मुंबई,25 सितंबर (युआईटीवी)- हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता और हास्य कलाकार मुश्ताक खान का गुरुवार को 56 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और मुंबई के नानावती अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की पुष्टि फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने की। जानकारी के मुताबिक, मुश्ताक खान ने गुरुवार शाम करीब 7 बजे अंतिम सांस ली। बीमारी दोबारा उभरने के बाद पिछले करीब 15 दिनों से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था।
मुश्ताक खान के निधन की खबर सामने आते ही हिंदी फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह उन कलाकारों में शामिल थे,जिन्होंने मुख्य भूमिकाओं के बजाय सहायक और चरित्र भूमिकाओं के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। खास तौर पर उनकी कॉमिक टाइमिंग,संवाद बोलने के अंदाज और पर्दे पर सहज अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। कई फिल्मों में उनका किरदार भले ही सीमित समय के लिए रहा हो, लेकिन अपनी अदाकारी से वह दर्शकों के बीच लंबे समय तक याद रखे गए। उनके निधन की पुष्टि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के अध्यक्ष बीएन तिवारी समेत फिल्म उद्योग से जुड़े अन्य लोगों ने भी की।
मुश्ताक खान का फिल्मी सफर कई दशकों तक चला। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ हास्य भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्हें ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वेलकम’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी फिल्मों में देखा गया। इसके अलावा बाद के वर्षों में भी वह लगातार फिल्मों में सक्रिय रहे और ‘गदर 2’, ‘बधाई दो’ तथा ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में नजर आए। उनके करियर की खास बात यह रही कि उन्होंने बदलते दौर के साथ फिल्मों में अपनी मौजूदगी बनाए रखी और अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम किया।
मुश्ताक खान की सबसे चर्चित भूमिकाओं में साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘वेलकम’ का बल्लू का किरदार शामिल है। अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ अभिनीत इस फिल्म में उनका किरदार कहानी में हास्य का महत्वपूर्ण हिस्सा था। फिल्म का वह दृश्य,जिसमें उनका किरदार अपनी नकली टांग और हॉकी खिलाड़ी होने की कहानी सुनाता है,दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। मुश्ताक खान की संवाद अदायगी और चेहरे के भावों ने इस दृश्य को यादगार बना दिया। फिल्म रिलीज होने के वर्षों बाद भी उनका यह किरदार सामाजिक मीडिया और मीम संस्कृति में दिखाई देता रहा।
हालाँकि,मुश्ताक खान को केवल ‘वेलकम’ के बल्लू के किरदार तक सीमित करना उनके लंबे अभिनय करियर को छोटा करना होगा। उन्होंने हिंदी सिनेमा में कई तरह की चरित्र भूमिकाएं निभाईं। कभी पुलिस अधिकारी, कभी आम आदमी, कभी परिवार के सदस्य तो कभी हास्य पैदा करने वाले किरदार के रूप में उन्होंने पर्दे पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी खासियत यह थी कि वह छोटे से छोटे किरदार में भी अपनी अलग शैली जोड़ देते थे। यही वजह रही कि दर्शक उन्हें अक्सर नाम से ज्यादा उनके निभाए किरदारों के जरिए पहचानते रहे।
उनके फिल्मी करियर की शुरुआत को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में 1980 की फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ का उल्लेख मिलता है। इसके बाद उन्होंने लगातार फिल्मों में काम किया और कई प्रमुख निर्देशकों तथा कलाकारों के साथ पर्दा साझा किया। उनका करियर उस दौर से शुरू हुआ जब हिंदी फिल्मों में चरित्र कलाकारों की भूमिकाएँ कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती थीं। समय के साथ फिल्मों की शैली बदली,लेकिन मुश्ताक खान ने अपनी अभिनय शैली को बदलते सिनेमा के अनुरूप ढाला और काम जारी रखा।
फिल्मों के साथ-साथ मुश्ताक खान ने टेलीविजन पर भी काम किया। वह लोकप्रिय धारावाहिक ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में नजर आए थे। टेलीविजन के माध्यम से भी उन्हें घर-घर के दर्शकों तक पहुँचने का मौका मिला। बड़े पर्दे पर हास्य और चरित्र भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले मुश्ताक खान ने छोटे पर्दे पर भी अपनी सहज अदाकारी से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनका काम केवल एक माध्यम तक सीमित नहीं रहा और उन्होंने अपने लंबे करियर में फिल्म तथा टेलीविजन दोनों क्षेत्रों में योगदान दिया।
मुश्ताक खान की निजी जिंदगी को लेकर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनका जन्म 31 दिसंबर 1969 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका परिवार मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर से जुड़ा रहा है। उन्होंने सलमा खान से विवाह किया था और उनके दो बेटे हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने मुंबई को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और लगातार फिल्मों में काम करते रहे। उनके परिवार और करीबी लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति है।
रिपोर्टों के अनुसार,मुश्ताक खान को करीब पाँच वर्ष पहले कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था,लेकिन हाल में बीमारी दोबारा उभर आई। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले करीब दो सप्ताह से उनका उपचार चल रहा था। बीमारी गंभीर अवस्था में पहुँचने के बाद गुरुवार शाम उनका निधन हो गया।
मुश्ताक खान के निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया,जिसने दशकों तक अलग-अलग किरदारों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। वह उन कलाकारों में रहे जिनकी लोकप्रियता किसी एक मुख्य भूमिका या किसी एक फिल्म पर निर्भर नहीं रही। उनकी पहचान फिल्मों के छोटे-बड़े किरदारों, खास अंदाज और कॉमिक टाइमिंग से बनी। ‘आशिकी’ से लेकर ‘वेलकम’ और ‘हेरा फेरी’ जैसी फिल्मों तक उनका सफर हिंदी सिनेमा के उस चरित्र अभिनय की परंपरा का हिस्सा रहा, जिसमें कलाकार कम समय में भी कहानी पर अपनी छाप छोड़ देता है।
‘वेलकम’ का बल्लू उनके करियर का सबसे लोकप्रिय किरदार जरूर रहा,लेकिन उनकी पूरी अभिनय यात्रा इससे कहीं ज्यादा लंबी और विविध थी। नई पीढ़ी के दर्शकों ने उन्हें ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी देखा। इस तरह उन्होंने अलग-अलग दौर के सिनेमा में अपनी जगह बनाए रखी। उनके निधन के बाद फिल्म जगत में उनके काम और उनके यादगार किरदारों को लेकर चर्चा जारी है।
मुश्ताक खान का जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐसी कमी है,जिसे उनके निभाए किरदारों के जरिए लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। पर्दे पर उनकी सहज मौजूदगी, हास्य का अंदाज और संवादों को खास तरीके से पेश करने की शैली दर्शकों की यादों में बनी रहेगी। दशकों लंबे करियर में उन्होंने भले ही अधिकतर सहायक भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन उन भूमिकाओं को अपनी अदाकारी से अलग पहचान देना ही उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही।
