प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कैबिनेट की बड़ी मंजूरी: 23,437 करोड़ की रेलवे परियोजनाओं से देश में बढ़ेगी कनेक्टिविटी और आर्थिक रफ्तार

नई दिल्ली,6 मई (युआईटीवी)- देश के बुनियादी ढाँचे को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की तीन अहम परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 23,437 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के पूरा होने से न केवल देश की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी,बल्कि आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि यह कदम भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि इन परियोजनाओं के जरिए मध्य प्रदेश, राजस्थान,उत्तर प्रदेश,कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही रेलवे नेटवर्क की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इससे देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी,जिससे पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार द्वारा मंजूर की गई ये तीनों परियोजनाएँ मल्टी-ट्रैकिंग से जुड़ी हैं,जिनका उद्देश्य रेल मार्गों की क्षमता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं में नागदा-मथुरा थर्ड और फोर्थ लाइन, गुंटकल–वाडी थर्ड और फोर्थ लाइन और बुरहवाल–सीतापुर थर्ड और फोर्थ लाइन शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन योजनाओं के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी,जिससे रेल यातायात को अधिक सुगम और तेज बनाया जा सकेगा।

रेल मंत्रालय के अनुसार,इन परियोजनाओं के पूरा होने से ट्रेनों की आवाजाही में सुधार होगा और देरी की समस्या में कमी आएगी। वर्तमान में कई प्रमुख रेल मार्गों पर अधिक दबाव के कारण ट्रेनों की गति प्रभावित होती है,लेकिन अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से इस समस्या का समाधान हो सकेगा। इससे यात्रियों को समय पर यात्रा करने की सुविधा मिलेगी और माल ढुलाई भी अधिक कुशलता से हो सकेगी।

इन परियोजनाओं का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। सरकार के अनुसार,इन योजनाओं से लगभग 4,000 से अधिक गाँवों को सीधे फायदा मिलेगा,जहाँ करीब 83 लाख लोग रहते हैं। बेहतर रेल संपर्क के कारण इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने बताया कि ये सभी परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके जरिए सड़क,रेल,जल और वायु परिवहन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा रहा है,जिससे माल और सेवाओं की आवाजाही अधिक सुगम हो सके।

इन परियोजनाओं का प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पर्यटन और उद्योग क्षेत्रों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। नागदा-मथुरा लाइन के विस्तार से महाकालेश्वर मंदिर,मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुँचआसान होगी। वहीं राजस्थान में रणथंभौर नेशनल पार्क और केवलादेव नेशनल पार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक भी बेहतर रेल संपर्क स्थापित होगा। उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य जैसे धार्मिक स्थल भी इस योजना से जुड़ेंगे,जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

औद्योगिक दृष्टि से भी ये परियोजनाएँ बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार,इन योजनाओं के जरिए कोयला,सीमेंट,खाद और लोहा-इस्पात जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों की ढुलाई में तेजी आएगी। इससे उद्योगों को कच्चा माल समय पर उपलब्ध हो सकेगा और उत्पादन प्रक्रिया में सुधार होगा। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की उम्मीद है,जिससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

पर्यावरण के लिहाज से भी इन परियोजनाओं को लाभकारी बताया जा रहा है। रेलवे के अनुसार,इन योजनाओं से हर साल लगभग 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत होगी। अनुमान है कि इससे करीब 37 करोड़ लीटर तेल की बचत हो सकती है,जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। यह कदम भारत के पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को पूरा करने में भी मददगार साबित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाएँ देश के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। इससे न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूती मिलती है,बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। रेलवे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश से देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई ये रेलवे परियोजनाएँ भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से देश के विभिन्न हिस्सों के बीच दूरी कम होगी,आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का प्रभाव देश की विकास यात्रा में साफ तौर पर दिखाई देगा।