वाशिंगटन.4 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के नतीजों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। फ्लोरिडा से लेकर वर्जीनिया और मैरीलैंड तक भारतीय-अमेरिकी नेताओं को बड़ी चुनावी सफलता मिली है। भारतीय मूल की पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को शिकस्त दी। इस जीत की पुष्टि चुनावी नतीजों पर नजर रखने वाले डिसीजन डेस्क एचक्यू और सीबीएस न्यूज ने की है। दूसरी ओर, ओहियो के गवर्नर पद के चुनाव में भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी अपनी प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से पीछे चल रहे हैं। वहीं, नॉर्थ कैरोलिना में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट की एक अहम सीट पर जीत हासिल कर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अमेरिकी चुनाव के इन नतीजों को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रभाव में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है। कई राज्यों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी पेश की थी। इनमें से कुछ ने जीत दर्ज की,जबकि कई अन्य सीटों पर मतगणना जारी रहने के कारण तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई थी। प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत को लेकर भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से पिया दांडिया की जीत इस चुनाव की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रही। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह बनाई। डिसीजन डेस्क एचक्यू ने स्थानीय समयानुसार रात 8 बजकर 5 मिनट पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर उनकी जीत की जानकारी साझा की। इसके बाद सीबीएस न्यूज ने भी पुष्टि की कि दांडिया ने फ्लोरिडा की 22वीं कांग्रेसनल सीट पर जीत हासिल कर ली है।
एनबीसी न्यूज के शुरुआती चुनावी आँकड़ों के अनुसार, दांडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले,जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर के खाते में 48.1 प्रतिशत मत आए। उस समय तक लगभग 97.6 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी और कुल 2 लाख 92 हजार से अधिक वोटों की गणना की जा चुकी थी। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा,लेकिन अंतिम चरण में दांडिया ने बढ़त कायम रखते हुए जीत दर्ज की।
पिया दांडिया पहले स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के नवगठित कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़कर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। इस सीट पर मुकाबले को शुरुआत से ही महत्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि इसे उन चुनिंदा सीटों में गिना जा रहा था,जहाँ का परिणाम प्रतिनिधि सभा में बहुमत की तस्वीर बदल सकता था। ऐसे में दांडिया की जीत ने डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता हासिल की।
डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमिटी ने उनकी जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि पिया ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान दक्षिण फ्लोरिडा के लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने महँगाई से राहत दिलाने और आम नागरिकों को अमेरिकी सपने को पूरा करने का अवसर उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर जोर दिया था। पार्टी के मुताबिक,दांडिया ने स्थानीय मतदाताओं के सामने ऐसे मुद्दे रखे,जिनका सीधा संबंध उनके रोजमर्रा के जीवन से था।
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी पिया दांडिया को उनकी जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में तीसरी दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं। उनकी इस सफलता को अमेरिकी राजनीति में दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेताओं के लिए चुनावी नतीजों में एक और अच्छी खबर वर्जीनिया से आई। यहाँ सुहास सुब्रमण्यम ने 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से फिर जीत हासिल की। एनबीसी न्यूज के चुनावी अनुमान के मुताबिक, सुब्रमण्यम को 61.4 प्रतिशत वोट मिले,जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को 36.5 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस सीट पर लगभग 88.7 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी। निर्दलीय उम्मीदवार अहसेन मलिक भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे थे।
इस जीत के साथ सुहास सुब्रमण्यम को प्रतिनिधि सभा में दूसरा दो वर्षीय कार्यकाल मिल गया। उन्होंने वर्ष 2024 में वर्जीनिया से कांग्रेस के पहले भारतीय-अमेरिकी सदस्य बनकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की थी। वह पहली बार 2025 में अमेरिकी कांग्रेस पहुँचे थे। दोबारा जीत मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मतदाताओं का आभार जताया। सुब्रमण्यम ने कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है,लेकिन असली काम अब शुरू हुआ है। उन्होंने वाशिंगटन में बदलाव लाने के लिए अपने समुदाय के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जाहिर की।
पड़ोसी राज्य मैरीलैंड में भी भारतीय मूल की नेता अरुणा मिलर ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखी। वह डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर वेस मूर के साथ उपराज्यपाल पद के लिए चुनाव मैदान में थीं। एनबीसी न्यूज के अनुसार,वेस मूर ने दोबारा गवर्नर पद का चुनाव जीत लिया है। उनके साथ चुनाव लड़ रहीं अरुणा मिलर ने भी रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रॉप को हराकर अपना कार्यकाल सुरक्षित कर लिया।
रॉब क्रॉप पूर्व राज्य प्रतिनिधि डैन कॉक्स के चुनावी साथी थे। अरुणा मिलर की दोबारा जीत से मैरीलैंड की सरकार में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा। उनकी सफलता को भी भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है। इन नतीजों ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका में भारतीय मूल के उम्मीदवार अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं हैं,बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी के लिए ओहियो का चुनाव फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। वह राज्य के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन शुरुआती मतगणना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने उन पर बढ़त बना रखी है। एनबीसी न्यूज के अनुसार,लगभग 46 प्रतिशत अनुमानित वोटों की गिनती पूरी होने तक एमी एक्टन को 54.3 प्रतिशत वोट मिले थे,जबकि रामास्वामी को 42.8 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे।
इस चरण तक करीब 22 लाख वोटों की गिनती हो चुकी थी। हालाँकि,नेटवर्क ने स्पष्ट किया कि अभी चुनाव के अंतिम परिणाम को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। रामास्वामी को एमी एक्टन से आगे निकलने के लिए शेष मतों में लगभग 53.5 प्रतिशत वोट हासिल करने की जरूरत बताई गई थी। शुरुआती दौर में उनकी स्थिति और भी कमजोर दिखाई दे रही थी। जब लगभग एक चौथाई वोटों की गिनती हुई थी,तब एक्टन 63 प्रतिशत मतों के साथ आगे थीं,जबकि रामास्वामी को केवल 34 प्रतिशत वोट मिले थे।
विवेक रामास्वामी जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के उद्यमी हैं और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी भी पेश कर चुके हैं। उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ओहियो के मौजूदा गवर्नर माइक डीवाइन का समर्थन प्राप्त है। रामास्वामी इस चुनाव के जरिए माइक डीवाइन की जगह लेना चाहते हैं,जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
दूसरी ओर,डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ओहियो की पूर्व स्वास्थ्य निदेशक रह चुकी हैं और पेशे से चिकित्सक हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के स्वास्थ्य,अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। रामास्वामी और एक्टन के बीच मुकाबले को राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ध्यान मिला है। इसकी वजह यह है कि रामास्वामी को रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख नेताओं का समर्थन प्राप्त है,जबकि एक्टन डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक मजबूत चुनौती पेश कर रही हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए नॉर्थ कैरोलिना से भी बड़ी खबर आई। एनबीसी न्यूज के अनुमान के अनुसार,पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने राज्य की सीनेट सीट पर जीत हासिल कर ली। यह सीट रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुई थी। कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हैटली को हराकर डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट चुनाव में पहली बड़ी सफलता दिलाई।
लगभग 72 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक रॉय कूपर को 61 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी माइकल व्हैटली को 37 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस नतीजे से डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में उत्साह बढ़ गया। कूपर ने जीत के बाद सोशल मीडिया पर नॉर्थ कैरोलिना के मतदाताओं का धन्यवाद किया और कहा कि वह उनके भरोसे के लिए आभारी हैं।
जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ के भी दोबारा चुनाव जीतने का अनुमान लगाया गया। उन्होंने रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य माइक कॉलिन्स को हराया। लगभग 71 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक ओसॉफ को 60.2 प्रतिशत मत मिले थे,जबकि कॉलिन्स को 39.8 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। इस बढ़त ने ओसॉफ की जीत की संभावनाओं को काफी मजबूत कर दिया।
न्यू हैम्पशायर में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस पैपास ने सीनेट चुनाव में जीत दर्ज की। वहीं, फ्लोरिडा में रिपब्लिकन उम्मीदवार एशले मूडी ने मार्को रूबियो की पूर्व सीट के लिए हुए विशेष चुनाव में सफलता हासिल की। इससे पहले वर्जीनिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने भी एक और कार्यकाल के लिए अपनी जीत सुनिश्चित कर ली थी। उन्होंने मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि अमेरिकी सीनेटर के रूप में सेवा जारी रखने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है।
मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवार भी अलग-अलग राज्यों से अपनी किस्मत आजमा रहे थे। हालाँकि,सभी सीटों के परिणाम सामने नहीं आए थे। नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश मैक्स गनोर्कर को डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि वैलेरी फौशी से हार का सामना करना पड़ा। लगभग 78 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक फौशी को 82.9 प्रतिशत वोट मिले थे,जबकि गनोर्कर को 15.6 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे।
मैसाचुसेट्स में डेमोक्रेटिक सीनेटर एड मार्की के फिर से चुनाव जीतने का अनुमान लगाया गया। इससे भारतीय-अमेरिकी निर्दलीय उम्मीदवार शिवा अय्यादुरई की हार लगभग तय मानी जा रही थी। इस सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन डीटन भी चुनाव मैदान में थे। मार्की की मजबूत स्थिति ने उनके विरोधियों की उम्मीदों को कमजोर कर दिया।
जॉर्जिया के राज्य विधायी चुनावों में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट ज्योत सिंह भी मजबूत स्थिति में दिखाई दिए। ग्विनेट काउंटी के अनौपचारिक नतीजों के अनुसार,हाउस डिस्ट्रिक्ट 97 में उन्हें 10,491 वोट मिले थे,जो कुल मतों का 70.6 प्रतिशत था। उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी यासीन मोघाजी को 4,375 वोट यानी 29.4 प्रतिशत मत मिले थे। हालाँकि,उस समय तक आधिकारिक रूप से विजेता की घोषणा नहीं की गई थी।
टेक्सास में हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 की खाली सीट के लिए भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पूजा सेठी का मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार जेनिफर मुशटालर से था। राज्य के चुनाव परिणामों से संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक इस सीट के लिए कोई वोट दर्ज नहीं दिखाया गया था। ऐसे में इस मुकाबले का परिणाम सामने आने का इंतजार किया जा रहा था।
न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रही थीं। मतदान रात 9 बजे समाप्त हुआ था, लेकिन एनबीसी न्यूज के अनुसार उस समय तक वोटों की गिनती शुरू नहीं हुई थी। एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में भी भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट अमीश शाह और रिपब्लिकन उम्मीदवार जे फीली के बीच मुकाबला था।
कैलिफोर्निया में भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना और अमी बेरा फिर से चुनाव लड़ रहे थे। इसके अलावा नित्या रमन लॉस एंजिल्स के मेयर पद के चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रही थीं। वाशिंगटन में प्रमिला जयपाल भी चुनावी मुकाबले का हिस्सा थीं। इन राज्यों में मतदान देर रात तक जारी रहने के कारण शुरुआती नतीजों के बाद भी कई अहम सीटों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक महत्व सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने से जुड़ा हुआ है। चुनाव से पहले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सीटें थीं। ऐसे में डेमोक्रेट्स के सामने रिपब्लिकन बहुमत को चुनौती देने का बड़ा लक्ष्य था।
स्थानीय समयानुसार रात करीब 9 बजे तक एनबीसी न्यूज के आँकड़ों में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 34 सीटें दिखाई दे रही थीं। इन आँकड़ों में वे सीटें भी शामिल थीं,जिनके लिए उस समय चुनाव नहीं हो रहा था। शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेट्स को एक सीट की बढ़त दिखाई दे रही थी। नॉर्थ कैरोलिना में रॉय कूपर की जीत और जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ की मजबूत स्थिति ने डेमोक्रेटिक खेमे की उम्मीदें बढ़ा दी थीं।
प्रतिनिधि सभा में भी दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। सदन में बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 218 सीटों की जरूरत होती है। डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत तक पहुँचने के लिए तीन अतिरिक्त सीटों की आवश्यकता बताई गई थी। रात करीब 9 बजे तक एनबीसी न्यूज के अनुमानों में डेमोक्रेट्स को 74 और रिपब्लिकन को 32 सीटें मिलती दिखाई दे रही थीं। शुरुआती आँकड़ों में डेमोक्रेट्स को एक सीट की बढ़त हासिल थी।
वर्जीनिया के पहले और दूसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट समेत कई महत्वपूर्ण स्विंग सीटों पर मतगणना जारी थी। इन सीटों का परिणाम प्रतिनिधि सभा में दोनों दलों की अंतिम स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था। ऐसे में किसी भी पार्टी के लिए बहुमत को लेकर जल्दबाजी में दावा करना मुश्किल था।
गवर्नर पद के चुनावों में भी कई महत्वपूर्ण नतीजे सामने आए। पेन्सिल्वेनिया के डेमोक्रेटिक गवर्नर जोश शापिरो और इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रित्जकर के दोबारा चुनाव जीतने का अनुमान लगाया गया। इन दोनों नेताओं की जीत से डेमोक्रेटिक पार्टी को राज्य स्तर पर भी मजबूती मिली।
वहीं,ओहियो में विवेक रामास्वामी और एमी एक्टन के बीच मुकाबले पर पूरे देश की नजर बनी हुई थी। रामास्वामी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिलने के बावजूद शुरुआती आँकड़ों में वह पीछे चल रहे थे। इस चुनाव को रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था,क्योंकि इसमें पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रभाव और राज्य में उसकी लोकप्रियता की परीक्षा हो रही थी।
चुनाव के शुरुआती नतीजों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस की ओर से रात 9 बजे तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालाँकि,विभिन्न राज्यों से आ रहे परिणामों ने अमेरिकी राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत देने शुरू कर दिए थे।
कुल मिलाकर,अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भारतीय मूल के नेताओं के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हुए। पिया दांडिया की फ्लोरिडा में जीत,सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर की सफलता तथा अन्य राज्यों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का मजबूत प्रदर्शन इस समुदाय की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है। दूसरी ओर,विवेक रामास्वामी का ओहियो में पिछड़ना रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होने के साथ यह भी तय होना था कि आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति की दिशा किस ओर जाएगी।
