अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- चीन और रूस से बेहतर जासूसी करता है अमेरिका, ईरान को लेकर भी दी चेतावनी

वाशिंगटन,2 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने चुनाव प्रचार अभियान की आखिरी रैलियों को संबोधित करते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। आयोवा और कंसास में आयोजित चुनावी सभाओं के दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया, तेल की बढ़ती कीमतों पर सफाई दी और चीन तथा रूस की जासूसी गतिविधियों को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि चीन और रूस अमेरिका की जासूसी करते हैं,लेकिन अमेरिका भी उनकी गतिविधियों पर नजर रखता है और इस काम में दोनों देशों से कहीं ज्यादा बेहतर है।

ट्रंप ने आयोवा के डुबुक शहर में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए चीन और रूस की जासूसी को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी शक्तियाँ एक-दूसरे की गतिविधियों पर नजर रखती हैं और इसमें कुछ असामान्य नहीं है। ट्रंप के मुताबिक,जब उन्हें बताया गया कि चीन अमेरिका की जासूसी कर रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है। इसलिए इस बात को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चीन और रूस दोनों अमेरिका की खुफिया गतिविधियों पर नजर रखते हैं,लेकिन अमेरिका भी उनके साथ ऐसा ही करता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका इस काम में चीन और रूस से कहीं अधिक कुशल है। उनके इस बयान को वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्रमुख शक्तियों के बीच खुफिया गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर भी विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब न तो प्रभावी रडार प्रणाली बची है, न ही विमान-रोधी हथियार और न ही ऐसा नेतृत्व मौजूद है,जिसके साथ अमेरिका बातचीत कर सके।

ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका ने इस संघर्ष की शुरुआत नहीं की थी,लेकिन अब वह इसे समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ईरान को भारी नुकसान पहुँचा रही है। उनके अनुसार,ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए अमेरिका ने लगातार कार्रवाई की है।

ईरानी नेतृत्व को लेकर भी ट्रंप ने विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में शीर्ष नेतृत्व के कई लोगों के मारे जाने के बाद अब बातचीत के लिए उपयुक्त व्यक्ति तलाशना मुश्किल हो गया है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान में किसी ऐसे व्यक्ति को खोजने की कोशिश कर रहे हैं,जिससे बातचीत की जा सके,लेकिन वहाँ कोई भी राष्ट्रपति बनने की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है।

उनकी इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ किसी संभावित समझौते या बातचीत का रास्ता तलाश रहा है,लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसे नेतृत्व स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि,ट्रंप ने अपने भाषण में इस बात का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया कि ईरान के साथ बातचीत के लिए अमेरिकी प्रशासन की ओर से क्या ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

डुबुक में दो घंटे से अधिक समय तक भाषण देने के बाद ट्रंप अपने मध्यावधि चुनाव प्रचार अभियान की आखिरी रैली के लिए कंसास के सलीना शहर रवाना हुए। यहाँ उन्होंने एक बार फिर अमेरिकी अर्थव्यवस्था,महँगाई और ईंधन की कीमतों को चुनावी मुद्दा बनाया। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में अमेरिका की महँगाई दर घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसके लिए अपनी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पिछली सरकार से महंगाई और ऊंची कीमतों की समस्या विरासत में मिली थी। उनके मुताबिक,मौजूदा सरकार ने इन कीमतों को बढ़ाने का काम नहीं किया,बल्कि उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनकी सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

तेल और पेट्रोल की कीमतों पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ईंधन की कीमतें बाइडेन और बराक ओबामा के कार्यकाल की तुलना में काफी कम हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में आई तेजी को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

ट्रंप ने कहा कि ईंधन की ऊंची कीमतें देश और दुनिया की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही ईरान के साथ जारी संघर्ष समाप्त होगा,तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी। उनके इस बयान का उद्देश्य बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर जनता की नाराजगी कम करना और अपनी सैन्य नीति को सही ठहराना माना जा रहा है।

ट्रंप ने अपने चुनावी भाषण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है। ट्रंप के अनुसार,अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती,तो ईरान की परमाणु क्षमता दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी।

उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष का उद्देश्य केवल अमेरिका के हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि जब तक ईरान से जुड़ा खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता,तब तक अमेरिका अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर सतर्क रहेगा।

अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण का फैसला होना है। इन दोनों सदनों में बहुमत का समीकरण राष्ट्रपति ट्रंप के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

मध्यावधि चुनाव में आमतौर पर राष्ट्रपति की लोकप्रियता, सरकार के कामकाज, अर्थव्यवस्था,महँगाई और विदेश नीति जैसे मुद्दों का प्रभाव देखने को मिलता है। इस बार भी ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में इन्हीं विषयों को प्रमुखता दी। उन्होंने चीन और रूस के साथ प्रतिस्पर्धा,ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई,परमाणु खतरे और तेल की कीमतों को अपने संबोधन का हिस्सा बनाया।

ट्रंप की आखिरी चुनावी रैलियों से स्पष्ट है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को अपनी सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश करना चाहते हैं। वहीं,महँगाई और ईंधन की कीमतों पर सफाई देकर उन्होंने घरेलू आर्थिक मुद्दों पर भी मतदाताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की। अब मंगलवार को होने वाला मतदान तय करेगा कि अमेरिकी मतदाता ट्रंप की नीतियों और उनके नेतृत्व पर कितना भरोसा जताते हैं।