वाशिंगटन,14 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्री नाकाबंदी लागू होने के बाद ईरान के खिलाफ एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के करीब आने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके लिए वही “किल सिस्टम” इस्तेमाल किया जाएगा,जिसका प्रयोग समुद्री रास्तों से होने वाली ड्रग तस्करी को रोकने के लिए किया जाता है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने जानबूझकर कुछ फास्ट अटैक शिप्स को निशाना नहीं बनाया,क्योंकि उन्हें फिलहाल उनसे कोई बड़ा खतरा नहीं लगता। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ये जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के दायरे में आते हैं,तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप के इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने अब तक ईरान के 158 जहाजों को नष्ट कर दिया है और शेष जहाजों को इसलिए छोड़ा गया क्योंकि वे तत्काल खतरा नहीं पैदा करते। हालाँकि,इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है,लेकिन यह बयान निश्चित रूप से क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाने वाला है।
ट्रंप ने “किल सिस्टम” का जिक्र करते हुए कहा कि यह बेहद तेज और प्रभावी प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका पहले से ही समुद्र में ड्रग तस्करों के खिलाफ करता रहा है। उनके अनुसार,इस तकनीक की वजह से समुद्री रास्तों के जरिए अमेरिका में आने वाले लगभग 98 प्रतिशत ड्रग्स पर रोक लगाई जा सकी है। अब इसी सिस्टम का इस्तेमाल संभावित खतरे के रूप में देखे जाने वाले जहाजों के खिलाफ किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। यह नाकाबंदी सोमवार शाम से प्रभावी हो चुकी है और इसके तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सख्त निगरानी की जा रही है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी गतिविधियों को सीमित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ट्रंप ने अपने पिछले बयानों में यह भी स्पष्ट किया था कि इस नाकाबंदी के तहत जो भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा,उसे रोका जाएगा और उसकी जाँच की जाएगी। विशेष रूप से उन जहाजों पर नजर रखी जा रही है,जो ईरान को कथित रूप से “गैरकानूनी टोल” देते हैं। ट्रंप के अनुसार,ऐसे जहाजों को सुरक्षित मार्ग नहीं दिया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है,जहाँ से दुनिया के एक बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है। पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा चुका है और आने वाले दिनों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अमेरिका का यह कदम ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के विफल होने के बाद उठाया गया है। दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई,जिसके बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए यह नाकाबंदी लागू की। ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है और इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।
मौजूदा स्थिति में यह कहना मुश्किल है कि यह तनाव किस दिशा में जाएगा,लेकिन इतना तय है कि दोनों देशों के बीच टकराव का खतरा बढ़ गया है। ट्रंप के आक्रामक बयान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी ने इस संकट को और जटिल बना दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस तनाव को कूटनीति के जरिए कम किया जा सकेगा या यह किसी बड़े संघर्ष का रूप ले लेगा।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता सैन्य तनाव न केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों को प्रभावित कर रहा है,बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस स्थिति को किस तरह सँभालते हैं और क्या कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल पाता है या नहीं।
