किरेन रिजिजू

इंडिया गठबंधन की रैली में एआई से बनी तस्वीर इस्तेमाल करने का आरोप,किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर कसा तंज

नई दिल्ली,2 नवंबर (युआईटीवी)- दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित इंडिया गठबंधन की मेगा रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर रैली में भारी भीड़ दिखाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से तैयार की गई तस्वीर का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी को कम से कम एआई से बनाई गई तस्वीर को ठीक से तैयार करना चाहिए था। रिजिजू की यह टिप्पणी रैली के एक दिन बाद सोमवार को सामने आई। इस रैली में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। वहीं,भारतीय जनता पार्टी ने इसे फ्लॉप शो बताते हुए दावा किया कि मैदान का बड़ा हिस्सा खाली था। दूसरी ओर कांग्रेस ने ड्रोन से बनाए गए वीडियो और तस्वीरें साझा कर रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि रामलीला मैदान में भारी भीड़ दिखाने के लिए कांग्रेस पार्टी को कम-से-कम एआई से बनाई गई तस्वीर तो ठीक से तैयार करनी चाहिए थी। अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने कांग्रेस सांसद वामसी गड्डम और पार्टी के अन्य नेताओं की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर भी लगाई। इस तस्वीर के जरिए रैली में उमड़ी भीड़ को दिखाने की कोशिश की गई थी। हालाँकि,रिजिजू ने दावा किया कि तस्वीर एआई की मदद से बनाई गई है और कांग्रेस इसे तैयार करने में भी सही तरीके से कामयाब नहीं रही।

रिजिजू के इस बयान के बाद रैली में भीड़ की वास्तविक संख्या और सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। भाजपा लगातार कांग्रेस के भीड़ जुटाने के दावों पर सवाल उठा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोग पहुँचे थे और पार्टी ने अपने दावे के समर्थन में रैली स्थल के ड्रोन फुटेज भी साझा किए हैं। इस तरह रैली के राजनीतिक संदेश के साथ-साथ उसमें शामिल लोगों की संख्या भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गई है।

दरअसल,रविवार को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की ओर से एक बड़ी रैली आयोजित की गई थी। इस रैली का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप थे। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे,सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कई बड़े नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी रैली में हिस्सा लिया। विपक्षी दलों के कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इसे गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया।

रैली से पहले कांग्रेस ने दावा किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में करीब 10 लाख लोग शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य इस आयोजन के जरिए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को प्रमुखता से उठाना और विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन करना था। हालाँकि,रैली के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज करते हुए मैदान में कम भीड़ होने का आरोप लगाया।

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने रविवार शाम कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने रैली में 10 लाख लोगों के जुटने की बात कही थी,लेकिन रामलीला मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खाली था। भाजपा नेताओं ने अपने दावे के समर्थन में रैली स्थल की खाली कुर्सियों की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने जिस स्तर की भीड़ जुटने का दावा किया था,वास्तविक स्थिति उससे अलग थी।

संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली में भीड़ को बड़ा दिखाने के लिए ट्रिक फोटोग्राफी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की तरकीबों से कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता। भाजपा नेताओं के इन बयानों के बाद कांग्रेस ने भी जवाब देने में देर नहीं की। पार्टी की ओर से रैली स्थल के ड्रोन फुटेज और तस्वीरें साझा की गईं। कांग्रेस ने इन दृश्यों के आधार पर दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लाखों लोग शामिल हुए थे। पार्टी का कहना था कि रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी रही।

इस पूरे विवाद के बीच राहुल गांधी ने रामलीला मैदान से चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार की ओर से वोटों की चोरी के कारण वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध था। राहुल गांधी ने कहा कि वोटों की चोरी कोई सामान्य चोरी नहीं है,बल्कि यह भारत की हर आवाज की चोरी है। उन्होंने इसे देशद्रोह करार देते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उनके भाषण का मुख्य जोर मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर रहा।

विपक्षी गठबंधन की इस रैली का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपने विरोध को एक साझा मंच पर लाना था। इसमें शामिल नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों को सामने रखा। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाताओं की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया,जबकि भाजपा ने रैली की सफलता और भीड़ के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए।

अब इस आयोजन को लेकर राजनीतिक बहस दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित हो गई है। पहला, रैली में वास्तव में कितने लोग शामिल हुए और दूसरा,सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में एआई या अन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया गया या नहीं। किरेन रिजिजू के आरोपों ने इस विवाद को और हवा दे दी है। हालाँकि,तस्वीर को एआई से बनाए जाने के उनके दावे और रैली में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं।

कुल मिलाकर,रामलीला मैदान की रैली के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस जहाँ चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को लेकर विपक्षी एकजुटता दिखाने की बात कर रही है, वहीं भाजपा रैली में भीड़ के दावों और तस्वीरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों की ओर से और बयान सामने आ सकते हैं। फिलहाल,रैली का राजनीतिक एजेंडा पीछे छूटता नजर आ रहा है और चर्चा का बड़ा हिस्सा भीड़ की संख्या तथा एआई से तैयार तस्वीर के आरोप पर केंद्रित हो गया है।