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ब्रिटेन में शरण चाहने वाले भारतीयों से ‘प्रताड़ित’ होनेे का अभिनय करने की सलाह दे रहे वकील : रिपोर्ट

लंदन, 27 जुलाई (युआईटीवी/आईएएनएस)। ब्रिटेन में आव्रजन वकील क्‍लाइंट्स को बता रहे हैं कि ब्रिटेन में रहने का अधिकार हासिल करने के लिए अधिकारियों से कैसे झूठ बोला जाए और इसके लिए 10 हजार पाउंड वसूल रहे हैं। यह जानकारी  डेली मेल की पड़ताल में सामने आई है।

1983 में श्रीलंका से ब्रिटेन आए एक वकील वी.पी. लिंगजोथी ने एक अंडरकवर मेल रिपोर्टर से ब्रिटेन में शरण पाने के लिए यह दिखावा करने के लिए कहा कि वह एक खालिस्तानी समर्थक है उसके साथ भारत में दुर्व्यवहार किया गया और उसे प्रताड़ित किया गया।

अंडरकवर रिपोर्टर ने खुद को पंजाब के एक किसान के रूप में पेश किया, जो हाल ही में  ब्रिटेन पहुंचा है।

डेली मेल ने लिंगजोथी के हवाले से कहा, “आप कह सकते हैं कि भारत सरकार ने आप पर खालिस्तानी समर्थक होने का आरोप लगाया, आपको हिरासत में लिया गया, गिरफ्तार किया गया और आपके साथ दुर्व्यवहार किया गया, प्रताड़ित किया गया, यौन उत्पीड़न किया गया। इसीलिए आप शादी नहीं कर सके और आप निराश थे, आप आत्महत्या करना चाहते थे। इसलिए भाग कर ब्रिटेन पहुंचे।”

वकील ने इस कहानी के लिए उससे 10 हजार पाउंड की मांग की।

मेल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहानी का समर्थन करने के लिए एक डॉक्टर की रिपोर्ट देने का भी वादा किया और मनोवैज्ञानिक आघात के “सबूत” के रूप में गृह मंत्रालय को दिखाने वाली  अवसाद रोधी दवाएं भी पेश कीं।

एक अन्य फर्म में, जहां अंडरकवर रिपोर्टर गया था, वकील ने कहा कि उसे यह दिखाने के लिए “साक्ष्य बनाना होगा” कि प्रवासी को घर लौटने पर “उत्पीड़न और हत्या” का डर है।

एक तीसरे वकील ने कहा कि वह इसका इस्तेमाल यह दिखाने के लिए करेंगे कि अंडरकवर रिपोर्टर को भारत में अपनी जान का खतरा है, इसमें सरकार विरोधी राजनीतिक निष्ठा, गलत जाति के किसी व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध या समलैंगिक होना जैसे कारण शामिल होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध शरण दावे “दुरुपयोग” और एक ही फर्मों द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए विभिन्न लोगों के “कार्बन कॉपी” अनुप्रयोगों के आरोपों के बीच अधिकारियों द्वारा 40 कानूनी फर्मों की निगरानी की जा रही है।

लिंगाजोथी जैसे अधिकांश वकीलों के पास करोड़ों पाउंड की संपत्ति है।

रिपोर्ट के जवाब में, प्रधान मंत्री ऋषि सुनक और चांसलर एलेक्स चॉक ने कहा कि ऐसेे कानूनी फर्मों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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