वाशिंगटन,28 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के प्रमुख निर्यात केंद्र कॉर्पस क्रिस्टी में एक संबोधन के दौरान वेनेजुएला के साथ नए तेल समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के “ऐतिहासिक पुनरुद्धार” का संकेत बताया और दावा किया कि उनके प्रशासन की नीतियों ने अमेरिका को फिर से वैश्विक ऊर्जा शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। कॉर्पस क्रिस्टी बंदरगाह पर आयोजित कार्यक्रम में ट्रंप ने ऊर्जा उत्पादन,निर्यात और ईंधन की कीमतों में कमी को अपनी नीतियों की सफलता के प्रमाण के तौर पर पेश किया।
अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि सत्ता में लौटते ही उन्होंने ऊर्जा नीति पर तेजी से कदम उठाए। उन्होंने बताया कि पद सँभालने के पहले ही दिन राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया गया। ट्रंप ने टेक्सास के ऊर्जा श्रमिकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उनसे “ड्रिलिंग करते रहने” का आह्वान किया था और आज उसके नतीजे सामने हैं। उन्होंने कॉर्पस क्रिस्टी को दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यात केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि यहाँ से हो रहा विस्तार अमेरिका की नई ऊर्जा रणनीति का प्रतीक है।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके शपथ ग्रहण के बाद से अमेरिकी तेल उत्पादन में प्रतिदिन छह लाख बैरल की वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस उत्पादन भी अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। ईंधन की कीमतों को लेकर उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया और कहा कि कॉर्पस क्रिस्टी में पेट्रोल की कीमत लगभग 2.30 डॉलर प्रति गैलन तक गिर गई है। उन्होंने हाल की एक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि कहीं कीमत 1.99 डॉलर और कहीं 1.85 डॉलर तक देखी गई। उनके मुताबिक,यह सब ऊर्जा नीति में बदलाव का प्रत्यक्ष परिणाम है।
भाषण का मुख्य केंद्र वेनेजुएला के साथ नया समझौता रहा। ट्रंप ने अपने बाईं ओर खड़े एक टैंकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसमें इस समय वेनेजुएला का 3,60,000 बैरल कच्चा तेल भरा हुआ है। उन्होंने वेनेजुएला को “नया मित्र और साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित में यह समझौता किया गया है। उनके अनुसार,वेनेजुएला का तेल अमेरिका और विशेष रूप से टेक्सास में रिफाइन किया जाएगा और फिर वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह व्यवस्था दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इससे अमेरिकी ऊर्जा उद्योग को नई मजबूती मिलेगी।
ट्रंप ने कॉर्पस क्रिस्टी बंदरगाह के विस्तार का श्रेय अपने पहले कार्यकाल के दौरान किए गए संघीय निवेश को दिया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने नहर को गहरा करने और बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण संघीय फंडिंग को मंजूरी दी थी। उनके मुताबिक,इस निवेश के बाद निजी कंपनियों ने हजारों नई नौकरियाँ पैदा की हैं और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पोर्ट कॉर्पस क्रिस्टी के एसेट मैनेजमेंट निदेशक जेसी रॉबिन्सन ने भी इस अवसर को “ऐतिहासिक क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे में किए गए संघीय निवेश ने बंदरगाह की क्षमता को बढ़ाया है और इससे ग्राहकों को बेहतर सेवा देने में मदद मिली है। उनके अनुसार,यह विकास न केवल टेक्सास,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में ऊर्जा आपूर्ति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपना “खुद का बिजली संयंत्र” स्थापित करना चाहिए,ताकि वे स्थानीय समुदायों की बिजली आपूर्ति पर दबाव न डालें। ट्रंप ने इसे “अनिवार्य” बताते हुए कहा कि अमेरिका को भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए ऊर्जा स्वतंत्रता बनाए रखनी होगी।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सीमा गश्ती परिषद के अध्यक्ष पॉल पेरेज ने भी राष्ट्रपति की प्रशंसा की। उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप इस देश के इतिहास के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति हैं और उनकी नीतियों ने अमेरिका को आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।
हालाँकि,ट्रंप के दावों और ऊर्जा नीति पर उनके रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस भी तेज हो गई है। समर्थक इसे अमेरिकी ऊर्जा स्वतंत्रता और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं,जबकि आलोचकों का कहना है कि वेनेजुएला के साथ समझौता भू-राजनीतिक दृष्टि से जटिल है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार किया जाना चाहिए। वे यह भी सवाल उठाते हैं कि वैश्विक तेल बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई कारकों पर निर्भर करते हैं,जिनमें अंतर्राष्ट्रीय माँग,उत्पादन कटौती और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं।
कॉर्पस क्रिस्टी में दिया गया यह भाषण ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका ऊर्जा नीति,जलवायु परिवर्तन और वैश्विक बाजारों में अपनी भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा के दौर से गुजर रहा है। ट्रंप ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता घरेलू उत्पादन बढ़ाना,निर्यात क्षमता का विस्तार करना और ईंधन की कीमतों को कम रखना है। उन्होंने इसे अमेरिकी श्रमिकों और उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया कदम बताया।
वेनेजुएला के साथ नया तेल समझौता,बंदरगाह का विस्तार और उत्पादन वृद्धि के दावे आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में चर्चा का विषय बने रहेंगे। फिलहाल ट्रंप प्रशासन इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है,जबकि विपक्ष और विश्लेषक इसके प्रभावों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। कॉर्पस क्रिस्टी से दिया गया यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि ऊर्जा नीति ट्रंप के एजेंडे का केंद्रीय हिस्सा बनी रहेगी और वे इसे आर्थिक पुनरुद्धार के प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करते रहेंगे।
