तन्वी पत्री (तस्वीर क्रेडिट@badmintondesk)

तन्वी पत्री ने रचा इतिहास,यूथ ओलंपिक के बैडमिंटन सेमीफाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

डकार (सेनेगल),5 नवंबर (युआईटीवी)- भारत की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पत्री ने डकार यूथ ओलंपिक गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिला एकल वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर इस प्रतियोगिता के अंतिम चार में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनने का गौरव हासिल किया। बुधवार को खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में तीसरी वरीयता प्राप्त तन्वी ने सातवीं वरीयता वाली थाईलैंड की खिलाड़ी काकानिक कुंगकाव को सीधे गेम में हराकर यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने मुकाबला 21-17 और 21-13 से अपने नाम किया। अब उनकी नजरें फाइनल में जगह बनाने और देश के लिए पदक पक्का करने पर टिकी हैं।

डकार में खेले गए इस क्वार्टर फाइनल मुकाबले में तन्वी ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया। पहले गेम में थाई खिलाड़ी ने उन्हें कड़ी चुनौती दी,लेकिन भारतीय शटलर ने अहम मौकों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए 21-17 से गेम जीत लिया। पहले गेम में मिली बढ़त के बाद तन्वी का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। दूसरे गेम में उन्होंने अपने खेल की गति बनाए रखी और प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। नतीजतन,उन्होंने दूसरा गेम 21-13 से जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया।

करीब 39 मिनट तक चले इस मुकाबले में तन्वी ने अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा। उनकी जीत के साथ ही भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। इससे पहले यूथ ओलंपिक में भारतीय पुरुष खिलाड़ी सेमीफाइनल और पदक मुकाबलों तक पहुँच चुके थे,लेकिन महिला एकल वर्ग में कोई भारतीय खिलाड़ी अंतिम चार में जगह नहीं बना पाई थी। तन्वी ने इस उपलब्धि के साथ न केवल अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया, बल्कि देश की युवा महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए भी नई उम्मीद जगाई है।

क्वार्टर फाइनल में जीत के बाद तन्वी अब सेमीफाइनल में उतरेंगी। इस मुकाबले में जीत हासिल करते ही उनका पदक पक्का हो जाएगा और वह स्वर्ण पदक के लिए फाइनल में पहुँच जाएँगी। हालाँकि,अगर उन्हें सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ता है,तब भी उनके पास कांस्य पदक जीतने का अवसर रहेगा। ऐसे में उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अगले मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराने की होगी।

सेमीफाइनल में तन्वी का सामना जापान की युजुनो वातानाबे से होगा। दोनों खिलाड़ी पहले भी एक-दूसरे के खिलाफ कोर्ट पर उतर चुकी हैं। साल 2024 में थाईलैंड में आयोजित पाथुम थानी जूनियर इंटरनेशनल सीरीज के दौरान दोनों के बीच मुकाबला हुआ था। उस मैच में जापानी खिलाड़ी ने तन्वी को 21-14 और 21-10 से हराया था। ऐसे में आगामी सेमीफाइनल भारतीय खिलाड़ी के लिए पुरानी हार का हिसाब बराबर करने का भी मौका होगा।

हालाँकि,पिछले मुकाबले का नतीजा तन्वी के लिए चुनौती जरूर पेश करता है,लेकिन यूथ ओलंपिक में उनका मौजूदा प्रदर्शन बताता है कि वह शानदार लय में हैं। क्वार्टर फाइनल में मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सीधे गेम में जीत हासिल करना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। अब उन्हें जापानी खिलाड़ी के खेल को समझते हुए रणनीति बनानी होगी। अगर वह दबाव के बीच संयम बनाए रखती हैं और अपनी ताकत के मुताबिक खेलती हैं, तो फाइनल में पहुँचने की उनकी उम्मीदें मजबूत हो सकती हैं।

यूथ ओलंपिक के बैडमिंटन इतिहास में इससे पहले तीन भारतीय पुरुष खिलाड़ी सेमीफाइनल तक पहुँच चुके हैं। साल 2010 में सिंगापुर में आयोजित पहले यूथ ओलंपिक गेम्स में एचएस प्रणॉय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता था। इसके बाद साल 2014 में आदित्य जोशी ने लड़कों के एकल वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाई, हालांकि वह पदक जीतने में सफल नहीं हो सके।

साल 2018 में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में आयोजित यूथ ओलंपिक में लक्ष्य सेन ने भी शानदार खेल दिखाया था। वह फाइनल तक पहुँचे,लेकिन खिताबी मुकाबले में जीत हासिल नहीं कर सके और उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। इन उपलब्धियों के बाद अब तन्वी पत्री ने महिला वर्ग में भारत की ओर से पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।

तन्वी के सामने अब इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों से आगे बढ़ने और भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए एक नई मिसाल कायम करने का अवसर है। यदि वह सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में पहुँचती हैं,तो यूथ ओलंपिक के बैडमिंटन इतिहास में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन जाएँगी। ऐसे में उनका अगला मुकाबला भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है।

डकार यूथ ओलंपिक गेम्स की बैडमिंटन प्रतियोगिता में पुरुष और महिला एकल वर्ग के मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। दोनों वर्गों में कुल 32-32 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता को दो चरणों में बाँटा गया है। पहले चरण में ग्रुप मुकाबले खेले गए,जबकि इसके बाद खिलाड़ियों को नॉकआउट दौर में जगह बनाने का मौका मिला।

ग्रुप चरण के लिए प्रत्येक वर्ग के खिलाड़ियों को चार-चार के आठ समूहों में बाँटा गया था। हर खिलाड़ी को अपने समूह के बाकी तीन खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला करना था। सभी समूहों में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ियों ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालीफाई किया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल,सेमीफाइनल और पदक मुकाबलों का आयोजन किया जा रहा है।

अब प्रतियोगिता अपने निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है। पाँच नवंबर को स्वर्ण,रजत और कांस्य पदकों का फैसला होगा। ऐसे में तन्वी के पास भारतीय खेल इतिहास में एक और उपलब्धि जोड़ने का मौका है। क्वार्टर फाइनल में शानदार जीत के बाद देश की निगाहें उनके सेमीफाइनल मुकाबले पर टिकी हैं। अगर वह जापान की खिलाड़ी को हराने में सफल रहती हैं,तो न केवल उनका पदक सुनिश्चित होगा,बल्कि भारत को यूथ ओलंपिक बैडमिंटन में पहली महिला पदक विजेता भी मिल जाएगी।