तमिलनाडु में प्रवासियों पर हमला: न्यूज पोर्टल के संपादक, मालिक पर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

तमिलनाडु में प्रवासियों पर हमला: न्यूज पोर्टल के संपादक, मालिक पर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (युआईटीवी/आईएएनएस)- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु में बिहार के प्रवासियों पर हमले के संबंध में फर्जी खबरें फैलाने के आरोप का सामना कर रहे एक न्यूज पोर्टल के संपादक और मालिक को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि चार सप्ताह तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

हालांकि, खंडपीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने तमिलनाडु में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि ऑपइंडिया पोर्टल के संपादक और मालिक राहत के लिए मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पोर्टल ने एक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित समाचार के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की लेकिन जब यह गलत पाया गया तो इसे वापस ले लिया गया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी से कहा कि अदालत अनुच्छेद 32 के तहत प्राथमिकी को कैसे रद्द कर सकती है? इसने जेठमलानी को मद्रास उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा।

जब जेठमलानी ने कहा कि कुछ मामलों में अनुच्छेद 32 के तहत एफआईआर को भी रद्द कर दिया गया है, पीठ ने जवाब दिया कि यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जेठमलानी ने तब अदालत से आग्रह किया कि जब तक याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय में अपील करते हैं उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की जाए।

प्राथमिकी तमिलनाडु में इस आरोप के संबंध में दर्ज की गई थी कि एक समाचार पोर्टल ने कथित तौर पर तमिलनाडु में बिहार के प्रवासी श्रमिकों पर हमले के बारे में फर्जी खबर चलाई थी।

जेठमलानी ने समाचार पोर्टल की नूपुर जे शर्मा और राहुल रौशन का प्रतिनिधित्व किया।

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