वाशिंगटन,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनके व्यक्तिगत अनुरोध पर अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा करने की सहमति दी। ट्रंप ने इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि कई वर्षों तक रूस की हिरासत में रहने के बाद हबर्ड अब अमेरिका लौट चुके हैं। उनके मुताबिक,हबर्ड की वापसी से उनका परिवार बेहद खुश है। हालाँकि, इस रिहाई से जुड़ी शर्तों,इसके पीछे हुई बातचीत और रूस को बदले में किसी तरह की रियायत दिए जाने के सवालों पर ट्रंप ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने अपने समर्थकों को इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने सीधे स्टीफन हबर्ड की रिहाई का मुद्दा उठाया था। ट्रंप के अनुसार,उन्होंने पुतिन से व्यक्तिगत अपील करते हुए अमेरिकी नागरिक को वापस भेजने का अनुरोध किया। उनका दावा है कि रूसी राष्ट्रपति ने उनकी बात स्वीकार कर ली और इसके बाद हबर्ड की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
ट्रंप ने रैली में इस बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पुतिन से पूछा था कि क्या वह उनके लिए एक काम कर सकते हैं। इसके बाद उन्होंने रूसी हिरासत में मौजूद स्टीफन हबर्ड को अमेरिका वापस भेजने की माँग रखी। ट्रंप के मुताबिक,पुतिन ने उनके अनुरोध को मान लिया और हबर्ड को अमेरिका लौटने का अवसर मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक बताते हुए कहा कि हबर्ड अपने देश पहुँच चुके हैं और उनके परिवार के सदस्य उनसे दोबारा मिलकर काफी प्रसन्न हैं।
ट्रंप ने स्टीफन हबर्ड की रिहाई को इस बात का उदाहरण बताया कि विदेशी नेताओं के साथ सीधे संवाद के जरिए महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उनका कहना था कि व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत करने से कई ऐसे मामलों में प्रगति संभव हो सकती है, जिनका समाधान लंबे समय से नहीं निकल पा रहा हो। उन्होंने इस घटनाक्रम को अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के तौर पर पेश किया और संकेत दिया कि शीर्ष नेताओं के बीच सीधी बातचीत अमेरिकी नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मामलों को सुलझाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
हालाँकि, फिलहाल ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि हबर्ड की रिहाई के लिए रूस के साथ किस तरह की औपचारिक या अनौपचारिक बातचीत हुई थी। राष्ट्रपति ने यह भी नहीं बताया कि पुतिन के साथ फोन पर बातचीत के अतिरिक्त अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच कोई अन्य संपर्क हुआ था या नहीं। रिहाई की प्रक्रिया में अमेरिकी विदेश विभाग,अन्य सरकारी एजेंसियों या किसी विशेष राजनयिक प्रतिनिधि की क्या भूमिका रही,इस बारे में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी।
रिहाई से जुड़ी शर्तें भी अब तक स्पष्ट नहीं की गई हैं। यह सवाल भी अनुत्तरित है कि क्या अमेरिका ने इस मामले में रूस को कोई कूटनीतिक या राजनीतिक रियायत देने का आश्वासन दिया था। ट्रंप ने हबर्ड की अमेरिका वापसी की सटीक तारीख और यात्रा की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी साझा नहीं किए। इसलिए फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों पर आधारित है।
स्टीफन हबर्ड की रिहाई का जिक्र करते हुए ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की आलोचना भी की। उन्होंने सवाल उठाया कि हबर्ड को पहले अमेरिका वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास क्यों नहीं किए गए। ट्रंप के अनुसार,हबर्ड को बाइडेन के कार्यकाल के दौरान हिरासत में लिया गया था और उसी समय उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए थे।
ट्रंप ने कहा कि जिस रात हबर्ड को हिरासत में लिया गया,उसी समय उन्हें वापस लाने की कोशिश की जानी चाहिए थी। उनके इस बयान का उद्देश्य अपने प्रशासन के प्रयासों को पूर्ववर्ती सरकार की कार्यशैली से बेहतर बताना था। अमेरिकी राजनीति में विदेशों में हिरासत में लिए गए नागरिकों की वापसी अक्सर एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है। ऐसे मामलों में सरकार की भूमिका,कूटनीतिक प्रयासों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे हैं।
हालाँकि,ट्रंप की टिप्पणी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हबर्ड की रिहाई से पहले बाइडेन प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किया था। इस संबंध में उन्होंने अपने बयान के दौरान कोई विस्तृत तथ्य या आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किए। हबर्ड की हिरासत के दौरान अमेरिकी प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों और रूस के साथ हुई बातचीत का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही इस मामले की कूटनीतिक पृष्ठभूमि को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
ट्रंप ने यह भी बताया कि स्टीफन हबर्ड के बेटे से मुलाकात ने उन पर गहरा प्रभाव डाला था। राष्ट्रपति के मुताबिक,हबर्ड का बेटा अपने पिता को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था। उन्होंने कहा कि बेटे की कोशिशों और अपने पिता को लेकर उसकी चिंता ने उन्हें प्रभावित किया। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि हबर्ड का परिवार लंबे समय से उनके लौटने का इंतजार कर रहा था।
विदेश में किसी नागरिक के हिरासत में रहने की स्थिति में उसके परिजनों को अक्सर लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। परिवार को यह जानने की चिंता रहती है कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति की स्थिति कैसी है और उसकी घर वापसी कब संभव होगी। ट्रंप ने हबर्ड के मामले को इसी मानवीय पहलू से जोड़ते हुए कहा कि उनकी वापसी परिवार के लिए राहत देने वाली खबर है।
राष्ट्रपति ने रूस में हबर्ड के बिताए समय को कठिन बताया,लेकिन उनकी हिरासत की परिस्थितियों,आरोपों या रिहाई से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा नहीं की। इसलिए हबर्ड को किन परिस्थितियों में हिरासत में रखा गया था और उनकी रिहाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई,इसे लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं।
स्टीफन हबर्ड की रिहाई का मुद्दा उठाने के साथ ही ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि इस संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है और दोनों पक्षों के बीच शांति का रास्ता निकल सकता है। ट्रंप ने युद्ध को एक बड़ी त्रासदी बताते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि यह जल्द खत्म हो।
रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध में हो रहे नुकसान का जिक्र करते हुए दावा किया कि हर महीने औसतन 25 हजार सैनिक मारे जा रहे हैं। हालाँकि,उन्होंने इस आँकड़े के समर्थन में कोई विस्तृत विवरण या स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की। युद्ध में हताहतों की वास्तविक संख्या का आकलन करना कठिन रहा है,क्योंकि अलग-अलग पक्षों की ओर से जारी आँकड़ों में अंतर देखने को मिलता है।
ट्रंप लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। उनका कहना है कि बातचीत और शीर्ष नेताओं के बीच संपर्क के जरिए इस संघर्ष का समाधान खोजा जा सकता है। लेकिन युद्ध को समाप्त करने के लिए क्षेत्रीय विवादों,सुरक्षा संबंधी चिंताओं और दोनों देशों की राजनीतिक मांगों पर सहमति बनाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
स्टीफन हबर्ड की रिहाई ऐसे समय में सामने आई है,जब रूस और अमेरिका के बीच संबंधों पर रूस-यूक्रेन युद्ध का गहरा प्रभाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं,लेकिन राजनयिक संपर्क और बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ऐसे माहौल में किसी अमेरिकी नागरिक की रिहाई को मानवीय और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है।
फिर भी,ट्रंप ने यह नहीं बताया कि हबर्ड की रिहाई का रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चल रही किसी व्यापक बातचीत या संभावित समझौते से कोई संबंध था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस मामले पर हुई चर्चा का दोनों देशों के भविष्य के संबंधों पर कोई व्यापक प्रभाव पड़ेगा या नहीं। फिलहाल राष्ट्रपति ने इसे व्यक्तिगत अपील के परिणाम के रूप में प्रस्तुत किया है।
कुल मिलाकर,ट्रंप का दावा है कि पुतिन के साथ सीधे संवाद से स्टीफन हबर्ड की अमेरिका वापसी संभव हुई। उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताते हुए पूर्ववर्ती प्रशासन पर भी सवाल उठाए। हालाँकि,रिहाई की पूरी प्रक्रिया, उसकी शर्तों और रूस-अमेरिका संबंधों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। दूसरी ओर,रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द समाप्त करने की ट्रंप की उम्मीद के बावजूद संघर्ष के समाधान की दिशा और संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
