संयुक्त राष्ट्र,25 सितंबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ अहम बैठकें कीं। क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच हुई इन मुलाकातों में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम की समीक्षा की गई। जयशंकर ने जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी के साथ मुलाकात के बाद कहा कि पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व को लेकर उनकी बातचीत बेहद महत्वपूर्ण रही। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती के साथ बैठक को उन्होंने क्षेत्रीय घटनाक्रमों की उपयोगी समीक्षा बताया।
पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट के बीच जॉर्डन और मिस्र दोनों की रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है। जॉर्डन क्षेत्रीय सुरक्षा और फिलिस्तीन मुद्दे से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, जबकि मिस्र लंबे समय से पश्चिम एशिया में कूटनीतिक प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद और समन्वय को लेकर लगातार बातचीत हो रही है। जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने भी दो-राज्य समाधान को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है और कहा है कि फिलिस्तीनी मुद्दे का समाधान जॉर्डन की कीमत पर नहीं किया जा सकता।
जयशंकर की इन बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। क्षेत्र में समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी परिस्थितियों के बीच भारत लगातार विभिन्न देशों के संपर्क में है। इससे पहले भी भारत ने क्षेत्र में तनाव कम करने, संवाद को बढ़ावा देने और स्थिरता कायम करने की जरूरत पर जोर दिया है। जयशंकर की बैठकों में भी क्षेत्रीय घटनाक्रमों की समीक्षा इसी व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में हुई।
इसी बीच,फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के समाधान के लिए प्रस्तावित दो-राज्य समाधान को लेकर भी भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान दो-राज्य समाधान को लागू करने के लिए बनाए गए वैश्विक गठबंधन की उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय में पश्चिम सचिव सिबी जॉर्ज ने किया। बैठक का आयोजन सऊदी अरब, यूरोपीय संघ और नॉर्वे समेत कई पक्षों के सहयोग से हुआ। इसका उद्देश्य दो-राज्य समाधान से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की समीक्षा करना और आने वाले समय में इसके क्रियान्वयन के लिए ठोस कदमों पर चर्चा करना था।
भारत ने इस बैठक में एक बार फिर दो-राज्य समाधान के प्रति अपने स्पष्ट और लगातार समर्थन की पुष्टि की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ व्यावहारिक समर्थन को जोड़ता है। भारत लंबे समय से इस बात का समर्थन करता रहा है कि फिलिस्तीन और इजरायल को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के रूप में शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहने का रास्ता मिलना चाहिए। सितंबर में जारी ब्रिक्स घोषणा में भी सदस्य देशों ने फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों और दो-राज्य समाधान के प्रति समर्थन दोहराया था।
दो-राज्य समाधान पर हुई बैठक की अध्यक्षता सऊदी अरब ने की। बैठक में मिस्र और जॉर्डन समेत पश्चिम एशिया के कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान क्षेत्र में शांति की संभावनाओं, फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और मौजूदा परिस्थितियों में दो-राज्य समाधान को लागू करने के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर भी इस समाधान को लंबे समय से फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के राजनीतिक समाधान के प्रमुख विकल्प के रूप में समर्थन मिलता रहा है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कैरेबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत और एंटीगुआ एवं बारबुडा के बीच विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े सहयोग पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक की सफलता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस वर्ष नवंबर में होने वाली यह बैठक एंटीगुआ और बारबुडा की मेजबानी में आयोजित की जाएगी।
राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक एक से चार नवंबर 2026 तक एंटीगुआ और बारबुडा की राजधानी सेंट जॉन्स में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राष्ट्रमंडल देशों के नेता और प्रतिनिधि साझा चुनौतियों तथा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। मेजबान देश के साथ भारत की विकास साझेदारी के तहत क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग जारी है।
भारत ने एंटीगुआ और बारबुडा के लिए भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से 10 लाख डॉलर की सहायता भी उपलब्ध कराई है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त अस्पताल के पुनर्निर्माण जैसे कार्यक्रमों में भी भारत ने प्रत्यक्ष सहायता दी है। जयशंकर ने इस सहयोग को दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी का हिस्सा बताया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत आने वाले समय में भी क्षमता निर्माण, विकास और जलवायु परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जयशंकर की विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार हो रही मुलाकातें भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं। एक ओर भारत पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते घटनाक्रम पर क्षेत्रीय देशों के साथ संवाद कर रहा है,वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के राजनीतिक समाधान और दो-राज्य समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में अपनी स्थिति दोहरा रहा है। इसके साथ ही भारत विकास साझेदारी,जलवायु सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर अपनी भागीदारी को भी आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह सत्र भारत के लिए पश्चिम एशिया संकट के साथ-साथ व्यापक वैश्विक और विकास संबंधी मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएँ रखने का महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।
