कांग्रेस ने केंद्र पर आईओसी द्वारा अडानी के बंदरगाह के साथ प्रतिकूल अनुबंध कराने का आरोप लगाया

कांग्रेस ने केंद्र पर आईओसी द्वारा अडानी के बंदरगाह के साथ प्रतिकूल अनुबंध कराने का आरोप लगाया

नई दिल्ली, 17 फरवरी (युआईटीवी/आईएएनएस)- कांग्रेस ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए का कि अडानी को बंदरगाहों के कारोबार का विस्तार करने में सहायता करने के लिए सरकार हर संभव अनैतिक सहयोग कर रही है।

कांग्रेस ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) द्वारा अडानी के गंगावरम बंदरगाह में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टर्मिनल का उपयोग करने के लिए किए गए प्रतिकूल समझौते को लेकर केंद्र पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, चाहे वह बिना बोली की प्रक्रिया को अपनाए बंदरगाह रियायतें देना हो या व्यापारिक समूहों पर आयकर के छापे डलवाकर उन्हें अपनी मूल्यवान परिसंपत्तियां अडानी को बेचने के लिए बाध्य करना हो। लेकिन सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर क्यों कर रही है। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र को केवल कुछ उद्योगपति मित्रों को और समृद्ध बनाने के उपकरण के रूप में देखा जा रहा है?

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में दिघी बंदरगाह के लिए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट द्वारा 2021 की बोली को पहले ही रोक दिया गया, जो अंतत: अडानी को मिल गई। अब आईओसी, जो पहले सरकार द्वारा संचालित विशाखापत्तनम बंदरगाह के माध्यम से एलपीजी का आयात कर रही थी, अब इसकी बजाए गंगावरम बंदरगाह का उपयोग करने के लिए तैयार किया जा रहा है और वह भी आपूर्ति लो या भुगतान करो जैसे एक प्रतिकूल अनुबंध के आधार पर।

उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या ये इस वास्तविकता को उजागर नहीं करते हैं कि अडानी की बंदरगाह को एलपीजी के आयात के लिए प्रमुख बंदरगाह बनाया जा रहा था, न कि अन्य ऐसी कई बंदरगाहो में से एक, जैसा कि आईओसी ने कहा है। आईओसी में सरकारी उपक्रम भारतीय जीवन बीमा निगम 9,400 करोड़ रुपए के मूल्य की 8.3 फीसदी हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख शेयरधारक है, और अडानी पोर्ट्स और एसईजेड में यह 1,130 करोड़ रुपए के मूल्य की 9.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख शेयरधारक भी है। सरकारी शेयरधारकों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार व्यापक जांच (ड्यू डिलीजेंस) नदारद क्यों है? आईओसी शेयरधारकों के हितों के संरक्षण की निगरानी कौन कर रहा है?

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