वॉशिंगटन,17 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका में पढ़ाई करने की योजना बना रहे लाखों विदेशी छात्रों,शोधार्थियों और एक्सचेंज कार्यक्रमों में शामिल प्रतिभागियों के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा और व्यापक बदलाव किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक नया अंतिम नियम जारी करते हुए दशकों पुरानी उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत विदेशी छात्र और कुछ अन्य गैर-आप्रवासी वीजा धारक बिना किसी निश्चित अंतिम तारीख के अमेरिका में रह सकते थे। अब इस व्यवस्था की जगह तय समय सीमा वाली प्रणाली लागू की जाएगी,जिसके अंतर्गत छात्रों,एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों को सीमित अवधि के लिए अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी। यदि उन्हें अपनी पढ़ाई या कार्यक्रम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी तो उन्हें संघीय सरकार से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी और विस्तृत सुरक्षा जाँच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
यह बदलाव अमेरिका की आव्रजन नीति में पिछले कई दशकों का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि इस नए नियम का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी,सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। विभाग के अनुसार,पुरानी व्यवस्था के कारण कई लोग वर्षों तक लगातार नए शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रवेश लेकर अमेरिका में बने रहते थे और इस दौरान उनकी निगरानी सीमित हो जाती थी। नई नीति के माध्यम से सरकार इस प्रक्रिया को नियंत्रित करना चाहती है ताकि अस्थायी वीजा का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए हो,जिसके लिए वह जारी किया गया है।
नए नियम के तहत गैर-आप्रवासी वीजा की एफ,जे और आई श्रेणियों के लिए लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब इन श्रेणियों में आने वाले विदेशी छात्रों, एक्सचेंज कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को उनके स्वीकृत कार्यक्रम की अवधि के अनुसार अमेरिका में रहने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि,यह अवधि अधिकतम चार वर्ष तक ही सीमित रहेगी। यदि किसी छात्र को शोध,उच्च शिक्षा या किसी अन्य शैक्षणिक कारण से अधिक समय की आवश्यकता होगी तो उसे अलग से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना,वीजा के दुरुपयोग को रोकना और सभी विदेशी नागरिकों की नियमित अंतराल पर सरकारी जाँच सुनिश्चित करना है। विभाग का मानना है कि तय समय सीमा होने से सरकार को यह पता रहेगा कि कौन व्यक्ति किस उद्देश्य से अमेरिका में रह रहा है और कब तक रहने के लिए अधिकृत है। इससे वीजा प्रणाली की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के सचिव मार्कवेन मुलिन ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि लगभग आधी सदी से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था ने राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर किया और आव्रजन धोखाधड़ी के लिए अवसर पैदा किए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक ऐसी स्थिति बनी रही,जिसमें कई विदेशी छात्र एक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दूसरे कार्यक्रम में प्रवेश लेकर लगातार अमेरिका में बने रहते थे। इस व्यवस्था में उनके प्रवास की कोई निश्चित अंतिम तिथि नहीं होती थी,जिसके कारण निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया जटिल हो जाती थी।
मार्कवेन मुलिन ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी वैध छात्र को नुकसान पहुँचाना नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जो लोग पढ़ाई के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं,वे वास्तव में अपनी शिक्षा पूरी करें और उसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाएँ। उन्होंने कहा कि स्पष्ट समय सीमा लागू होने से सरकार प्रत्येक आवेदक की नियमित समीक्षा कर सकेगी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त जाँच भी कर पाएगी।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार,वर्ष 1978 से विदेशी छात्रों को “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था के तहत अमेरिका में रहने की अनुमति दी जाती रही है। इस व्यवस्था में छात्रों को उनके शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि तक रहने की अनुमति होती थी,लेकिन उसके लिए कोई निश्चित समाप्ति तिथि तय नहीं की जाती थी। यदि छात्र किसी नए पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लेते थे तो उनका प्रवास भी उसी के अनुसार आगे बढ़ जाता था। सरकार का कहना है कि इस प्रणाली का कुछ लोगों ने अनुचित लाभ उठाया और वर्षों तक लगातार नए कार्यक्रमों में दाखिला लेकर अमेरिका में बने रहे।
नई नीति के लागू होने के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। अब किसी भी विदेशी छात्र या एक्सचेंज विजिटर को कार्यक्रम पूरा करने के बाद यदि अतिरिक्त समय चाहिए होगा तो उसे सीधे अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के पास आवेदन करना होगा। पहले इस प्रकार के कई मामलों में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अधिक होती थी, लेकिन अब अंतिम निर्णय संघीय सरकार के पास होगा। इसका अर्थ यह है कि वीजा विस्तार की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और विस्तृत होगी।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने बताया कि वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बायोमेट्रिक जाँच,पृष्ठभूमि सत्यापन और संभावित धोखाधड़ी की जाँच जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। सरकार का मानना है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल वास्तविक आवश्यकता वाले छात्रों को ही अतिरिक्त समय दिया जाए और वीजा प्रणाली का दुरुपयोग रोका जा सके।
नए नियम में एफ-1 श्रेणी के छात्रों के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब पढ़ाई पूरी होने,शैक्षणिक संस्थान बदलने या वीजा की स्थिति बदलने के बाद अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाली छूट अवधि को 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि छात्रों को अपनी आगे की योजना पहले से अधिक तेजी और सावधानी के साथ बनानी होगी। यदि वे किसी नए कार्यक्रम में प्रवेश लेना चाहते हैं या किसी अन्य वीजा श्रेणी में जाना चाहते हैं,तो उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करनी होंगी।
इसके अलावा शैक्षणिक कार्यक्रम बदलने के नियम भी पहले की तुलना में अधिक सख्त किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र केवल वास्तविक शैक्षणिक कारणों से ही कार्यक्रम बदलें और इस प्रक्रिया का उपयोग केवल अमेरिका में लंबे समय तक रहने के साधन के रूप में न किया जाए।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अंतिम नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिन बाद प्रभावी हो जाएगा। इसके बाद नई व्यवस्था सभी नए और मौजूदा पात्र वीजा धारकों पर लागू होगी। इसका अर्थ यह है कि जो विदेशी छात्र पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” व्यवस्था के तहत रह रहे हैं,वे भी नई नीति के दायरे में आ जाएँगे। उनके अधिकृत प्रवास की अवधि भी नियम लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक सीमित मानी जाएगी।
सरकार का कहना है कि अन्य कई गैर-आप्रवासी वीजा श्रेणियों में पहले से ही निश्चित अवधि की व्यवस्था लागू है। इसलिए छात्रों,एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया वीजा को भी उसी प्रणाली के अंतर्गत लाया जा रहा है,ताकि सभी अस्थायी वीजा कार्यक्रमों में समान प्रकार की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था लागू हो सके।
इस पूरी प्रक्रिया में स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम की भूमिका पहले की तरह बनी रहेगी। यह कार्यक्रम अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी के अंतर्गत संचालित होता है और विदेशी छात्रों तथा शैक्षणिक संस्थानों की निगरानी करता है। इसके लिए स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है,जिसमें अमेरिका के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों,एक्सचेंज कार्यक्रमों और विदेशी छात्रों से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज रहती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी यही प्रणाली छात्रों के रिकॉर्ड और उनकी गतिविधियों की निगरानी का प्रमुख माध्यम बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति ट्रंप प्रशासन की व्यापक आव्रजन रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से प्रशासन लगातार आव्रजन नियमों को अधिक सख्त बनाने, अस्थायी वीजा कार्यक्रमों पर संघीय निगरानी बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में विस्तृत सत्यापन की नीति पर जोर देता रहा है। इसी क्रम में यह नया नियम भी लाया गया है,जिसका उद्देश्य सरकार के अनुसार वीजा प्रणाली को अधिक नियंत्रित और सुरक्षित बनाना है।
इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ सकता है,जहाँ से बड़ी संख्या में छात्र अमेरिका उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं। भारत लंबे समय से अमेरिका में अध्ययन करने वाले विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल रहा है। हर वर्ष हजारों भारतीय छात्र स्नातक,स्नातकोत्तर,शोध और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था का सीधा असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ेगा।
विशेष रूप से वे छात्र,जिन्हें शोध कार्य,प्रयोगशाला आधारित परियोजनाओं,चिकित्सा शिक्षा या डॉक्टरेट कार्यक्रमों के कारण अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ती है,उन्हें अब पहले की तुलना में अधिक औपचारिक सरकारी प्रक्रिया से गुजरना होगा। उन्हें समय रहते अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा से अनुमति लेनी होगी और विस्तृत जाँच पूरी करनी होगी। इससे उनकी योजना,दस्तावेजी तैयारी और समय प्रबंधन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।
हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य वैध छात्रों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करना नहीं,बल्कि आव्रजन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। सरकार का तर्क है कि नियमित समीक्षा और सुरक्षा जाँच से वीजा प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा और उसका दुरुपयोग रोकने में सहायता मिलेगी। दूसरी ओर,शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रियाएँ छात्रों के लिए नई चुनौतियाँ भी पैदा कर सकती हैं,विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके शोध या शैक्षणिक कार्यक्रम अपेक्षा से अधिक समय लेते हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि अमेरिका की विदेशी छात्र वीजा व्यवस्था में यह बदलाव आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। भारतीय छात्रों सहित दुनिया भर के लाखों विद्यार्थियों को अब नई समय-सीमा,अतिरिक्त सरकारी जाँच और संशोधित वीजा विस्तार प्रक्रिया के अनुसार अपनी शैक्षणिक योजनाएँ तैयार करनी होंगी। इससे अमेरिका की आव्रजन नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जिसका असर आने वाले वर्षों में वैश्विक छात्र समुदाय पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
