एशियन गेम्स 2026 में नीरू ढांडा ने देश को दिलाया पाँचवां गोल्ड (तस्वीर क्रेडिट@balramk34750024)

एशियन गेम्स 2026: नीरू ढांडा ने रचा इतिहास,एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

नागोया,29 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजी का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत की नीरू ढांडा ने महिलाओं की ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। अपना पहला एशियन गेम्स खेल रहीं नीरू ने फाइनल में 28 का स्कोर हासिल किया और एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह एशियन गेम्स के इतिहास में महिलाओं की ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बन गई हैं।

नीरू की इस उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। खास बात यह है कि वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स पदक जीतने वाली भी पहली भारतीय महिला बनी हैं। इससे पहले किसी भारतीय महिला निशानेबाज ने एशियन गेम्स की ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में पदक नहीं जीता था। अपने पदार्पण में ही नीरू ने सीधे स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा और दबाव में शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता का परिचय दिया।

फाइनल से पहले भी नीरू का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा था। उन्होंने क्वालीफिकेशन राउंड में 118 का स्कोर हासिल किया और शीर्ष स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। इसके बाद फाइनल में उन्होंने शुरुआत से ही पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। मुकाबले के दौरान एक समय ऐसा भी आया,जब एक शॉट चूकने के कारण वह कुछ देर के लिए तीसरे स्थान पर खिसक गईं,लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा और अगले दौर में शानदार वापसी करते हुए फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया।

फाइनल में नीरू का पहला मिस नौवें शॉट पर आया। इसके बाद वह कुछ समय के लिए तीसरे स्थान पर चली गईं,लेकिन उन्होंने दबाव में अपना संयम नहीं खोया। तीसरी और चौथी सीरीज में उन्होंने लगातार सटीक निशाने लगाए और अपनी स्थिति मजबूत कर ली। 20 शॉट्स के बाद उनके खाते में 19 सफल हिट थे और वह फिर से मुकाबले में सबसे आगे पहुँच गईं।

पाँचवीं सीरीज में भी नीरू से एक शॉट चूका,लेकिन इसका असर उनकी स्वर्ण पदक की स्थिति पर नहीं पड़ा। इसके बाद निर्णायक चरण में उन्होंने लगातार पांचों निशाने सफलतापूर्वक साधे और गोल्ड मेडल पर अपनी मुहर लगा दी। फाइनल में नीरू ने कुल 30 शॉट्स में सिर्फ दो निशाने गंवाए। उनका 28 का स्कोर एशियाई रिकॉर्ड भी बन गया, जिससे उनकी ऐतिहासिक जीत और खास हो गई।

नीरू के शानदार प्रदर्शन के सामने चीन की युनोंग सन ने 26 के स्कोर के साथ रजत पदक हासिल किया। वहीं कुवैत की निशानेबाज ने 21 के स्कोर के साथ कांस्य पदक जीता। इस तरह पोडियम पर एशिया के अलग-अलग देशों की निशानेबाजों ने जगह बनाई, लेकिन सबसे ऊँचे पायदान पर भारत की नीरू ढांडा रहीं।

नीरू के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रही हैं। किसी बड़े महाद्वीपीय मंच पर पदार्पण करते हुए सीधे स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। क्वालीफिकेशन में शीर्ष पर रहने से लेकर फाइनल के दबाव में अपना प्रदर्शन बरकरार रखने तक नीरू ने पूरे मुकाबले में निरंतरता दिखाई।

एशियन गेम्स 2026 में निशानेबाजी भारत के लिए पदक जुटाने वाले प्रमुख खेलों में बनी हुई है। नीरू का स्वर्ण इस प्रतियोगिता में शूटिंग में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है। वहीं आइची-नागोया एशियन गेम्स में यह भारत का कुल पाँचवां स्वर्ण पदक बन गया है। भारतीय दल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में ही निशानेबाजों ने पदक तालिका में देश की स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

नीरू ने इसी प्रतियोगिता में इससे पहले ट्रैप टीम स्पर्धा में भी पदक जीता था। उन्होंने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल किया। तीन दिन तक चले 125 शॉट वाले क्वालीफिकेशन दौर के बाद भारतीय टीम ने कुल 328 का स्कोर बनाया था। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया और कुवैत की टीम को पीछे छोड़ा।

टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद व्यक्तिगत मुकाबले में स्वर्ण पदक हासिल करना नीरू के लिए शानदार दोहरी सफलता बन गया। टीम इवेंट में अपनी निरंतरता दिखाने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत फाइनल में भी दबाव के बीच अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। खास तौर पर फाइनल के अंतिम चरण में उनके लगातार सटीक निशानों ने मुकाबले की दिशा उनके पक्ष में कर दी।

नीरू की ऐतिहासिक जीत भारतीय महिला निशानेबाजी के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ट्रैप जैसी तकनीकी और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्पर्धा में लगातार एकाग्रता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। फाइनल में एक-दो शॉट चूकने के बाद भी नीरू ने अपनी लय वापस हासिल की और बाकी निशानों पर नियंत्रण बनाए रखा। यही प्रदर्शन उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे ले गया।

एशियन गेम्स में भारत की पदक यात्रा अभी जारी है और निशानेबाजी से आने वाला यह स्वर्ण देश के अभियान को और मजबूती देता है। नीरू ढांडा ने अपने पहले ही एशियन गेम्स में जिस तरह रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया है,वह उनके करियर की यादगार शुरुआत बन गई है। ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में पहली भारतीय महिला स्वर्ण पदक विजेता बनने के साथ उन्होंने भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।