नई दिल्ली,4 नवंबर (युआईटीवी)- ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में दुनिया भर में लोकप्रिय प्लेटफॉर्म कैनवा ने अपने संगठनात्मक ढाँचे में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी दीर्घकालिक विकास और बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए दुनियाभर में लगभग 1,271 कर्मचारियों को प्रभावित करने वाली पुनर्गठन योजना लागू करने जा रही है। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 22 प्रतिशत है। इस फैसले के तहत कुछ कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव होगा, कुछ को दूसरे कार्यालयों और केंद्रीकृत केंद्रों में भेजा जाएगा,जबकि बड़ी संख्या में पद समाप्त किए जाएँगे। कंपनी के इस कदम से तकनीकी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के बीच एक बार फिर छंटनी और रोजगार की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कैनवा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक मेलानी पर्किन्स ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में इस फैसले को कंपनी के 13 साल के इतिहास का सबसे कठिन निर्णय बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि इतने बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव करना आसान नहीं है और इसके पीछे कई महीनों तक गंभीर विचार-विमर्श किया गया है। कंपनी ने अपनी मौजूदा कार्यप्रणाली,कर्मचारियों की भूमिका,प्रबंधन व्यवस्था और भविष्य में जरूरी कौशलों का आकलन करने के बाद यह कदम उठाया है। पर्किन्स के मुताबिक, बदलते कारोबारी और तकनीकी माहौल में कंपनी को अपने काम करने के तरीके में व्यापक सुधार करना जरूरी हो गया है।
कंपनी की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार,कैनवा की विकास दर में एक दशक में पहली बार सुस्ती देखने को मिली है। अब तक लगातार विस्तार कर रही कंपनी के लिए यह बदलाव एक महत्वपूर्ण संकेत है। इसके साथ ही तकनीकी दुनिया में तेजी से हो रहे परिवर्तन ने ग्राफिक डिजाइनिंग और डिजिटल क्रिएशन के क्षेत्र की जरूरतों को भी बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से ग्राहकों की अपेक्षाएँ पहले से अलग हो रही हैं और कंपनियों को अपने उत्पादों तथा सेवाओं में लगातार नए बदलाव करने पड़ रहे हैं।
मेलानी पर्किन्स का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल छोटे-मोटे सुधार करके आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनी को अधिक चुस्त और प्रभावी संगठन के रूप में विकसित करना होगा,जहाँ छोटी लेकिन सक्षम टीमें तेजी से फैसले ले सकें और उत्पादों के विकास पर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इसी सोच के तहत कैनवा ने अपनी मौजूदा संरचना को सरल बनाने और कामकाज में अनावश्यक जटिलता कम करने की योजना बनाई है।
पुनर्गठन के तहत कैनवा अपने उत्पाद,विकास और प्लेटफॉर्म से जुड़े कार्यों को एकीकृत करने जा रही है। इन सभी गतिविधियों को एक ही उत्पाद संगठन के अंतर्गत लाया जाएगा, जिससे अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से कामकाज की गति बढ़ेगी और उत्पादों को विकसित करने तथा बाजार में उतारने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
इसके अलावा, संगठन में विशेषीकृत भूमिकाओं की संख्या और प्रबंधन की कई परतों को कम करने की योजना है। कंपनी चाहती है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल हो और कर्मचारियों को अलग-अलग स्तरों से मंजूरी लेने में कम समय लगे। कुछ टीमों का आपस में विलय किया जाएगा,जबकि अन्य टीमों को पहले की तुलना में अधिक व्यापक जिम्मेदारियां सौंपी जाएँगी। इस बदलाव का उद्देश्य सीमित संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ कंपनी की कार्यक्षमता बढ़ाना है।
हालाँकि,इस प्रक्रिया में सभी कर्मचारियों की भूमिका पहले जैसी नहीं रहेगी। कुछ लोगों को नई जिम्मेदारियाँ मिलेंगी और कुछ को दूसरे कार्यस्थलों पर स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं,जिन पदों की आवश्यकता कंपनी के नए ढाँचे में नहीं होगी,उन्हें समाप्त कर दिया जाएगा। इस तरह पुनर्गठन का असर कंपनी के अलग-अलग विभागों और देशों में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।
कैनवा की नई कार्ययोजना में सिडनी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होने जा रही है। कंपनी इस शहर को भविष्य में अधिक उत्पाद टीमों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करेगी। इसका मतलब है कि आने वाले समय में उत्पादों की योजना बनाने और उनके विकास से जुड़ी अधिक गतिविधियां सिडनी में केंद्रित हो सकती हैं।
कंपनी ने कर्मचारियों की कार्यस्थल व्यवस्था में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है। अधिकांश हाइब्रिड कर्मचारियों को जनवरी से सप्ताह में दो से तीन दिन कार्यालय आकर काम करना होगा। कंपनी का मानना है कि कार्यालय में आमने-सामने बैठकर काम करने से सहयोग,विचारों के आदान-प्रदान और टीमों के बीच तालमेल को बेहतर बनाया जा सकता है। हालाँकि,इस बदलाव के कारण कर्मचारियों की मौजूदा कार्यशैली और निजी दिनचर्या पर भी असर पड़ सकता है।
बड़े स्तर पर कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले इस फैसले के बीच कैनवा ने नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए सहायता पैकेज की भी घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों को कम से कम छह महीने के वेतन के बराबर आर्थिक सहायता दी जाएगी। जहाँ लागू होगा,वहाँ स्वास्थ्य बीमा कवरेज भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त,कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने और अपने करियर को आगे बढ़ाने में मदद देने के लिए करियर ट्रांजिशन सहायता प्रदान की जाएगी। कर्मचारी सहायता सेवाओं को भी विस्तारित किया जाएगा,ताकि नौकरी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों को जरूरी सहयोग मिल सके। पात्र कर्मचारियों के लिए कंपनी के नए कैनवा कलेक्टिव फंड के तहत 10,000 डॉलर तक का अनुदान प्राप्त करने का अवसर भी रखा गया है। इस पैकेज के जरिए कंपनी प्रभावित कर्मचारियों को आर्थिक और पेशेवर स्तर पर संक्रमण के दौर से निकलने में मदद करना चाहती है।
कैनवा का यह फैसला ऐसे समय आया है,जब वैश्विक तकनीकी उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। कई कंपनियाँ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने, कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और नई तकनीक के अनुरूप व्यावसायिक मॉडल तैयार करने के लिए संगठनात्मक बदलाव कर रही हैं। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की भूमिकाएँ बदल रही हैं और कई कंपनियां पुराने विभागों तथा पदों की उपयोगिता का दोबारा आकलन कर रही हैं।
कैनवा भी इसी चुनौती के बीच अपनी भविष्य की रणनीति तैयार कर रही है। कंपनी का लक्ष्य केवल मौजूदा खर्चों को कम करना नहीं,बल्कि ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है जो तेजी से बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुसार काम कर सके। मेलानी पर्किन्स ने कहा है कि इन बदलावों का मकसद कंपनी को आने वाले दशक में भी प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि कंपनी से अलग होने वाले कर्मचारियों के लिए यह फैसला बेहद कठिन और प्रभावशाली होगा।
कैनवा की पुनर्गठन योजना से यह स्पष्ट है कि तकनीकी क्षेत्र में स्थापित कंपनियाँ भी बदलते बाजार के दबाव से अछूती नहीं हैं। अब उनके सामने विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ-साथ एआई जैसी नई तकनीकों को अपनाने और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारियों की संख्या और संगठनात्मक ढाँचे में कटौती के बाद कैनवा अपने उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और बाजार में प्रतिस्पर्धा को किस तरह मजबूत करती है।
