वाशिंगटन,26 मई (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से वैश्विक राजनीति के केंद्र में खुद को लाकर खड़ा कर दिया है। इस बार उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों पर तीखी आलोचना की है। ट्रंप ने यह दावा किया कि अगर वह अमेरिका के राष्ट्रपति होते,तो रूस और यूक्रेन के बीच यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है,जब रूस ने यूक्रेन पर घातक हवाई हमले किए हैं,जिनमें कई मासूम नागरिकों की जान चली गई,जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पुतिन के खिलाफ तीखे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने लिखा कि “मेरे और व्लादिमीर पुतिन के बीच हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं,लेकिन अब लगता है कि वह पूरी तरह से पागल हो गए हैं। वह बेवजह लोगों को मार रहे हैं और ये केवल सैनिक नहीं हैं। शहरों पर मिसाइल और ड्रोन अंधाधुंध गिराए जा रहे हैं।” ट्रंप का यह बयान रूस के हालिया हमले के बाद आया है, जिसमें यूक्रेन के ज़ाइटॉमिर क्षेत्र में 8 और 12 साल के दो बच्चों और एक 17 साल के किशोर की जान चली गई।
यह पहली बार नहीं है,जब ट्रंप ने पुतिन के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं,लेकिन इस बार उनका लहजा अधिक तीखा और चिंताजनक था। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पुतिन यूक्रेन के केवल एक हिस्से से संतुष्ट नहीं हैं,बल्कि वह पूरा यूक्रेन चाहते हैं। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर रूस ऐसा करता है,तो उसका खुद का पतन हो सकता है।
ट्रंप ने सिर्फ पुतिन को ही नहीं,बल्कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को भी नहीं बख्शा। उन्होंने जेलेंस्की की हालिया बयानबाजी पर सवाल उठाए,जिसमें जेलेंस्की ने कहा था कि अमेरिका की चुप्पी ने पुतिन को और आक्रामक बना दिया है। ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,”जेलेंस्की अपने देश का भला नहीं कर रहे हैं। उनके मुँह से निकलने वाली हर बात समस्याएँ बढ़ा रही है। मुझे यह पसंद नहीं और इसे बंद करना होगा।”
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अगर वह राष्ट्रपति होते,तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। यह बयान 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले उनके राजनीतिक एजेंडे और अंतर्राष्ट्रीय नीति को लेकर उनके दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
ट्रंप ने युद्ध की जिम्मेदारी से खुद को पूरी तरह अलग करते हुए कहा,”यह युद्ध बाइडन,पुतिन और जेलेंस्की का है,ट्रंप का नहीं। मैं केवल इस भयावह आग को बुझाने की कोशिश कर रहा हूँ,जो अक्षमता और नफरत से पैदा हुई है।” यह टिप्पणी दर्शाती है कि ट्रंप आने वाले चुनावों में खुद को शांति का दूत और प्रभावशाली नेता के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं।
हालिया हमलों के मद्देनजर ट्रंप ने यह भी कहा कि वह रूस पर सख्त प्रतिबंधों के पक्ष में हैं। हालाँकि,यह रुख अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान से थोड़ा विपरीत है। रुबियो ने कांग्रेस को जानकारी दी थी कि ट्रंप फिलहाल किसी भी नए प्रतिबंध की धमकी से बचना चाहते हैं,क्योंकि इससे रूस वार्ता से और दूर हो सकता है। इस मतभेद से स्पष्ट होता है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी रूस को लेकर मतभेद हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था,जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किया। इस युद्ध ने अब तक हजारों नागरिकों की जान ले ली है और लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया है। हाल ही में दोनों देशों के बीच कैदियों की बड़ी अदला-बदली हुई थी,जिसमें करीब 1,000 कैदी रिहा किए गए,लेकिन इस सकारात्मक कदम के तुरंत बाद हुए घातक हमलों ने शांति की उम्मीदों को एक बार फिर कमजोर कर दिया है।
ट्रंप की ये टिप्पणियाँ स्पष्ट रूप से उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा भी हैं। वह खुद को जो बाइडन से बेहतर विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं,खासकर अंतर्राष्ट्रीय मामलों में। पुतिन और जेलेंस्की को ‘गलत निर्णय लेने वाले नेता’ बताकर ट्रंप अमेरिका की भूमिका को निर्णायक साबित करना चाहते हैं।
उनका यह कहना कि “अगर मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध शुरू ही नहीं होता,” यह दर्शाता है कि वह अपनी छवि एक ऐसे नेता की बनाना चाहते हैं,जो मुश्किल समय में भी संतुलन बनाए रख सके। हालाँकि,उनके आलोचक मानते हैं कि ट्रंप की यह टिप्पणी केवल एक राजनीतिक स्टंट है,जिसका उद्देश्य 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए माहौल बनाना है।
डोनाल्ड ट्रंप की ये तीखी और आक्रामक टिप्पणियाँ न केवल अमेरिका की विदेश नीति पर असर डालती हैं,बल्कि वैश्विक राजनीति में भी हलचल मचा देती हैं। पुतिन को ‘पागल’ कहना,जेलेंस्की को ‘समस्या पैदा करने वाला’ बताना और खुद को ‘एकमात्र समाधान’ के रूप में पेश करना,यह सब ट्रंप की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
वहीं,रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की भयावहता लगातार बढ़ती जा रही है। मासूम बच्चों की मौत,बर्बाद होते शहर और युद्ध से थके नागरिक अब दुनिया से ठोस समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में नेताओं की बयानबाजी से ज्यादा जरूरी है, शांति की दिशा में ठोस और ईमानदार पहल।
ट्रंप ने खुद को उस पहल का हिस्सा बताया है,लेकिन क्या उनका तरीका समाधान का रास्ता दिखाएगा या फिर राजनीति की धुंध में खो जाएगा,यह आने वाला समय तय करेगा।
