ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और प्रधानमंत्री मोदी (तस्वीर क्रेडिट@Rahulviratgupt5)

दिसंबर में भारत आएँगे ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बानीज,मुंबई में बिजनेस बैठक और चेन्नई में क्रिकेट कार्यक्रम

न्यूयॉर्क,28 सितंबर (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज दिसंबर में भारत की यात्रा की योजना बना रहे हैं। प्रस्तावित यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक, कारोबारी और खेल संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अल्बानीज ने कहा है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच राजनीतिक और रणनीतिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं,लेकिन दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी में अभी भी कई संभावनाएँ बाकी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वह ऑस्ट्रेलिया के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों ने आर्थिक और खेल सहयोग को विस्तार देने के लिए कई नई पहलों की घोषणा भी की है।

अल्बानीज ने न्यूयॉर्क में एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड के साथ बातचीत में अपनी प्रस्तावित भारत यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाली जी20 बैठक से लौटते समय भारत आने की योजना है। उनके मुताबिक,इस दौरान मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के कारोबारियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन चेन्नई में क्रिकेट से जुड़े कार्यक्रम के साथ होगा।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने बताया कि वह बिजनेस काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के साथ कई कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेकर भारत पहुँचेंगे। मुंबई में प्रस्तावित कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संपर्क बढ़ाना और निवेश तथा व्यापार से जुड़े अवसरों पर चर्चा करना होगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी दिसंबर में भारत के लिए वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है। इसके साथ मुंबई में निवेश से जुड़ी एक विशेष बैठक आयोजित करने की योजना है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए पिछले कुछ समय से कई स्तरों पर काम हो रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता पहले से लागू है और अब व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की दिशा में भी काम जारी है। ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक सहभागिता के लिए तैयार किए गए रोडमैप में स्वच्छ ऊर्जा,शिक्षा और कौशल,कृषि-व्यवसाय तथा पर्यटन को प्रमुख क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार,इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

अल्बानीज ने भारत के साथ संबंधों को केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रमंडल से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में मौजूद करीबी संपर्क का भी उल्लेख किया। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी भी दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों को मजबूत करती है। भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों में पढ़ती है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय भारत में अपने शैक्षणिक संस्थानों और गतिविधियों का विस्तार कर रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी हाल के वर्षों में सहयोग बढ़ा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मुताबिक, भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के परिसरों को स्थापित करने की दिशा में प्रगति हुई है। जुलाई 2026 में ऑस्ट्रेलिया सरकार ने बताया था कि भारत में आठ ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के शाखा परिसरों को मंजूरी मिल चुकी है। यह दोनों देशों के शिक्षा और कौशल संबंधों के विस्तार का संकेत है।

अल्बानीज ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए लगातार महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बन रहा है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में अब तक जितनी प्रगति हुई है, उससे आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है। इसी कारण वह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बनाने पर जोर दे रहे हैं।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत में ऊर्जा की पहुँच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत में बिजली और ऊर्जा की पहुंच से जुड़े बदलावों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को इसका श्रेय दिया। हालाँकि,ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग केवल घरेलू बिजली पहुँच तक सीमित नहीं है। हाल की द्विपक्षीय चर्चाओं में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज,स्वच्छ ऊर्जा और भरोसेमंद आपूर्ति शृंखलाओं को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। दोनों देशों ने ऊर्जा व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।

अल्बानीज और प्रधानमंत्री मोदी के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी लगातार संपर्क रहा है। अल्बानीज के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है। जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, जहाँ मेलबर्न में दोनों नेताओं के बीच वार्षिक शिखर बैठक हुई। इस दौरान दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट संबंधों का भी अलग महत्व है। दोनों देशों में क्रिकेट को लेकर गहरी रुचि है और यह संबंध कई बार कूटनीतिक संपर्क का माध्यम भी बनता रहा है। जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी और अल्बानीज ने चेन्नई में दिसंबर 2026 में ऑस्ट्रेलिया की पुरुष बिग बैश लीग के शुरुआती मुकाबले के आयोजन की घोषणा की थी। यह पहली बार होगा जब इस ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट लीग का कोई मुकाबला भारत में खेला जाएगा। इसके साथ भारत में ऑस्ट्रेलियाई खेल,संस्कृति और कारोबार से जुड़े कार्यक्रमों का एक सप्ताह चलाने की योजना भी बनाई गई है।

चेन्नई में होने वाले इस क्रिकेट मुकाबले में मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच मुकाबला प्रस्तावित है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेल सहयोग बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा बताया है। दोनों देशों ने खेल सहयोग के लिए एक रोडमैप भी जारी किया है,जिसमें खेल विज्ञान, प्रशिक्षण, तकनीक, प्रमुख खेल आयोजनों की मेजबानी,पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इस रोडमैप के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया भविष्य में बड़े खेल आयोजनों की तैयारियों में एक-दूसरे के अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश करेंगे। ऑस्ट्रेलिया 2032 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी करेगा,जबकि भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में खेल अवसंरचना,आयोजन प्रबंधन, खेल विज्ञान और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक महत्वपूर्ण आयाम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी है। भारत और ऑस्ट्रेलिया अमेरिका तथा जापान के साथ चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद यानी क्वाड के सदस्य हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा,महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों,आपूर्ति शृंखलाओं, आपदा राहत तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर सहयोग करते हैं। जुलाई 2026 में दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नई संयुक्त घोषणा भी जारी की थी। इसमें रणनीतिक समन्वय बढ़ाने, रक्षा अभ्यासों की जटिलता बढ़ाने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करने की बात कही गई।

ऑस्ट्रेलिया की हिंद-प्रशांत नीति में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया अमेरिका, जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। इसी व्यापक क्षेत्रीय नीति के तहत भारत के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को भी विस्तार दिया जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के साथ व्यापार, शिक्षा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े सहयोग को भी रणनीतिक महत्व मिला है।

दोनों देशों के बीच भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी भी रिश्तों की एक अहम कड़ी है। ऑस्ट्रेलिया में बड़ा भारतीय समुदाय रहता है और दोनों देशों के बीच शिक्षा तथा रोजगार के कारण लोगों का आवागमन लंबे समय से जारी है। प्रधानमंत्री अल्बानीज ने ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुए एक बड़े भारतीय समुदाय के कार्यक्रम का भी जिक्र किया और वहाँ भारतीय मूल के लोगों के उत्साह को याद किया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों में आर्थिक सहयोग का दायरा भी धीरे-धीरे बदल रहा है। पारंपरिक व्यापार के साथ अब स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, कृषि, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और खेल जैसे क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने में भी रुचि दिखाई है। जुलाई 2026 में ऑस्ट्रेलियनसुपर ने भारत के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष में अतिरिक्त 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा की थी।

ऐसे समय में अल्बानीज की प्रस्तावित दिसंबर यात्रा का कारोबारी पहलू खास महत्व रखता है। मुंबई में वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक और निवेश से जुड़े कार्यक्रम दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा होंगे। वहीं चेन्नई में क्रिकेट कार्यक्रम इस यात्रा के खेल और जनसंपर्क पक्ष को सामने लाएगा।

इस प्रस्तावित यात्रा के जरिए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों के कई आयाम एक साथ दिखाई देंगे। एक तरफ व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी,वहीं शिक्षा, ऊर्जा,खेल और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में पहले से चल रही साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है और जुलाई 2026 की वार्षिक शिखर बैठक में भी दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

दिसंबर में प्रस्तावित यात्रा इसी व्यापक प्रक्रिया की अगली कड़ी हो सकती है। मुंबई का कारोबारी कार्यक्रम जहाँ निवेश और व्यापार से जुड़े अवसरों पर केंद्रित रहेगा,वहीं चेन्नई का क्रिकेट आयोजन दोनों देशों के बीच खेल के माध्यम से बढ़ते संपर्क को रेखांकित करेगा। इस तरह अल्बानीज की संभावित भारत यात्रा में कूटनीति, कारोबार, शिक्षा, खेल और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई पहलू एक साथ सामने आने की संभावना है।