प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ ने मचाई तबाही,पीएम मोदी ने जताई चिंता,हर संभव मदद का दिया आश्वासन

नई दिल्ली,3 जून (युआईटीवी)- पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश और बाढ़ के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है,कई स्थानों पर भूस्खलन,जलभराव और डूबने की घटनाएँ सामने आई हैं। इन आपदाओं के चलते अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है,जबकि हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।

इन हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम,सिक्किम और मणिपुर जैसे प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें न केवल हालात की समीक्षा में सहयोग देने की बात कही,बल्कि केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला से टेलीफोन पर बात कर बारिश और बाढ़ से उत्पन्न हालात की जानकारी ली और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह से राज्य सरकारों के साथ खड़ी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए केंद्र सरकार की तमाम एजेंसियाँ,विशेष रूप से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ,पूर्ण सक्रियता के साथ काम करेंगी। साथ ही,उन्होंने आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन भी भेजे जाने आश्वासन दिया।

इस आपदा को लेकर राजनीतिक नेतृत्व भी सजग नजर आया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और पार्टी के कार्यकर्ताओं को राहत कार्यों में लगने के निर्देश दिए।

उन्होंने लिखा, “पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में लगातार भारी बारिश हो रही है,जिससे प्रभावित लोगों के लिए बहुत चिंतित हूँ। मैंने भाजपा की राज्य इकाइयों और कार्यकर्ताओं को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की सलाहों का पालन करें।”

इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पहले ही सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। रविवार को ही उन्होंने असम,अरुणाचल प्रदेश,सिक्किम और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों और राज्यपाल से फोन पर बातचीत कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया था।

आपदा प्रबंधन विभागों के अनुसार,29 मई से लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के कारण अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है,जिसमें असम में 10 मौतें,अरुणाचल प्रदेश में 9 मौतें,मेघालय में 6 मौतें,मिजोरम में 6 मौतें,त्रिपुरा में 2 मौतें,नागालैंड में 1 मौत होने की जानकारी मिली है।

इन सभी मौतों के पीछे मुख्य कारण डूबना,भूस्खलन और जलभराव रहे हैं। कई क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था ठप है,सड़कें कट चुकी हैं और गाँवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट चुका है।

राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू किए हैं। एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं,जो नावों और हेलीकॉप्टर की मदद से फँसे हुए लोगों को निकाल रही हैं। राहत शिविरों में खाद्य सामग्री,पीने का पानी,दवाइयाँ और कंबल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

असम,अरुणाचल प्रदेश,मेघालय और मिजोरम के कई जिलों में स्कूलों को अस्थायी राहत केंद्र में बदला गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी सक्रिय हैं,ताकि जलजनित बीमारियों पर नियंत्रण रखा जा सके।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी दी है कि अगले 2-3 दिनों तक पूर्वोत्तर के राज्यों में और अधिक बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में रेड अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है।

मौसम विभाग ने लोगों से नदी किनारे न जाने,पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी की गई चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

पूर्वोत्तर भारत में इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर दिखा दिया है कि जलवायु परिवर्तन और असामयिक वर्षा किस तरह संवेदनशील इलाकों को गंभीर संकट में डाल सकते हैं। हालाँकि,राहत की बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हैं और आम जन की सुरक्षा को सर्वोपरि मान रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी,अमित शाह और जे.पी. नड्डा की संवादात्मक और सक्रिय भूमिका इस बात का संकेत है कि केंद्र राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर आपदा की घड़ी में राज्यों के साथ खड़ा है।

अब ज़रूरत है कि इस राहत अभियान को तेजी और समन्वय के साथ आगे बढ़ाया जाए,ताकि जनहानि को रोका जा सके और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित जीवन की ओर वापस लौटाया जा सके।