डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

होर्मुज तनाव के बीच ईरान पर ट्रंप की सख्ती की चेतावनी,दक्षिण कोरिया पर भी भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति

वाशिंगटन,20 अगस्त (युआईटीवी)- होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर परिस्थितियाँ बिगड़ती हैं,तो अमेरिका के पास तेहरान पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाने की क्षमता मौजूद है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को पहले की तुलना में कम बताया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन बढ़ने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग विकसित होने के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर वैश्विक निर्भरता पहले जैसी नहीं रही है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से ईरान के खिलाफ संभावित नए कदमों को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ऐसे उपाय मौजूद हैं,जिनके जरिए ईरान पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इन प्रतिबंधों को काफी कड़ा किया जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका की ओर से किस तरह के नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और उनका दायरा कितना व्यापक होगा।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास बहुत कड़े प्रतिबंध लगाने की क्षमता है और अब आगे की परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन फिलहाल स्थिति के विकास का इंतजार कर रहा है,लेकिन तेहरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के विकल्प खुले रखे गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बड़ी बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकती है,इसलिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नजर इस क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए लंबे समय से इसकी अहम भूमिका रही है। फारस की खाड़ी के आसपास के तेल उत्पादक देशों से निकलने वाले जहाजों के लिए यह प्रमुख मार्ग है। ऐसे में यहाँ तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है,जिसका असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

हालाँकि,ट्रंप ने इस जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को कम करके पेश किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है और वहाँ से बड़ी संख्या में जहाज गुजर रहे हैं। उनका कहना था कि इस गतिविधि की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं हो रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भविष्य में जहाजों की आवाजाही में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन उन्होंने मौजूदा स्थिति को लेकर ज्यादा चिंता जाहिर नहीं की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि बदलती वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था के कारण होर्मुज अब उतना महत्वपूर्ण नहीं रह जाएगा,जितना पहले माना जाता था। उन्होंने अमेरिका के बढ़ते ऊर्जा उत्पादन और नए आपूर्ति मार्गों को इसका प्रमुख कारण बताया। ट्रंप के इस बयान को इस रूप में देखा जा रहा है कि अमेरिका संभावित रूप से होर्मुज में किसी भी व्यवधान के आर्थिक प्रभाव को सीमित करने की अपनी क्षमता पर भरोसा कर रहा है।

इसी बातचीत के दौरान ट्रंप ने दक्षिण कोरिया पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा में मदद माँगी थी,लेकिन दक्षिण कोरिया ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रुख पर असंतोष जताते हुए कहा कि उन्हें दक्षिण कोरिया का जवाब पसंद नहीं आया।

ट्रंप के अनुसार,दक्षिण कोरिया की ओर से यह कहा गया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की मदद करने में दिलचस्पी नहीं रखता। ट्रंप ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण कोरिया का करीब 60 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आता है। इसी आधार पर ट्रंप ने कहा कि सियोल का इस मार्ग की सुरक्षा में सहयोग नहीं करना उन्हें स्वीकार्य नहीं लगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दक्षिण कोरिया के रुख को केवल होर्मुज तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कोरियाई प्रायद्वीप पर होने वाले सैन्य अभ्यासों से भी जोड़ दिया। ट्रंप ने कहा कि वह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे और ऐसे समय में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करना उन्हें उचित नहीं लगता।

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं,जिन्हें दोनों देश अपनी सुरक्षा और सैन्य तैयारी के लिए जरूरी बताते हैं। दूसरी ओर,उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तौर पर देखता रहा है। ट्रंप ने अपने बयान में इसी संवेदनशील स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे सैन्य अभ्यास उनके द्वारा किम जोंग-उन के साथ संबंध सुधारने की कोशिशों के अनुकूल नहीं थे।

जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर वह उत्तर कोरिया के नेता के साथ फिर से बातचीत शुरू करते हैं,तो क्या परमाणु निरस्त्रीकरण अभी भी उनका लक्ष्य रहेगा,तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि वह इस विषय पर बात नहीं करना चाहते। हालाँकि,उन्होंने किम जोंग-उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को अच्छा बताया।

ट्रंप ने कहा कि किम जोंग-उन के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने अपने और उत्तर कोरियाई नेता के संबंधों की तुलना पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के साथ किम के संबंधों से करते हुए कहा कि उनके बीच व्यक्तिगत तालमेल ने स्थिति को अलग दिशा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके इस व्यक्तिगत संबंध ने अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगी देशों को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाया है।

ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच व्यक्तिगत कूटनीति पहले भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है। दोनों नेताओं के बीच सीधे संवाद और मुलाकातों ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद पैदा की थी। हालाँकि,परमाणु निरस्त्रीकरण और प्रतिबंधों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेदों के कारण बातचीत निर्णायक परिणाम तक नहीं पहुँच सकी।

अब ट्रंप के ताजा बयान में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि वह उत्तर कोरिया के साथ संबंधों में अपने व्यक्तिगत संपर्क को महत्वपूर्ण मानते हैं। हालाँकि,उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अपने मौजूदा लक्ष्य पर स्पष्ट स्थिति बताने से परहेज किया। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संभावित बातचीत का एजेंडा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

वहीं,होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप के बयान का व्यापक असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नए प्रतिबंधों की चेतावनी और होर्मुज के महत्व को कम बताने की कोशिश ऐसे समय में सामने आई है,जब दुनिया की नजर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर टिकी हुई है। किसी भी संभावित सैन्य या सुरक्षा संकट से तेल परिवहन प्रभावित होने पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।

दूसरी ओर,दक्षिण कोरिया को लेकर ट्रंप की नाराजगी अमेरिका और उसके प्रमुख एशियाई सहयोगियों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर भी सवाल खड़े करती है। दक्षिण कोरिया की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से पूरा होता है,जबकि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा लंबे समय से अमेरिका के साथ सैन्य साझेदारी पर निर्भर रही है। ऐसे में होर्मुज की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच अपेक्षाओं में अंतर भविष्य की बातचीत में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

कुल मिलाकर,ट्रंप के ताजा बयान में ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को कम करके आंकने का प्रयास और दक्षिण कोरिया के रुख पर नाराजगी तीनों प्रमुख रूप से सामने आए हैं। साथ ही उत्तर कोरिया के साथ व्यक्तिगत संबंधों को लेकर ट्रंप का भरोसा भी उनके बयान का अहम हिस्सा रहा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका वास्तव में किस तरह के नए प्रतिबंध लागू करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है।