कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी (तस्वीर क्रेडिट@SabhapatiM30191)

दिल्ली में कांग्रेस की 10 लाख लोगों की रैली टालने की माँग,व्यापारियों ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र; दीपावली के कारोबार पर असर की जताई आशंका

नई दिल्ली,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की 10 लाख लोगों की महारैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। राजधानी के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की माँग की है। संगठन का कहना है कि 1 नवंबर को रैली आयोजित होने से दीपावली के त्योहारी कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि रैली को दीपावली के बाद 10 या 11 नवंबर को आयोजित किया जाए,ताकि बाजारों में खरीदारी और माल की आवाजाही प्रभावित न हो। सीटीआई ने यह भी कहा है कि यदि रैली की तारीख बदलना संभव नहीं है तो कार्यक्रम का स्थान रामलीला मैदान से बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए।

सीटीआई के मुताबिक,संगठन इससे पहले भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी को तीन बार पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। हालाँकि,अब तक इस संबंध में कोई समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में व्यापारियों ने सोनिया गांधी से हस्तक्षेप करने की अपील की है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी कांग्रेस की रैली का विरोध नहीं कर रहे हैं,बल्कि त्योहारी मौसम में अपनी आजीविका और कारोबार को बचाने के लिए कार्यक्रम की तारीख बदलने का अनुरोध कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली है। इन त्योहारों से पहले 1 नवंबर बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है,क्योंकि इसी दौरान दुकानदारों और ग्राहकों की गतिविधियाँ तेज रहती हैं। ऐसे समय में यदि 10 लाख लोगों के साथ 15 से 20 हजार वाहन मध्य दिल्ली पहुँचते हैं,तो व्यापारिक गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। सीटीआई का दावा है कि इस दौरान दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में प्रतिदिन होने वाला 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार ठप पड़ने की आशंका है।

व्यापारियों ने अपने पत्र में रैली के आयोजन से जुड़ी चार बड़ी व्यावहारिक चुनौतियों का उल्लेख किया है। इनमें सबसे प्रमुख समस्या वाहनों की पार्किंग और यातायात प्रबंधन की है। सीटीआई का कहना है कि रामलीला मैदान में 200 बड़ी बसों को खड़ा करने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहीं,10 लाख लोगों को रैली स्थल तक पहुँचाने के लिए करीब 15 हजार से 20 हजार बसों, कारों और टेंपो की आवश्यकता पड़ सकती है।

संगठन के अनुसार,इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के आने पर मध्य दिल्ली की प्रमुख सड़कों और बाजारों के आसपास पार्किंग का दबाव बढ़ जाएगा। जेएलएन मार्ग,बहादुर शाह जफर मार्ग,नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट, चाँदनी चौक रोड और आसपास के व्यस्त इलाकों में वाहनों की कतारें लग सकती हैं। इन सड़कों और बाजारों के आसपास उपलब्ध जगह इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के लिए पर्याप्त नहीं होगी। सीटीआई ने आशंका जताई है कि इससे सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली में यातायात पूरी तरह बाधित हो सकता है और लोगों को चक्का जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

सीटीआई ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के लगभग पाँच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार मौजूद हैं। इनमें से कई बाजारों का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है और यहाँ से देश के अलग-अलग हिस्सों में सामान की आपूर्ति होती है। इन बाजारों में चाँदनी चौक,सदर बाजार,कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस,खारी बावली,कश्मीरी गेट,नया बाजार और लाजपत राय मार्केट शामिल हैं।

इसके अलावा चावड़ी बाजार,किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज जैसे व्यापारिक इलाके भी इस क्षेत्र में आते हैं। इन बाजारों में दीपावली से पहले खरीदारी और थोक व्यापार की गतिविधियाँ तेज रहती हैं। ऐसे में सड़कों पर आवाजाही बाधित होने से दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों और माल की आपूर्ति करने वाले कारोबारियों को भी परेशानी हो सकती है।

दिल्ली के इन बाजारों का कारोबार केवल स्थानीय ग्राहकों पर निर्भर नहीं है। यहाँ रोजाना बड़ी मात्रा में माल पहुँचता है और फिर उसे देश के विभिन्न शहरों तथा राज्यों में भेजा जाता है। सीटीआई के अनुसार,नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग पाँच हजार ट्रक और टेंपो इन बाजारों तक सामान पहुँचाते हैं।

वहीं,बाजारों से करीब तीन हजार ट्रक रोजाना माल लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लगभग 25 शहरों की ओर रवाना होते हैं। इसके अलावा देश के दूसरे राज्यों में भी सामान भेजा जाता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि रैली के कारण प्रमुख सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई तो माल की आपूर्ति और वितरण की पूरी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसका नुकसान केवल दिल्ली के व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि दूसरे शहरों के कारोबारियों और ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है।

सीटीआई ने आशंका जताई है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी शुरुआत एक दिन पहले यानी 31 अक्टूबर से ही हो सकती है। संगठन के अनुसार,रैली में शामिल होने वाले लोगों की बसें और अन्य वाहन 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर जैसे दिल्ली के प्रमुख बॉर्डर पर पहुँचने शुरू हो सकते हैं। इसके बाद शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग जैसे रास्तों पर बैरिकेडिंग की जा सकती है।

व्यापारियों का कहना है कि कई ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही माल लेकर दिल्ली की ओर वाहन भेजने में असमर्थता जता रहे हैं। यदि परिवहन कंपनियाँ पहले से ही गाड़ियाँ भेजना बंद कर देती हैं तो बाजारों में सामान की आपूर्ति प्रभावित होगी। इसका सीधा असर त्योहारी खरीदारी और दुकानों के कारोबार पर पड़ सकता है। ऐसे में व्यापारियों के अनुसार समस्या रैली वाले दिन से पहले ही शुरू हो सकती है।

सीटीआई ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया है। संगठन के मुताबिक,उस दिन करीब पाँच से सात हजार लोग पहुँचे थे,लेकिन इसके बावजूद मध्य दिल्ली में लगभग आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। व्यापारियों का तर्क है कि जब इतने कम लोगों के आने पर इतनी लंबी अवधि तक जाम की स्थिति बनी थी तो 10 लाख लोगों की प्रस्तावित रैली के दौरान यातायात और व्यापार पर पड़ने वाले असर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

व्यापारियों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली माँग है कि 1 नवंबर को होने वाली रैली को दीपावली के बाद 10 या 11 नवंबर को आयोजित किया जाए। इससे धनतेरस और दीपावली के दौरान बाजारों में होने वाला कारोबार प्रभावित होने से बच सकता है। सीटीआई का कहना है कि तारीख में बदलाव से राजनीतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो सकेगा और व्यापारियों को त्योहारी सीजन में नुकसान की आशंका भी कम होगी।

दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित तारीख पर ही आयोजित करनी है,तो इसका स्थान बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए। सीटीआई के अनुसार,बुराड़ी मैदान में लगभग 15 हजार वाहनों की पार्किंग के लिए जगह उपलब्ध है। इससे रामलीला मैदान और मध्य दिल्ली के आसपास की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।

फिलहाल कांग्रेस की ओर से इन मांगों पर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। व्यापारियों को उम्मीद है कि सोनिया गांधी उनके अनुरोध पर ध्यान देंगी और रैली के आयोजन को लेकर ऐसा फैसला लिया जाएगा,जिससे राजनीतिक कार्यक्रम और व्यापारिक गतिविधियाँ दोनों प्रभावित न हों। अब सबकी नजर कांग्रेस नेतृत्व के रुख पर है।