अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप की नजर? बोले- अमेरिकी नौसेना के जहाज द्वीप के पास से गुजरेंगे, रुबियो करेंगे डील

वाशिंगटन,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के बाद क्यूबा अमेरिकी दबाव का अगला केंद्र बन सकता है। फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में रिपब्लिकन पार्टी की एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने क्यूबा के भविष्य को लेकर ऐसी टिप्पणी की,जिसने अमेरिका की विदेश नीति और कैरेबियाई क्षेत्र में उसकी रणनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ईरान से लौटते समय अमेरिकी नौसेना के जहाज क्यूबा के पास से गुजरेंगे और उसके बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो को समझौता करने के लिए भेजा जाएगा। हालाँकि,राष्ट्रपति ने क्यूबा के खिलाफ किसी नए सैन्य अभियान,औपचारिक कूटनीतिक पहल या संभावित समझौते की शर्तों की घोषणा नहीं की।

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है,जब वह अपनी सरकार की विदेश नीति का बचाव करते हुए ईरान और वेनेजुएला से जुड़े अभियानों का उल्लेख कर रहे थे। रैली में क्यूबा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “वह जानना चाहते हैं कि क्यूबा का क्या होगा। अरे,छोड़ो भी। चिंता मत करो,हम ईरान से वापस आते हुए क्यूबा का भी ध्यान रखेंगे।” उनके इस बयान पर वहाँ मौजूद दर्शकों ने तालियाँ बजाईं।

राष्ट्रपति की टिप्पणी में क्यूबा के प्रति सख्त रुख अपनाने का संकेत जरूर था,लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका आशय किसी वास्तविक सैन्य कार्रवाई से था या वह अपने प्रशासन की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक संदेश दे रहे थे। इसलिए फिलहाल इस बयान को क्यूबा के खिलाफ घोषित सैन्य योजना के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

रैली के दौरान ट्रंप ने एक काल्पनिक स्थिति का वर्णन किया,जिसमें मध्य पूर्व से लौट रहे अमेरिकी नौसेना के जहाज क्यूबा के तट के करीब पहुँचेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाज द्वीप के पास से गुजरेंगे और उनमें से एक को तट से करीब 50 गज की दूरी पर रोक दिया जाएगा। इसके बाद,उनके शब्दों में,क्यूबा के लोग हाथ खड़े कर देंगे और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए मार्को रुबियो को भेजा जाएगा।

ट्रंप के इस बयान ने सैन्य ताकत और कूटनीति को एक साथ जोड़ने वाली उनकी शैली को सामने रखा। हालाँकि,उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिकी नौसेना को वास्तव में क्यूबा के पास किसी विशेष अभियान के लिए भेजने की योजना है या नहीं। न ही उन्होंने कहा कि पेंटागन ने इस तरह की गतिविधि पर विचार किया है।

इसी तरह,यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि वाशिंगटन और हवाना के बीच किसी नई बातचीत की शुरुआत हुई है या दोनों देशों के अधिकारी किसी संभावित समझौते पर चर्चा कर रहे हैं। क्यूबा को किन शर्तों को मानना होगा और अमेरिका किस तरह की रियायतों की अपेक्षा करेगा,इस बारे में भी राष्ट्रपति ने कोई विवरण नहीं दिया।

इसलिए ट्रंप की टिप्पणी को फिलहाल उनके राजनीतिक भाषण के संदर्भ में समझा जा रहा है। बयान से क्यूबा के प्रति अमेरिकी प्रशासन की सख्त सोच का संकेत मिलता है, लेकिन वास्तविक नीति में बदलाव की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा और ठोस कदमों की जानकारी जरूरी होगी।

ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की प्रशंसा करते हुए उन्हें बेहतरीन व्यक्ति बताया। रुबियो लंबे समय से क्यूबा की सरकार के प्रति कठोर अमेरिकी नीति के समर्थक रहे हैं। फ्लोरिडा के क्यूबा-अमेरिकी राजनीतिक परिवेश से जुड़े होने के कारण क्यूबा के साथ अमेरिका के संबंधों का मुद्दा उनकी विदेश नीति में विशेष महत्व रखता है।

रुबियो का नाम लेते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि क्यूबा के साथ किसी समझौते की स्थिति बनती है,तो विदेश मंत्री उसमें भूमिका निभा सकते हैं। हालाँकि,राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि रुबियो को कोई औपचारिक जिम्मेदारी सौंपी गई है या नहीं। क्यूबा के अधिकारियों के साथ बातचीत,संभावित वार्ता के मुद्दों और समझौते की शर्तों को लेकर भी कोई जानकारी साझा नहीं की गई।

अमेरिका और क्यूबा के संबंध लंबे समय से राजनीतिक मतभेदों,आर्थिक प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में किसी भी नई कूटनीतिक पहल का असर दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ कैरेबियाई क्षेत्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है,लेकिन ट्रंप की हालिया टिप्पणी के बाद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनके प्रशासन की ओर से क्यूबा को लेकर कोई नई नीति तैयार की जा रही है।

क्यूबा पर टिप्पणी करने से पहले ट्रंप ने वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ अपनी सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़कर न्याय के कटघरे में पहुँचाया है और वह मुकदमे का सामना करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में अभियान एक ही दिन में पूरा कर लिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके बाद अमेरिका देश में तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए वहाँ के साथ मिलकर काम कर रहा है। राष्ट्रपति ने इन उदाहरणों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका प्रशासन विदेश नीति के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटता।

हालाँकि,वेनेजुएला से जुड़े इन बयानों को ट्रंप के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। रैली के दौरान उन्होंने अभियान के संचालन, उससे जुड़े व्यापक परिणामों या तेल उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया। उनका मुख्य जोर अपनी सरकार की कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए उसके समर्थन में राजनीतिक संदेश देना था।

क्यूबा का जिक्र भी इसी संदर्भ में सामने आया। ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला के उदाहरणों के बाद द्वीप को लेकर अपनी टिप्पणी की,जिससे उनकी विदेश नीति के अलग-अलग मोर्चों को एक ही भाषण में जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।

रैली में ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अभियानों ने तेहरान की इन क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान वाशिंगटन के साथ समझौते पर नहीं पहुँचता,तो अमेरिका आगे और हमले कर सकता है।

राष्ट्रपति ने क्यूबा को लेकर अपनी टिप्पणी को सीधे तौर पर ईरान के बाद शुरू होने वाले किसी सैन्य अभियान से नहीं जोड़ा। इसके बावजूद,दोनों देशों का उल्लेख एक ही भाषण में होने से यह सवाल उठा कि क्या ट्रंप प्रशासन विभिन्न क्षेत्रों में अमेरिकी दबाव बढ़ाने की नीति अपनाना चाहता है।

फिलहाल,क्यूबा को लेकर उनके बयान में किसी कार्रवाई की समयसीमा,सैन्य तैनाती की योजना या वार्ता की औपचारिक प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ईरान से जुड़े अभियानों के बाद अमेरिका तत्काल क्यूबा के खिलाफ कोई सैन्य कदम उठाने वाला है।

अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंध वर्ष 1959 की क्यूबा क्रांति के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक व्यवस्था,आर्थिक प्रतिबंधों, सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों का क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भी द्विपक्षीय संबंधों की बहस का प्रमुख हिस्सा रहा है।

क्यूबा के प्रति कठोर नीति का समर्थन करने वाले अमेरिकी नेताओं का तर्क रहा है कि हवाना पर दबाव बनाए रखना राजनीतिक बदलाव और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। वहीं दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के समर्थक संवाद और कूटनीतिक संपर्क को तनाव कम करने का माध्यम मानते हैं। इस तरह क्यूबा का मुद्दा केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है,बल्कि अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी इसका महत्व बना हुआ है।

फ्लोरिडा में क्यूबा-अमेरिकी समुदाय की मौजूदगी के कारण यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय रहता है। मार्को रुबियो लंबे समय से क्यूबा की सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाने के समर्थक रहे हैं। यही वजह है कि ट्रंप के भाषण में उनका उल्लेख राजनीतिक और कूटनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ट्रंप की टिप्पणी ने क्यूबा को लेकर अमेरिकी प्रशासन की संभावित रणनीति पर सवाल जरूर खड़े किए हैं,लेकिन अभी तक किसी औपचारिक सैन्य अभियान या नई वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है। राष्ट्रपति ने अपने बयान में अमेरिकी नौसेना के जहाजों और रुबियो की संभावित भूमिका का जिक्र किया,मगर इसे लागू करने से संबंधित कोई स्पष्ट निर्देश या योजना सामने नहीं रखी।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वाशिंगटन क्यूबा के प्रति अपने रुख में कोई ठोस बदलाव करता है, हवाना के साथ बातचीत शुरू होती है या अमेरिकी प्रशासन मौजूदा प्रतिबंधों और दबाव की नीति को ही आगे बढ़ाता है। फिलहाल, फोर्ट मायर्स की रैली में दिया गया ट्रंप का बयान क्यूबा को लेकर उनके सख्त राजनीतिक संदेश के रूप में सामने आया है। इसे किसी घोषित सैन्य कार्रवाई का संकेत मानने से पहले आधिकारिक कदमों और दोनों देशों के बीच वास्तविक कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी होगा।