नई दिल्ली,14 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत का डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से उभरता हुआ एक रणनीतिक क्षेत्र बनता जा रहा है,जहाँ आने वाले वर्षों में जबरदस्त विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार,देश का डेटा सेंटर बाजार 2025 में करीब 10 अरब डॉलर के स्तर से बढ़कर 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। यह वृद्धि केवल आँकड़ों का विस्तार नहीं है,बल्कि भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी अवसंरचना की मजबूती का संकेत भी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशकों का इस क्षेत्र में बढ़ता भरोसा और लगातार मजबूत वृद्धि दर इस विस्तार के प्रमुख कारण हैं। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की तेज रफ्तार ने उद्योगों को डेटा पर अधिक निर्भर बना दिया है,जिससे डेटा सेंटर की माँग में लगातार इजाफा हो रहा है। बैंकिंग,ई-कॉमर्स,हेल्थकेयर,शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में डेटा के उपयोग ने इस सेक्टर को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश की तेजी से बढ़ती इंटरनेट उपयोगकर्ता संख्या और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग है। भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुँच ने डेटा खपत को कई गुना बढ़ा दिया है,जिसके चलते कंपनियों को बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने की जरूरत पड़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार,लगभग 30 अरब डॉलर के निवेश के समर्थन से देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2026 के अंत तक 1.7 से 2.0 गीगावॉट तक पहुँच सकती है। यह क्षमता 2030 तक बढ़कर 4 से 5 गीगावॉट तक पहुँचने की संभावना है। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत में डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है और आने वाले समय में यह सेक्टर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हो रहा है।
वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मजबूत नीतिगत समर्थन और बढ़ती डिजिटल माँग के कारण भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वर्तमान में वैश्विक क्षमता में भारत की हिस्सेदारी सीमित हो,लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अवसंरचना के क्षेत्र में अग्रणी बनने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
सरकार की नीतियाँ भी इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सिंगल-विंडो क्लीयरेंस,20 साल तक कर छूट, जीएसटी लाभ और 2047 तक जारी रहने वाले विभिन्न प्रोत्साहन उपायों ने निवेशकों को आकर्षित किया है। इन नीतियों के कारण भारत वैश्विक डेटा सेंटर और एआई हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2020 से 2024 के बीच इस क्षेत्र ने लगभग 13 से 15 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया है,जिसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों का हिस्सा करीब 80 प्रतिशत रहा है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय निवेशक भारत के डेटा सेंटर बाजार को लेकर काफी आश्वस्त हैं और यहाँ दीर्घकालिक निवेश के अवसर देख रहे हैं।
भारत की एक बड़ी ताकत इसकी लागत प्रतिस्पर्धा है। डेटा सेंटर निर्माण की लागत यहां लगभग 6 से 7 मिलियन डॉलर प्रति मेगावाट है,जो सिंगापुर और जापान जैसे विकसित एशियाई बाजारों की तुलना में काफी कम है। कम लागत के कारण भारत बड़े पैमाने पर निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। यही कारण है कि कई वैश्विक कंपनियाँ भारत में अपने डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही हैं।
हालाँकि,वर्तमान में देश का डेटा सेंटर बुनियादी ढाँचा कुछ चुनिंदा महानगरों तक ही सीमित है। मुंबई इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हब बना हुआ है,जहाँ मजबूत वैश्विक कनेक्टिविटी और विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। वहीं चेन्नई एक प्रमुख वैश्विक डेटा गेटवे के रूप में उभर रहा है,जहाँ कई सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन उच्च क्षमता और कम लेटेंसी वाली कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं।
इसके अलावा हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहर तेजी से उभरते हुए सेकेंडरी हब के रूप में सामने आ रहे हैं। इन शहरों में मजबूत आईटी इकोसिस्टम,पर्याप्त भूमि की उपलब्धता और अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
वहीं,अहमदाबाद, कोच्चि, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे उभरते शहर भी अब डेटा सेंटर विकास के लिए लोकप्रिय हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी भूमि लागत,बेहतर डिजिटल बुनियादी ढाँचा और राज्य सरकारों की सहायक नीतियां निवेश को बढ़ावा दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर सेक्टर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है। क्लाउड कंप्यूटिंग,एआई,5जी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग से डेटा की माँग में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके चलते कंपनियों को सुरक्षित,तेज और विश्वसनीय डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग सुविधाओं की जरूरत पड़ेगी,जिसे डेटा सेंटर पूरा करेंगे।
भारत का डेटा सेंटर बाजार एक मजबूत और स्थायी विकास की ओर बढ़ रहा है। निवेश, नीतिगत समर्थन और तकनीकी प्रगति के संयोजन से यह क्षेत्र न केवल देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा,बल्कि भारत को वैश्विक डिजिटल मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान भी दिलाएगा। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सेक्टर किस तरह से अपने लक्ष्यों को हासिल करता है और भारत को एक वैश्विक डेटा और एआई हब के रूप में स्थापित करता है।
