कांगो में इबोला संकट गहराया (तस्वीर क्रेडिट@sakshamkauzhik)

कांगो में इबोला संकट गहराया,सीमा बंद होने से बढ़ी चिंता,डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की

किगाली,18 मई (युआईटीवी)- अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का बढ़ता प्रकोप अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का कारण बनता जा रहा है। संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों और मौतों के बीच पड़ोसी देश रवांडा ने बड़ा कदम उठाते हुए कांगो से लगने वाली अपनी सीमा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह फैसला वायरस के तेजी से फैलने की आशंका को देखते हुए लिया गया है। सीमा बंद होने से दोनों देशों के बीच आवाजाही और व्यापार पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

रवांडा के पश्चिमी प्रांत स्थित रुबावु जिले में रविवार को यह निर्णय लागू किया गया। अधिकारियों के अनुसार गोमा और रुबावु-गिसेनी को जोड़ने वाली सीमा को अनिश्चित समय के लिए बंद किया गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से एहतियात के तौर पर उठाया गया है,ताकि संक्रमण को सीमा पार फैलने से रोका जा सके।

रुबावु जिले के मेयर प्रॉस्पर मुलिंडवा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गोमा और गिसेनी को जोड़ने वाली सीमाओं को इबोला प्रकोप के कारण अस्थायी रूप से बंद किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन लगातार लोगों को इस फैसले की वजह समझाने की कोशिश कर रहा है,ताकि आम जनता में घबराहट न फैले और लोग प्रशासन का सहयोग करें।

उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह फैसला समुदायों को संभावित संक्रमण से बचाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए,तो संक्रमण तेजी से दूसरे क्षेत्रों में भी फैल सकता है।

हालांकि सीमा बंद कर दी गई है,लेकिन दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को लेकर विशेष स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारी उन रवांडा नागरिकों की जांच कर रहे हैं,जो कांगो से लौट रहे हैं। वहीं कांगो के नागरिकों को भी सख्त स्वास्थ्य जाँच के बाद अपने देश लौटने की अनुमति दी जा रही है। सीमा क्षेत्रों में मेडिकल टीमों और निगरानी दलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

इबोला के इस नए प्रकोप ने पूरे अफ्रीकी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार,कांगो में अब तक इस प्रकोप के कारण 87 लोगों की मौत हो चुकी है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यह संक्रमण “बुंडीबुग्यो” स्ट्रेन से जुड़ा हुआ है,जिसके लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे अधिक खतरनाक मान रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक,इबोला वायरस का यह स्ट्रेन तेजी से फैलने की क्षमता रखता है और यदि समय पर संक्रमण की पहचान तथा नियंत्रण नहीं किया गया,तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। कांगो के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएँ पहले से ही दबाव में हैं,जिससे संक्रमण को नियंत्रित करना और कठिन हो गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने रविवार को घोषणा की कि कांगो और युगांडा में फैल रहा यह इबोला प्रकोप अब “अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति” बन चुका है। डब्ल्यूएचओ की यह घोषणा इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर इस संक्रमण को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हुआ है। हालाँकि,संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति को महामारी की श्रेणी में नहीं रखा गया है,लेकिन संक्रमण का दायरा और उसके फैलने की गति चिंताजनक है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कांगो और युगांडा की सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने कहा कि इन देशों ने जोखिम के बारे में पारदर्शिता बनाए रखी है,जिससे अन्य देशों को समय रहते तैयारी करने का अवसर मिला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता और शुरुआती चेतावनी किसी भी संक्रामक बीमारी से निपटने में बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि संक्रमण की जानकारी समय पर साझा न की जाए,तो वायरस सीमाओं को पार कर बड़े पैमाने पर फैल सकता है। डब्ल्यूएचओ ने इसी कारण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सतर्क रहने और समन्वित कार्रवाई करने की अपील की है।

इबोला वायरस दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में से एक माना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार,कमजोरी,उल्टी,दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। यदि समय पर इलाज न मिले,तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

कांगो में इससे पहले भी कई बार इबोला के प्रकोप सामने आ चुके हैं। देश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था,सीमित संसाधन और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी संक्रमण को नियंत्रित करने में बड़ी चुनौती बनती रही है। इस बार भी स्वास्थ्य एजेंसियाँ गाँवों और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

रवांडा की सीमा बंद करने के फैसले का सामाजिक और आर्थिक असर भी देखने को मिल सकता है। गोमा और गिसेनी के बीच रोजाना हजारों लोग व्यापार,काम और अन्य जरूरतों के लिए आवाजाही करते हैं। सीमा बंद होने से स्थानीय कारोबार और आम लोगों की जिंदगी प्रभावित होने की आशंका है। हालाँकि,प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अफ्रीकी देशों ने मिलकर त्वरित और समन्वित कदम नहीं उठाए,तो संक्रमण दूसरे देशों तक भी फैल सकता है। यही वजह है कि कई देशों ने अपने स्वास्थ्य निगरानी तंत्र को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।

फिलहाल दुनिया की नजर कांगो और उसके पड़ोसी देशों की स्थिति पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य एजेंसियाँ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि उठाए गए कदम इबोला के इस नए प्रकोप को नियंत्रित करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।