वाशिंगटन,2 नवंबर (युआईटीवी)- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और सामरिक सहयोग को नई मजबूती देने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। चारों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करने वाली आर्थिक दबाव की नीतियों, मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और बाजार को विकृत करने वाली गतिविधियों पर भी चिंता जाहिर की गई है। चारों देशों का मानना है कि आर्थिक सुरक्षा केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक समृद्धि के लिए भी बेहद जरूरी है।
अमेरिका के अटलांटा में 31 अक्टूबर को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए। बैठक के बाद चारों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, समृद्ध और सुरक्षित बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
संयुक्त बयान के अनुसार, चारों देशों ने भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि दुनिया के कई महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से अधिक उत्पादन, गैर-बाजार नीतियां और मनमाने निर्यात प्रतिबंध वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक और रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए क्वाड देश वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी साझेदारी बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।
क्वाड की बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाना रहा। आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों में महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे खनिजों की मांग बढ़ने के साथ इनके उत्पादन और प्रसंस्करण पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है।
ऐसे में किसी एक देश या सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चारों देशों की प्राथमिकता बन गया है। इसके लिए क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल के तहत कई स्तरों पर सहयोग किया जाएगा। चारों देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और पुराने औद्योगिक सामान से महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा प्राप्त करने, उनके प्रसंस्करण की तकनीक विकसित करने और नई रिफाइनरियों तथा प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना में सहयोग करेंगे।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कचरे से खनिज निकालने की तकनीक को बढ़ावा देना है। पुराने मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद उपयोगी खनिजों को वैज्ञानिक तरीके से निकालकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नए खनिजों के खनन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस दिशा में अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने वाली सुविधाओं तथा संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए एक करोड़ डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस आर्थिक सहयोग से नई तकनीकों के इस्तेमाल, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत के लिए यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इन उद्योगों को भविष्य में बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता होगी। ऐसे में क्वाड के माध्यम से तकनीक, निवेश और संसाधनों का सहयोग भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत कर सकता है।
क्वाड देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। संयुक्त विज्ञप्ति के अनुसार, चारों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद एआई तकनीक तक पहुँच बढ़ाने के लिए आठ करोड़ 50 लाख डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा रखते हैं। इस पहल को क्वाड एसआई एक्सेलेरेटर के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के देशों में आधुनिक एआई तकनीक के विकास, इस्तेमाल और उपलब्धता को बढ़ावा देना है। वर्तमान समय में एआई का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग, परिवहन, रक्षा और वित्तीय सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई तकनीक तक सुरक्षित और भरोसेमंद पहुँच आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बन गई है।
चारों देशों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को ऐसी तकनीक उपलब्ध होनी चाहिए, जिसका इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से किया जा सके और जो उनके आर्थिक तथा सामाजिक विकास में योगदान दे। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञता, अनुसंधान, निवेश और आधुनिक डिजिटल क्षमताओं को साझा करने पर जोर दिया जाएगा।
एआई के साथ-साथ सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवेयर की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत बनाने की योजना है। इन तकनीकों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और कच्चे माल की उपलब्धता को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसलिए चारों देश संभावित कमजोर कड़ियों की पहचान करेंगे और ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास करेंगे, जिससे वैश्विक संकट या व्यापारिक प्रतिबंधों के दौरान तकनीकी उत्पादन प्रभावित न हो।
बैठक में समुद्री सुरक्षा को केवल सामरिक विषय नहीं,बल्कि वैश्विक आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र से ऊर्जा संसाधनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का बड़े पैमाने पर परिवहन होता है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
चारों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इन मार्गों का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार में विशेष महत्व है। यदि इन क्षेत्रों में संघर्ष, अवरोध या किसी प्रकार की असुरक्षा पैदा होती है, तो इसका असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार,तेल की कीमतों और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के अनुरूप समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवागमन की आवश्यकता दोहराई गई। चारों देशों ने कहा कि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के विपरीत उन पर किसी भी प्रकार का मनमाना टोल नहीं लगाया जाना चाहिए।
भारत की समुद्री भूमिका को देखते हुए चेन्नई से पर्थ तक आयोजित क्वाड की दूसरी समुद्री पर्यवेक्षक यात्रा को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। यह यात्रा 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक भारतीय तटरक्षक बल के एक अपतटीय गश्ती पोत पर आयोजित की गई थी। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समुद्री गतिविधियों की निगरानी, सूचनाओं के आदान-प्रदान और अवैध समुद्री गतिविधियों से निपटने के लिए चारों देशों के बीच समन्वय को मजबूत करना था। समुद्री पर्यवेक्षण के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों, अवैध व्यापार और समुद्री सुरक्षा से जुड़े खतरों की पहचान करना आसान हो सकता है।
क्वाड देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की योजनाओं पर भी सहमति जताई है। चारों देश 2027 में सी ड्रैगन अभ्यास के दौरान हिंद-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग पहल के तहत अपना पहला संयुक्त अभ्यास करने की तैयारी कर रहे हैं।
इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री निगरानी की क्षमता बढ़ाना और विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना होगा। इससे समुद्र में होने वाली गतिविधियों की जानकारी साझा करने और संभावित खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा,2027 की शुरुआत में समुद्री क्षेत्र जागरूकता पर पहला क्वाड संगोष्ठी आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, आधुनिक निगरानी तकनीक, सूचना साझा करने की व्यवस्था और समुद्री चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस तरह की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे न केवल चारों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों को भी समुद्री सुरक्षा से जुड़ी आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है।
आर्थिक और सामरिक सहयोग के साथ डिजिटल बुनियादी ढाँचे को भी क्वाड की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। चारों देशों ने सुरक्षित और तेज समुद्री डेटा केबल नेटवर्क विकसित करने पर सहमति जताई है। आज के दौर में अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल संचार का बड़ा हिस्सा समुद्र के भीतर बिछाई गई केबलों के माध्यम से संचालित होता है।
ऐसे में समुद्री डेटा केबलों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि इन केबलों को नुकसान पहुँचता है या किसी कारण से इनकी सेवाएँ बाधित होती हैं,तो कई देशों की डिजिटल और आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। क्वाड देश इस व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए सहयोग करेंगे।
इसके अलावा, पाँचवीं और छठी पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक तथा ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क के विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से तेज इंटरनेट, बेहतर नेटवर्क क्षमता और डिजिटल सेवाओं का विस्तार संभव होगा।
चारों देश दूरसंचार क्षेत्र में भरोसेमंद तकनीकी साझेदारी विकसित करना चाहते हैं,ताकि महत्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्क के संचालन में सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे। इसके लिए तकनीकी मानकों, उपकरणों और नेटवर्क से जुड़ी क्षमताओं के विकास में सहयोग किया जाएगा।
क्वाड देशों ने सरकारी स्तर पर होने वाली बैठकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का भी फैसला किया है। इसके तहत पहली बार क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम आयोजित करने की घोषणा की गई है। इस मंच पर चारों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और नीति विशेषज्ञ एक साथ आएँगे।
इसका उद्देश्य व्यापारिक सहयोग को केवल सरकारी समझौतों तक सीमित न रखते हुए कंपनियों और निवेशकों के बीच भी मजबूत साझेदारी विकसित करना है। महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में निवेश तथा कारोबारी अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस मंच के माध्यम से निजी कंपनियों को अपनी जरूरतों, चुनौतियों और निवेश योजनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। इससे चारों देशों के बीच नई परियोजनाओं और व्यावसायिक समझौतों का रास्ता खुल सकता है।
क्वाड बैठक में साइबर अपराध और अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर भी गंभीर चिंता जताई गई। संयुक्त बयान में कहा गया कि संगठित आपराधिक गिरोह लोगों की तस्करी करके उन्हें जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी के काम में शामिल करते हैं। इन गिरोहों के कारण दुनिया के अलग-अलग देशों के नागरिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ऑनलाइन ठगी के ऐसे नेटवर्क अक्सर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होते हैं। इनमें लोगों को नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर दूसरे देशों में ले जाया जाता है और बाद में उन्हें जबरन साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जाता है। इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए केवल एक देश की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती।
इसी वजह से चारों देशों ने ऐसे आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने, उनके संचालकों की पहचान करने और उन्हें जवाबदेह बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके लिए सूचना साझा करने, जाँच एजेंसियों के बीच सहयोग और साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
बैठक के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका का विशेष उल्लेख किया गया। चारों देशों ने 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही राहत और बचाव अभियान में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की।
संयुक्त बयान में भारत को नेपाल के लिए सबसे पहले सहायता पहुँचाने वाला देश बताया गया। इस दौरान अन्य क्वाड देशों की ओर से दिए गए सहयोग का भी उल्लेख किया गया। भारत की भौगोलिक स्थिति और आपदा प्रबंधन क्षमता को देखते हुए क्षेत्रीय संकटों के दौरान उसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसके अलावा,भारत में नवंबर में आयोजित होने वाले वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास में अमेरिका,जापान और ऑस्ट्रेलिया के पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे। इस अभ्यास का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री पहुँचाने,बचाव कार्यों का समन्वय करने और विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों को बेहतर बनाना है।
इस तरह के अभ्यास से चारों देशों के बीच आपातकालीन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव साझा होगा। भूकंप, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित सहायता पहुँचाने में इससे मदद मिल सकती है।
क्वाड देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को भी अपनी साझा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसी दिशा में सितंबर में पहली बार क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम आयोजित किया गया था। इस मंच पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ईंधन के सुरक्षित स्टॉक को मजबूत बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
वैश्विक स्तर पर युद्ध, राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक आपदाओं और व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में देशों के पास पर्याप्त ईंधन भंडार होना जरूरी है। चारों देश ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और आपातकालीन परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
इसके साथ ही प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश फिजी में बंदरगाहों के आधुनिकीकरण में भी क्वाड सहयोग कर रहा है। इसके तहत सुवा,लाउटोका और रोकोबिली बंदरगाहों के विकास पर काम किया जा रहा है। इन बंदरगाहों के आधुनिक होने से समुद्री परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिल सकती है।
प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए बेहतर बंदरगाह और परिवहन सुविधाएँ आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आपदा के समय राहत सामग्री तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी आसान हो सकती है।
अटलांटा में हुई विदेश मंत्रियों की यह बैठक इस वर्ष मई और जुलाई में आयोजित बैठकों के बाद तीसरी महत्वपूर्ण बैठक थी। चारों देशों ने भविष्य में क्वाड नेताओं की अगली शिखर बैठक और विदेश मंत्रियों की अगली बैठक आयोजित करने की दिशा में भी काम जारी रखने पर सहमति जताई।
इस बैठक के फैसलों से स्पष्ट है कि क्वाड का दायरा अब केवल समुद्री सुरक्षा और सामरिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है। महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर,दूरसंचार,डिजिटल नेटवर्क और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी यह संगठन अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है।
बदलते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक माहौल में आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण,आधुनिक तकनीक तक पहुँच और समुद्री मार्गों की सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इन चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयास करना चाहते हैं।
भारत के लिए यह साझेदारी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण, तकनीकी निवेश, समुद्री निगरानी, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वहीं, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों को भी इन पहलों से लाभ मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर,क्वाड देशों की यह बैठक इस बात का संकेत है कि चारों देश भविष्य की आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी साझेदारी को व्यापक स्वरूप देना चाहते हैं। अब इस बात पर नजर रहेगी कि बैठक में घोषित पहलों को किस गति से जमीन पर उतारा जाता है और इनका क्षेत्रीय व्यापार, सुरक्षा तथा आर्थिक विकास पर कितना प्रभाव पड़ता है।
