नई दिल्ली,27 अक्टूबर (युआईटीवी)- टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व और कॉर्पोरेट प्रशासन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर नोएल टाटा ने गंभीर सवाल उठाते हुए निर्णय प्रक्रिया में कथित प्रक्रियागत खामियों और संभावित हितों के टकराव की जाँच की माँग की है। उन्होंने कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियाँ उपलब्ध कराने को कहा है। नोएल टाटा का तर्क है कि चंद्रशेखरन को अगले पाँच वर्षों के लिए दोबारा कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने से संबंधित प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं लाया गया। उन्होंने इस फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है,जब टाटा समूह में नेतृत्व की निरंतरता, बोर्ड की निर्णय प्रक्रिया और कंपनी के आंतरिक नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। नोएल टाटा ने अपने पत्र में बोर्ड बैठक के एजेंडे, समिति की चर्चाओं, मतदान की प्रक्रिया और संबंधित व्यावसायिक संबंधों से जुड़ी जानकारी माँगी है। फिलहाल टाटा संस की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनके मुताबिक,इस बैठक के मूल एजेंडे और बाद में संशोधित किए गए एजेंडे में कार्यकारी चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। उनका दावा है कि एजेंडे में सातवें बिंदु को केवल नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की रिपोर्ट या चर्चा के रूप में दर्ज किया गया था,लेकिन इसी बिंदु के तहत पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव सामने लाया गया।
नोएल टाटा का कहना है कि किसी कंपनी में शीर्ष पद पर नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण फैसले के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन और निदेशकों को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। उनके अनुसार,यदि प्रस्ताव को एजेंडे में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया था,तो यह सवाल उठता है कि बोर्ड के सदस्यों को निर्णय पर विचार करने का पूरा अवसर मिला था या नहीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की बैठक से संबंधित एजेंडा और कार्यवृत्त निदेशकों के साथ पहले से साझा नहीं किए गए थे। इससे निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालाँकि,इन आरोपों के आधार पर पुनर्नियुक्ति को अवैध ठहराने का अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब संबंधित दस्तावेजों और कंपनी के नियमों की जाँच हो।
नोएल टाटा ने टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी कंपनी के आंतरिक नियमों का हवाला देते हुए यह सवाल भी उठाया है कि चेयरमैन के चयन के लिए आवश्यक चयन समिति का गठन क्यों नहीं किया गया। उनका दावा है कि कंपनी के नियमों के तहत इस प्रक्रिया में कुछ विशेष निदेशकों की सहमति आवश्यक थी,लेकिन कथित तौर पर इस शर्त का पालन नहीं किया गया।
उनके अनुसार,जब मामला कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण पद से जुड़ा हो, तो नियुक्ति की प्रक्रिया में नियमों का पालन और बोर्ड के सदस्यों की भूमिका स्पष्ट होना आवश्यक है। नोएल टाटा ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि कंपनी सचिव ने बोर्ड बैठक के अंतिम कार्यवृत्त तैयार होने से पहले ही प्रस्ताव को प्रमाणित कर दिया और उसे रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल कर दिया।
इस मुद्दे पर उनका सवाल है कि जब बैठक का अंतिम रिकॉर्ड तैयार नहीं हुआ था,तो प्रस्ताव को प्रमाणित करने और नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आधार क्या था। इस संबंध में कंपनी के रिकॉर्ड और लागू नियमों की जाँच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
अपने पत्र में नोएल टाटा ने केवल स्पष्टीकरण माँगने तक बात सीमित नहीं रखी,बल्कि कई अहम दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया है। उन्होंने 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक की मूल ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग,उसकी लिखित प्रतिलिपि और बैठक का अंतिम कार्यवृत्त माँगा है। इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक निदेशक के मतदान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है,ताकि यह पता चल सके कि पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर किसने क्या रुख अपनाया था।
उन्होंने बोर्ड से जुड़े दस्तावेजों में किए गए बदलावों का पूरा ऑडिट ट्रेल भी माँगा है। ऑडिट ट्रेल से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी दस्तावेज में कब,किस तरह और किसके स्तर पर संशोधन किए गए। नोएल टाटा के अनुसार,इन जानकारियों के आधार पर बोर्ड की बैठक में अपनाई गई प्रक्रिया और प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने से जुड़ी परिस्थितियों का आकलन किया जा सकेगा।
सात दिनों के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराने की माँग के बाद अब कंपनी की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालाँकि,यह स्पष्ट नहीं है कि टाटा संस इन सभी दस्तावेजों को किस रूप में उपलब्ध कराएगी या उठाए गए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देगी।
इस विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैनो वन वेयरहाउसिंग नामक कंपनी से संबंधित है। नोएल टाटा ने इस कंपनी में एन. चंद्रशेखरन की पत्नी और पुत्र के निदेशक होने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया है कि क्या इन व्यावसायिक संबंधों की जानकारी चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर विचार करने से पहले टाटा संस के बोर्ड को दी गई थी।
उनकी आपत्ति संभावित हितों के टकराव से जुड़ी है। कॉर्पोरेट प्रशासन के सिद्धांतों के अनुसार,यदि किसी निर्णय से जुड़े व्यक्ति के निजी या पारिवारिक व्यावसायिक संबंध प्रासंगिक हो सकते हैं,तो उनके खुलासे और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका का उचित आकलन किया जाना जरूरी होता है। हालाँकि,केवल किसी कंपनी में परिवार के सदस्यों के निदेशक होने से अपने आप हितों का टकराव साबित नहीं होता। इसके लिए संबंधित व्यावसायिक संबंधों की प्रकृति, निर्णय से उनका जुड़ाव और लागू नियमों की जांच आवश्यक होगी।
नोएल टाटा ने इस मामले में जानकारी साझा किए जाने की स्थिति स्पष्ट करने की माँग की है। उनका सवाल है कि क्या बोर्ड को संबंधित संबंधों के बारे में जानकारी थी और यदि थी, तो पुनर्नियुक्ति पर विचार करते समय इस पहलू को किस तरह ध्यान में रखा गया।
नोएल टाटा ने टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस और टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति के सदस्य वेणु श्रीनिवासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, श्रीनिवासन ने तीन सितंबर को हुई चर्चाओं में हिस्सा लिया और मतदान भी किया। नोएल टाटा का कहना है कि कथित व्यावसायिक संबंधों से जुड़ी जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए था और यह भी विचार किया जाना चाहिए था कि उन्हें संबंधित निर्णय प्रक्रिया से अलग रहना चाहिए या नहीं।
यह आपत्ति भी संभावित हितों के टकराव और बोर्ड के सदस्यों की जिम्मेदारियों से जुड़ी है। किसी निदेशक या समिति सदस्य की भागीदारी उचित थी या नहीं,इसका आकलन संबंधित नियमों,व्यावसायिक संबंधों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल इस संबंध में नोएल टाटा की ओर से उठाए गए सवालों पर टाटा संस की सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
टाटा संस में चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति को लेकर उठे सवाल कंपनी की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को चर्चा के केंद्र में ला सकते हैं। टाटा संस समूह की होल्डिंग कंपनी है, इसलिए इसके शीर्ष नेतृत्व से जुड़े फैसलों का महत्व केवल एक पद की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहता। बोर्ड की कार्यप्रणाली, निदेशकों की जिम्मेदारियाँ,नियुक्ति संबंधी नियमों का पालन और संभावित हितों के टकराव का प्रबंधन किसी भी बड़े कारोबारी समूह के प्रशासनिक ढाँचे के अहम हिस्से होते हैं।
नोएल टाटा की ओर से दस्तावेजों और रिकॉर्ड की माँग का उद्देश्य कथित प्रक्रियागत कमियों को स्पष्ट करना है। दूसरी ओर,आरोपों पर कंपनी का पक्ष सामने आने और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया कंपनी के आंतरिक नियमों और प्रशासनिक मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
आने वाले दिनों में टाटा संस की प्रतिक्रिया और मांगे गए दस्तावेजों को लेकर उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे। यदि कंपनी स्पष्टीकरण देती है,तो उससे पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया और बोर्ड के निर्णय के आधार को समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल नोएल टाटा के पत्र ने टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े इस मामले को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है।
