प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (तस्वीर क्रेडिट@prasannabjym)

‘आपकी योजनाओं की कॉपी करता हूँ’,राष्ट्रपति प्रबोवो ने पीएम मोदी की जमकर की तारीफ,बोले- भारत से सीखने में कोई संकोच नहीं

जकार्ता,7 जुलाई (युआईटीवी)- भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई मजबूती देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरे के दौरान एक ऐसा क्षण सामने आया,जिसने न केवल दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को उजागर किया,बल्कि भारत के विकास मॉडल को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही स्वीकार्यता की भी झलक दिखाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने खुलकर भारत की विकास यात्रा,मोदी सरकार की योजनाओं और उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वह भारत की कई योजनाओं की “कॉपी” करते हैं,क्योंकि करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले मॉडल को अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी पर समारोह में मौजूद सभी अतिथि मुस्कुरा उठे और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।

राजकीय भोज के दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर देखते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय से उनके राजनीतिक सफर को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि भारत ने जिन चुनौतियों का सामना करते हुए विकास का रास्ता तय किया है, वह इंडोनेशिया जैसे देशों के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए वह उनमें से कई योजनाओं को अपने देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस हल्के-फुल्के लेकिन अर्थपूर्ण बयान ने वहाँ मौजूद सभी मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया और माहौल तालियों तथा ठहाकों से भर गया।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के सामने कई समान प्रकार की चुनौतियाँ हैं। दोनों देशों की आबादी विशाल है,दोनों की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और दोनों प्राकृतिक आपदाओं जैसी समस्याओं से भी जूझते हैं। इसके बावजूद भारत ने जिस प्रकार विकास,आधारभूत ढाँचे,कृषि सुधार,डिजिटल परिवर्तन और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं,वह अन्य विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश की नीति करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है,तो उसे अपनाने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने हाल ही में भारत आए इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनका एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल दो से तीन सप्ताह तक भारत के अध्ययन दौरे पर रहा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न राज्यों और संस्थानों का दौरा कर भारतीय कृषि पद्धतियों,विशेष रूप से शुष्क और बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने की तकनीकों का अध्ययन किया। उन्होंने विशेष रूप से परमाकल्चर आधारित भारतीय मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तकनीक इंडोनेशिया के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार इन तरीकों का गंभीरता से अध्ययन कर रही है और भारत के अनुभवों से सीखकर उन्हें अपने देश में लागू करने की दिशा में काम कर रही है।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी दूसरे देश के सफल अनुभवों से सीखना कमजोरी नहीं,बल्कि दूरदर्शिता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नीति लोगों के जीवन स्तर में सुधार ला सकती है,तो उसे अपनाने में किसी प्रकार का अहंकार या संकोच नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान को भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते सहयोग और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडो-पैसिफिक मिशन के तहत सोमवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर इंडोनेशिया पहुँचे थे। राजधानी में उनके आगमन पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं हवाई अड्डे पर पहुँचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई यह आत्मीयता इस बात का संकेत थी कि दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान व्यापार,निवेश,रक्षा सहयोग,समुद्री सुरक्षा,डिजिटल प्रौद्योगिकी,स्वास्थ्य,शिक्षा,ऊर्जा और कृषि सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के लिए भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

इस राजकीय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और सम्मानजनक क्षण तब आया,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को मजबूत बनाने,क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया। इस सम्मान को दोनों देशों के गहरे होते संबंधों और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विकास यात्रा की खुलकर की गई सराहना ने यह संकेत दिया है कि भारतीय विकास मॉडल अब केवल देश तक सीमित नहीं रहा,बल्कि विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता सहयोग,साझा चुनौतियों के समाधान की दिशा में अनुभवों का आदान-प्रदान और रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।