डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Deva_Singhh)

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका,हार के बाद ट्रंप बोले- मैं उम्मीदवार होता तो बड़े अंतर से जीतते

वाशिंगटन,4 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के शुरुआती नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के पिछड़ने के बीच ट्रंप ने इसके लिए खुद के उम्मीदवार नहीं होने को एक वजह बताया। उन्होंने दावा किया कि अगर वह खुद चुनाव मैदान में होते तो पार्टी बड़े अंतर से जीत हासिल करती। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि चुनाव में वह उम्मीदवार नहीं थे। अगर वह उम्मीदवार होते तो उनकी पार्टी की जीत का अंतर काफी बड़ा होता। हालाँकि,चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप लगातार रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे थे और मतदाताओं से अपील कर रहे थे कि मतदान करते समय वे उम्मीदवारों को इस तरह देखें,जैसे चुनाव खुद ट्रंप लड़ रहे हों।

मिडटर्म चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। शुरुआती रुझानों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में रिपब्लिकन पार्टी को चुनौती देती दिखाई दे रही है। इन नतीजों को ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि मध्यावधि चुनाव के जरिए अमेरिकी मतदाता राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच कांग्रेस में अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में भी अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह चुनाव के नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के साथ काम करने को लेकर उत्साहित है और उम्मीद है कि दोनों पक्ष मिलकर कोई रास्ता निकाल लेंगे।

ट्रंप का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कई रैलियाँ और कार्यक्रम किए थे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की थी कि वे मतदान करते समय यह सोचें कि उम्मीदवार के रूप में ट्रंप ही चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में चुनाव के बाद उनका यह कहना कि वह खुद उम्मीदवार नहीं थे,राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

दरअसल,अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच आयोजित किए जाते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की कुछ सीटों के लिए मतदान होता है। इन चुनावों के परिणाम से यह तय होता है कि राष्ट्रपति की पार्टी को कांग्रेस में कितना समर्थन प्राप्त है। यदि विपक्षी दल को सदनों में बहुमत मिल जाता है तो राष्ट्रपति के लिए कानून पारित कराना और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

मंगलवार को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान संपन्न हुआ। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव कराया गया। शुरुआती चुनावी आँकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी 147 सीटों पर आगे चल रही थी,जबकि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार 88 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थे। इन शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त दिखाई दे रही थी।

प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 218 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में शुरुआती रुझानों के बाद दोनों दलों के बीच अंतिम नतीजों को लेकर निगाहें बनी हुई थीं। सभी सीटों पर मतदान होने के कारण प्रतिनिधि सभा में बहुमत का फैसला इन चुनावों के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रहा।

यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करती है,तो उसे राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर निगरानी रखने के लिए अधिक संसदीय अधिकार मिलेंगे। वहीं,रिपब्लिकन पार्टी के लिए सदन में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ताकि राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहयोग मिल सके।

सीनेट के चुनाव में भी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। अमेरिका की सीनेट में कुल 100 सीटें होती हैं,लेकिन इस मिडटर्म चुनाव में 35 सीटों पर मतदान कराया गया। सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी दल को 51 सीटों की आवश्यकता होती है।

चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें थीं,जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 सीटें थीं। इसके अलावा दो निर्दलीय सांसद भी थे,जो डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करते हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सीटों का अनुपात 53-47 था। शुरुआती चुनावी रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दी।

सीनेट में बहुमत का महत्व इसलिए भी अधिक है,क्योंकि यह सदन कई महत्वपूर्ण सरकारी नियुक्तियों और विधायी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

फ्लोरिडा में गवर्नर पद के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार बायरन डोनाल्ड्स ने जीत हासिल की। इसी राज्य के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने भी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया।

पिया दांडिया की जीत को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। चुनावी आँकड़ों के मुताबिक,उन्हें 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि केसी असकर को 48.1 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। लगभग 97.6 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद उनकी जीत की पुष्टि की गई थी।

दांडिया पहले स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान महँगाई और आम लोगों के आर्थिक हितों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उनकी जीत के बाद भारतीय मूल के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। इससे पहले भी अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी नेताओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और इस चुनाव में कई उम्मीदवार अलग-अलग राज्यों से मैदान में उतरे थे।

मिडटर्म चुनाव के शुरुआती नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त मिलने के शुरुआती संकेतों के बीच ट्रंप ने विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। यदि डेमोक्रेट्स किसी सदन में बहुमत हासिल करते हैं तो राष्ट्रपति को अपने विधायी प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए विपक्ष का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

ट्रंप ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ सहयोग करने की इच्छा जताई है। हालाँकि,उनकी यह टिप्पणी कि खुद उम्मीदवार होने पर रिपब्लिकन पार्टी बड़े अंतर से जीतती,उनके चुनावी आकलन को भी सामने रखती है।

फिलहाल शुरुआती रुझानों और सामने आए नतीजों के आधार पर अमेरिकी राजनीति में दोनों दलों के बीच मुकाबला जारी है। अंतिम परिणामों से ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट में किस पार्टी को बहुमत मिलता है। इसके साथ ही यह भी तय होगा कि मिडटर्म चुनाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस में अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह की राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।