सम्राट चौधरी बने राज्य के नए मुख्यमंत्री (तस्वीर क्रेडिट@babyranimaurya)

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव: सम्राट चौधरी बने राज्य के नए मुख्यमंत्री,एनडीए सरकार का गठन,जदयू से दो डिप्टी सीएम बने

पटना,15 अप्रैल (युआईटीवी)- बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सियासी घटनाक्रम के बाद आखिरकार एक बड़ा फैसला सामने आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। राज्यपाल अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक क्षण के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुआ है,जो राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार में कई दिनों से राजनीतिक हलचल तेज थी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक इस्तीफे के बाद सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई थी। मंगलवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया,जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके पास राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पर्याप्त विधायकों का समर्थन था,जिससे सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया।

शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस मौके पर जनता दल यूनाइटेड की ओर से बिजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। दोनों नेताओं को राज्यपाल ने पद की शपथ दिलाई,जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन मजबूत बना हुआ है। इस नई सरकार में जेडीयू की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है,जो राज्य की सियासत में संतुलन बनाए रखने में मदद करेगी।

शपथ ग्रहण से पहले सम्राट चौधरी ने धार्मिक आस्था का परिचय देते हुए पंचरूप हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे लोकभवन पहुँचे,जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला और समर्थकों में खासा जोश नजर आया। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से बधाइयाँ दी जा रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफे के बाद एक भावुक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बिहार के विकास के लिए लंबे समय तक काम किया है और अब उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। नीतीश कुमार का यह बयान सियासी गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है,क्योंकि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार सत्ता परिवर्तन के फैसले लिए हैं।

बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। कुल 243 सदस्यीय विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 202 विधायकों का समर्थन है,जिससे सरकार को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि सम्राट चौधरी की अगुवाई में बनी नई सरकार के सामने फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक संकट नजर नहीं आ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बीजेपी के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। इससे पार्टी को बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा,खासकर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए। वहीं जेडीयू के साथ गठबंधन बनाए रखना भी एनडीए के लिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे सामाजिक और राजनीतिक समीकरण संतुलित रहते हैं।

नई सरकार के सामने अब कई चुनौतियाँ भी हैं। बिहार में विकास,रोजगार,शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे हमेशा से अहम रहे हैं। जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और सम्राट चौधरी को इन उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्य में विकास की गति को तेज करना और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना होगी।

बिहार में सत्ता परिवर्तन ने राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी यह नई सरकार किस तरह से काम करती है और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है,यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल,इस बदलाव ने राज्य की सियासत में नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संचार जरूर किया है।