मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (तस्वीर क्रेडिट@MamathaTv)

असम में नई सरकार के गठन की तैयारी,मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा आज देंगे इस्तीफा

गुवाहाटी,6 मई (युआईटीवी)- असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की शानदार जीत के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बुधवार को राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। यह इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है,जिसके बाद नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होगा।

गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उन्होंने जानकारी दी कि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरमा ने कहा कि वे जल्द ही जेपी नड्डा से बातचीत कर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक की तारीख तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही पर्यवेक्षकों की ओर से विधायक दल की बैठक बुलाने का निर्देश मिलेगा,तुरंत बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा,जिसके बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अंतिम परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही वे राज्यपाल को औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपेंगे,ताकि संवैधानिक प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

इस बार के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। कुल 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। यह जीत न केवल पार्टी के लिए ऐतिहासिक है,बल्कि यह राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का संकेत भी देती है। इस जनादेश को पार्टी के विकास कार्यों और शासन की नीतियों पर जनता के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं विपक्ष की स्थिति इस चुनाव में काफी कमजोर नजर आई। कांग्रेस पार्टी केवल 19 सीटों पर सिमट गई,जो उसके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद ने 10-10 सीटें हासिल कीं। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और रायजोर दल ने दो-दो सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई,जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने एक सीट के साथ अपना खाता खोला।

चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद पूरे राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जश्न मनाया। पार्टी नेताओं ने इस जीत को जनता के विश्वास और विकास एजेंडा की सफलता का प्रमाण बताया। उनका कहना है कि राज्य में बुनियादी ढाँचे के विकास,कानून-व्यवस्था में सुधार और सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने जनता को प्रभावित किया है,जिसका परिणाम चुनाव में देखने को मिला।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह लगातार तीसरी जीत पूर्वोत्तर भारत में उसकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने न केवल संगठनात्मक स्तर पर मजबूती हासिल की है,बल्कि विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों को भी प्रभावी ढंग से संबोधित किया है। यही कारण है कि पार्टी को व्यापक जन समर्थन मिला है।

अब सभी की नजरें विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं,जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। हालाँकि,यह लगभग तय माना जा रहा है कि हिमंता बिस्वा सरमा को ही एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना जाएगा और वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके बाद नई सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होगी और राज्य में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार कामकाज संभालेगी।

इस बीच,राज्यपाल की भूमिका भी अहम हो जाती है,क्योंकि वे ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देंगे। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए विधायक दल के नेता को आमंत्रित करेंगे,जिसके बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।

असम में राजनीतिक स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुँच गई है। भाजपा की इस जीत ने न केवल राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में पार्टी का प्रभाव और बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार अपने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए राज्य के विकास को किस तरह नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती है।