अब्दुल अल-सैयद (तस्वीर क्रेडिट@ChAabidHussain)

अमेरिकी सीनेट में पहली बार पहुँचेगा मुस्लिम नेता,अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन में माइक रोजर्स को हराकर रचा इतिहास

वाशिंगटन,4 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से एक ऐतिहासिक नतीजा सामने आया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन प्रत्याशी माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीत लिया है। इस जीत के साथ ही वह अमेरिका के इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं। उनकी सफलता को अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई रिपब्लिकन नेताओं ने अल-सैयद के खिलाफ तीखे बयान दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने जीत हासिल कर राजनीतिक विरोधियों को जवाब दिया है।

अमेरिकी सीनेट में अब तक किसी मुस्लिम नेता को निर्वाचित होकर पहुँचने का अवसर नहीं मिला था। हालाँकि,अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मुस्लिम समुदाय के सदस्य पहले से मौजूद रहे हैं,लेकिन सीनेट में यह पहला मौका है जब किसी मुस्लिम उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। मिशिगन के मतदाताओं ने अब्दुल अल-सैयद को समर्थन देकर अमेरिकी राजनीति में एक नया इतिहास बना दिया है। फॉक्स न्यूज डिसीजन डेस्क के अनुमान के मुताबिक,अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाबला अपने नाम किया।

चुनाव प्रचार के दौरान अल-सैयद को कई तरह के राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन पर निशाना साधा था। ट्रंप ने उन्हें जिहादी और हमास समर्थक बताते हुए मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े होने के आरोप भी लगाए थे। इन बयानों के जरिए रिपब्लिकन खेमे ने मतदाताओं के बीच अल-सैयद की छवि को लेकर सवाल खड़े करने की कोशिश की। हालाँकि,अल-सैयद ने इन आरोपों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि उनका मुस्लिम ब्रदरहुड से कोई संबंध नहीं है। चुनाव के दौरान उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बने रहे।

अब्दुल अल-सैयद की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं है। वह पेशे से डॉक्टर हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम कर चुके हैं। उनका परिवार मूल रूप से मिस्र से जुड़ा है। उन्होंने दक्षिण-पूर्वी मिशिगन के डेट्रॉइट और वेन काउंटी में स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक कामकाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने का अनुभव मिला। इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में मदद की।

अल-सैयद इससे पहले भी चुनावी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी में हिस्सा लिया था। उस चुनाव में उनका मुकाबला ग्रेचेन व्हिटमर से हुआ था,लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बाद भी उन्होंने राजनीति में सक्रियता बनाए रखी और इस बार सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अपनी दावेदारी पेश की। आखिरकार मिशिगन के मतदाताओं ने उन्हें जीत दिलाकर अमेरिकी संसद के उच्च सदन तक पहुँचने का रास्ता खोल दिया।

न्यूयॉर्क टाइम्स के आँकड़ों के मुताबिक,चुनाव में अब्दुल अल-सैयद को 51.7 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को 46.3 प्रतिशत मत हासिल हुए। इन नतीजों ने दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की तस्वीर साफ कर दी। अल-सैयद की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है,क्योंकि मिशिगन अमेरिकी राजनीति में एक अहम राज्य है और यहां के चुनावी नतीजों पर पूरे देश की नजर रहती है।

रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन हासिल था। ऐसे में अल-सैयद की जीत को ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर भी देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक पहचान और कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर हुई बयानबाजी ने मुकाबले को और चर्चा में ला दिया था। अल-सैयद ने इन हमलों के बावजूद अपना चुनाव अभियान जारी रखा और मतदाताओं के बीच अपनी नीतियों तथा प्राथमिकताओं को सामने रखा।

अल-सैयद की जीत का महत्व केवल एक सीट हासिल करने तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सीनेट देश की विधायी प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाती है। यहाँ चुने जाने वाले प्रतिनिधि कानून बनाने,सरकारी नीतियों पर चर्चा करने और महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर निर्णय लेने में भाग लेते हैं। ऐसे में पहली बार किसी मुस्लिम नेता का इस सदन में पहुँचना अमेरिकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक ऐतिहासिक घटना है।

अब्दुल अल-सैयद की राजनीतिक यात्रा भी इस जीत को खास बनाती है। आठ साल पहले गवर्नर पद की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हार का सामना करने वाले नेता ने अब राज्य के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक जीतकर अपनी पहचान स्थापित की है। डॉक्टर से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी और फिर सीनेट सदस्य बनने तक का उनका सफर अमेरिकी राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

मिशिगन के इस चुनावी नतीजे के बाद अब्दुल अल-सैयद का नाम अमेरिकी इतिहास में दर्ज हो गया है। उनकी जीत ने यह भी दिखाया है कि चुनावी मुकाबले में राजनीतिक हमलों और विवादों के बीच मतदाता अपने फैसले से नया इतिहास बना सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सीनेट में पहुँचने के बाद अल-सैयद किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और अमेरिकी राजनीति में उनकी भूमिका किस तरह आगे बढ़ती है।