वाशिंगटन,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशभर में बुजुर्गों की देखभाल करने वाले केंद्रों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए 25 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इस पहल के तहत कम से कम 5,000 नई नर्सों की भर्ती करने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रंप ने फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान यह घोषणा की। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं की कीमतों और घरेलू नीतियों से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। बुजुर्गों की देखभाल के लिए घोषित यह योजना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश की गई है।
रैली के दौरान ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके प्रशासन की ओर से बुजुर्गों के हित में यह निवेश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे अमेरिका में बुजुर्गों की देखभाल करने वाली सुविधाओं में कम से कम 5,000 नई नर्सों को काम पर रखने के लिए 250 मिलियन डॉलर खर्च किए जायेंगे। इस योजना से फ्लोरिडा सहित देश के अलग-अलग राज्यों में संचालित देखभाल केंद्रों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। फ्लोरिडा में बुजुर्ग आबादी की बड़ी मौजूदगी के कारण इस तरह की सुविधाओं की माँग विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालाँकि,राष्ट्रपति की घोषणा में निवेश की राशि और भर्ती के लक्ष्य का उल्लेख किया गया, लेकिन योजना को लागू करने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ स्पष्ट नहीं की गईं। यह अभी सामने नहीं आया है कि धनराशि अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में किस आधार पर वितरित की जाएगी। इसके अलावा,भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी और कार्यक्रम की जिम्मेदारी किन सरकारी एजेंसियों को सौंपी जाएगी, इस बारे में भी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
ट्रंप की घोषणा के बाद इस पहल के वास्तविक स्वरूप को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रस्तावित धनराशि का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार स्थायी पदों पर नर्सों की नियुक्ति के लिए आर्थिक सहायता देगी या फिर देखभाल केंद्रों को अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी।
इसी तरह, यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस राशि से केवल नई नियुक्तियाँ की जाएँगी या इसका कुछ हिस्सा मौजूदा कर्मचारियों की कमी पूरी करने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होगा। योजना के तहत नर्सों की नियुक्ति के लिए पात्र संस्थानों का चयन कैसे होगा, इस बारे में भी जानकारी सामने नहीं आई है।
इन विवरणों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है,क्योंकि दीर्घकालिक देखभाल केंद्रों में कर्मचारियों की जरूरत केवल नियुक्तियों की संख्या तक सीमित नहीं होती। यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों को चिकित्सा संबंधी निगरानी,मरीजों की दैनिक जरूरतों और आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होना आवश्यक है। इसलिए भर्ती के साथ-साथ कर्मचारियों के प्रशिक्षण,काम की परिस्थितियों और लंबे समय तक उनकी उपलब्धता पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
फोर्ट मायर्स में आयोजित रैली के दौरान ट्रंप की घोषणा के समय उनके प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इनमें स्वास्थ्य एवं मानव सेवा सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर और मेडिकेयर एवं मेडिकेड सेवा केंद्रों के प्रशासक डॉ. मेहमत ओज शामिल थे।
ट्रंप ने दोनों अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। उनकी मौजूदगी से यह संकेत मिला कि बुजुर्गों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मुद्दे प्रशासन के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं। हालाँकि,घोषणा के दौरान योजना के संचालन, निगरानी और धनराशि के वितरण की जिम्मेदारी को लेकर कोई विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत नहीं की गई।
अमेरिका में बुजुर्गों की देखभाल करने वाले केंद्र उन लोगों को आवासीय और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराते हैं,जिन्हें लंबे समय तक निगरानी या नियमित नर्सिंग सेवाओं की जरूरत होती है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें अस्पताल में इलाज के बाद पुनर्वास की आवश्यकता होती है या जो उम्र और शारीरिक स्थिति के कारण रोजमर्रा के काम स्वतंत्र रूप से नहीं कर पाते। इन केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारियों की मौजूदगी मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता और सेवाओं की उपलब्धता को प्रभावित करती है।
रैली में ट्रंप ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए निवेश की घोषणा के अलावा डॉक्टरों की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रशासन ने दूसरे देशों के साथ समझौतों के माध्यम से ऐसी व्यवस्था तैयार की है,जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतों को विदेशों में प्रचलित कीमतों के करीब लाया जा सकेगा।
ट्रंप ने कहा कि इन प्रयासों के कारण दवाओं की कीमतों में 50 से 90 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालाँकि,उन्होंने इस दावे के समर्थन में रैली के दौरान विस्तृत आँकड़े या सभी दवाओं पर लागू होने वाली किसी समान व्यवस्था का विवरण नहीं दिया। इसलिए कीमतों में बताई गई कमी का वास्तविक प्रभाव संबंधित दवाओं, समझौतों की शर्तों और उनके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।
अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय रहा है। दवाओं की कीमतें,बीमा की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच जैसे मुद्दे आम नागरिकों के साथ-साथ बुजुर्गों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में दवाओं की लागत कम करने के दावे और देखभाल केंद्रों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की घोषणा को स्वास्थ्य नीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने फ्लोरिडा में यह घोषणा ऐसे समय की,जब वह मध्यावधि चुनावों के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी के गवर्नर पद के उम्मीदवार बायरन डोनाल्ड्स और सीनेटर एशले मूडी के लिए भी समर्थन जुटाने की कोशिश की।
रैली में राष्ट्रपति ने मतदाताओं से कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को समर्थन देने की अपील की। उनका तर्क था कि प्रशासन को अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए विधायी समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कर व्यवस्था,आव्रजन कानूनों को लागू करने,विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने से जुड़े विषयों पर भी बात की।
इन व्यापक चुनावी मुद्दों के बीच नर्सों की भर्ती के लिए 25 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव अपनी निर्धारित राशि और स्पष्ट भर्ती लक्ष्य के कारण अलग नजर आया। हालांकि, इसका वास्तविक असर तभी सामने आएगा,जब योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी जारी होगी और नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी।
अमेरिका में दीर्घकालिक देखभाल केंद्र उन बुजुर्गों के लिए महत्वपूर्ण हैं,जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी, पुनर्वास या रोजमर्रा की गतिविधियों में सहायता की जरूरत होती है। इन संस्थानों में नर्सें मरीजों की स्थिति पर नजर रखने,दवाएँ देने,स्वास्थ्य संबंधी बदलावों की पहचान करने और अन्य चिकित्सा कर्मियों के साथ समन्वय करने जैसी जिम्मेदारियां निभाती हैं।
यदि घोषित योजना के तहत 5,000 नई नर्सों की भर्ती होती है,तो इससे संबंधित केंद्रों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है,लेकिन इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नियुक्तियाँ किन क्षेत्रों में होती हैं,कितने समय तक कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध रहती हैं और सहायता की जरूरत वाले संस्थानों तक धनराशि किस तरह पहुंचती है।
फिलहाल,ट्रंप प्रशासन ने इस पहल के लिए निवेश की राशि और भर्ती का लक्ष्य घोषित किया है,जबकि इसे लागू करने की समयसीमा और विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट होना बाकी है। आने वाले समय में योजना से जुड़ी शर्तों और सरकारी दिशा-निर्देशों से यह पता चलेगा कि इस निवेश के माध्यम से अमेरिका के बुजुर्गों की देखभाल व्यवस्था को किस हद तक मजबूत किया जा सकेगा।
