीय स्क्वैश में उनकी स्थिति को और मजबूत किया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया।
सिलिकॉन वैली ओपन के सेमीफाइनल में मिली हार निश्चित रूप से अनाहत के लिए निराशाजनक रही होगी,लेकिन इस टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बताता है कि वह शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने सेमीफाइनल तक पहुँचने के दौरान विश्व स्तर की अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ भी अपना दम दिखाया।
सिलिकॉन वैली ओपन में अनाहत सिंह का सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन क्वार्टर फाइनल से पहले देखने को मिला। उन्होंने आठ बार की विश्व चैंपियन और टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी एल शेरबिनी को सीधे गेमों में हराकर बड़ा उलटफेर किया। इस जीत के साथ उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह बनाई और दिखाया कि वह दबाव में भी बड़े मुकाबले जीत सकती हैं।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने मिस्र की छठी वरीयता प्राप्त सलमा हैनी को भी शिकस्त दी। लगातार मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराकर सेमीफाइनल में पहुँचना अनाहत के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। इन जीतों ने अंतर्राष्ट्रीय सर्किट पर उनके बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया।
विश्व रैंकिंग में 15वें स्थान पर मौजूद अनाहत ने इस प्रतियोगिता में जिस तरह से शीर्ष खिलाड़ियों का सामना किया,उससे उनकी तकनीकी क्षमता और प्रतिस्पर्धी मानसिकता का पता चलता है। सेमीफाइनल में हार के बावजूद उनके प्रदर्शन को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में देखा जा सकता है।
अनाहत सिंह के लिए 2026 का साल अब तक बेहद खास रहा है। उन्होंने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में लड़कियों के एकल वर्ग का खिताब जीतकर इतिहास रचा। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। इस जीत ने जूनियर स्तर पर उनकी प्रतिभा और क्षमता को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
इसके अलावा, 2026 एशियन गेम्स में महिला एकल वर्ग का रजत पदक जीतकर उन्होंने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। इससे पहले 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम्स में भी अनाहत ने शानदार प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने महिला टीम और मिश्रित युगल स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक जीते थे।
कम उम्र में लगातार बड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाली अनाहत भारतीय स्क्वैश के भविष्य की प्रमुख उम्मीदों में शामिल हो गई हैं। जूनियर विश्व चैंपियनशिप का खिताब,एशियन गेम्स के पदक और अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ जीत उनकी प्रगति को दर्शाते हैं।
सिलिकॉन वैली ओपन के सेमीफाइनल में मिली हार के बाद अब अनाहत सिंह की नजरें आगामी प्रतियोगिताओं पर होंगी। इस मुकाबले से उन्हें शिवसांगरी जैसी मजबूत खिलाड़ी के खिलाफ अपनी रणनीति और खेल को और बेहतर बनाने का अनुभव मिला है। शुरुआती गेम जीतने के बाद लगातार तीन गेम गंवाना उनके लिए उन पहलुओं पर काम करने का अवसर भी है, जिनसे बड़े मुकाबलों में वापसी की संभावना मजबूत हो सकती है।
18 साल की अनाहत ने कम समय में भारतीय स्क्वैश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके नाम कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा है। हालाँकि,सिलिकॉन वैली ओपन में वह फाइनल तक नहीं पहुंच सकीं,लेकिन शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाना उनके अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
भारतीय खेल प्रशंसकों को उम्मीद होगी कि अनाहत अपने इस अनुभव से सीख लेकर आगामी टूर्नामेंटों में और मजबूत प्रदर्शन करेंगी तथा भविष्य में देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई उपलब्धियाँ हासिल करेंगी।
