वाशिंगटन,1 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए तैयार हैं,भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला न हो सके। यह जानकारी एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में सामने आई है,जिसने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार,ट्रंप प्रशासन का मानना है कि दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति वाले इस समुद्री मार्ग को जबरन खोलने की कोशिश युद्ध को और लंबा खींच सकती है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल इस मुद्दे को प्राथमिक सैन्य लक्ष्य बनाने के बजाय संघर्ष को सीमित रखने और उसे जल्द समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह रणनीति इस बात का संकेत देती है कि अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश कर रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि ट्रंप ने अपने अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है कि अमेरिका को अपने मुख्य सैन्य उद्देश्यों पर ध्यान देना चाहिए। इनमें ईरान की नौसेना को कमजोर करना,उसके मिसाइल स्टॉक को कम करना और उसके रक्षा ढाँचे को नुकसान पहुँचाना शामिल है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के बाद ही अमेरिका संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
हालाँकि,इस रणनीति के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका चाहता है कि तेहरान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया जाए,ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए व्यापार के सामान्य प्रवाह को बहाल करे। इसके लिए वाशिंगटन अपने यूरोपीय और खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं,तो अमेरिका अपने सहयोगी देशों पर इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए आगे आने का दबाव बना सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का सार्वजनिक रुख अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं दिखाई दे रहा है। जहाँ एक ओर वह संघर्ष समाप्त करने की बात कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर उन्होंने हाल ही में कड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कोई समझौता नहीं हुआ,तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बुनियादी ढाँचे जैसे इलेक्ट्रिक प्लांट,तेल के कुओं और खार्ग आइलैंड को निशाना बना सकता है। यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अपनी कूटनीतिक कोशिशों के साथ-साथ सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को भी मजबूत किया है। रिपोर्ट के अनुसार,यूएसएस त्रिपोली और 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। इसके अलावा, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कुछ हिस्से भी यहाँ पहुँच चुके हैं। इन तैनातियों का उद्देश्य संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयारी करना और क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को बनाए रखना है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिका लगभग 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है। यह कदम इस बात का संकेत है कि भले ही अमेरिका संघर्ष समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा हो,लेकिन वह किसी भी संभावित स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।
इस बीच,ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी गंभीर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए एक जटिल और चुनौतीपूर्ण मिशन पर विचार कर रहे हैं। यह कदम अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है,जिसका उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को सीमित करना है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सामान्य शिपिंग को बहाल करने की दिशा में काम कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मार्ग को खोलना अमेरिका के मुख्य सैन्य उद्देश्यों में शामिल नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है और वह अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राथमिकता दे रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की यह नई रणनीति “कंट्रोल्ड एस्केलेशन” यानी नियंत्रित तनाव बढ़ाने की नीति को दर्शाती है। इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना है,लेकिन स्थिति को पूरी तरह युद्ध में बदलने से बचाना भी है। यह संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है,लेकिन अमेरिका इसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह रणनीति बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है और ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह रुख यह दर्शाता है कि अमेरिका अब संघर्ष को सीमित रखने और उसे जल्द समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है,लेकिन साथ ही वह अपने सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खुला रखे हुए है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर यह टकराव एक नए मोड़ पर पहुँचता है।
