भजन क्लबिंग में युवाओं के बीच पहुँचे पीएम मोदी (तस्वीर क्रेडिट@AmitAgarwalBJP)

भजन क्लबिंग में युवाओं के बीच पहुँचे पीएम मोदी,खंजरी बजाकर भक्ति संगीत का लिया आनंद

नई दिल्ली,26 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार शाम दिल्ली में एक अलग अंदाज देखने को मिला। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री युवाओं के बीच पहुँचे और भक्ति संगीत का आनंद लिया। कार्यक्रम के दौरान वह दर्शकों के बीच पहली पंक्ति में बैठे नजर आए। मंच पर कलाकार भक्ति गीत प्रस्तुत कर रहे थे,जबकि प्रधानमंत्री तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाते और खंजरी बजाते दिखाई दिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे और पारंपरिक भक्ति संगीत को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया।

प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम की झलक सोशल मीडिया पर भी साझा की। उन्होंने कार्यक्रम का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “क्या इसे देखते हुए आपने अपने पैर थपथपाए?” प्रधानमंत्री के इस अंदाज के बाद ‘भजन क्लबिंग’ को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यह ऐसा प्रारूप है,जिसमें पारंपरिक भजनों और कीर्तनों को आधुनिक संगीत,मंचीय प्रस्तुति और युवाओं के बीच लोकप्रिय कार्यक्रम शैली के साथ पेश किया जाता है। इस तरह के आयोजनों में भक्ति संगीत को पारंपरिक धार्मिक आयोजन से अलग एक सामूहिक संगीत अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर किया गया था। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुँचने के बाद वहाँ मौजूद युवाओं के बीच उत्साह देखने को मिला। मंच पर गायक और संगीतकार भक्ति गीत प्रस्तुत कर रहे थे और प्रधानमंत्री दर्शकों के बीच बैठकर प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। भक्ति गीतों के दौरान उन्होंने तालियां बजाईं और खंजरी की धुन पर कलाकारों का साथ दिया। कार्यक्रम में भक्ति संगीत को आधुनिक प्रस्तुति शैली के साथ जोड़ा गया था,जिससे पारंपरिक गीतों के साथ युवा माहौल भी देखने को मिला।

‘भजन क्लबिंग’ पिछले कुछ समय में युवाओं के बीच उभरती हुई संगीत शैली के रूप में चर्चा में आया है। इसमें भजन,कीर्तन और मंत्र जैसे पारंपरिक धार्मिक संगीत को आधुनिक धुनों और कॉन्सर्ट जैसे माहौल के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक भक्ति संगीत को युवाओं की पसंद और आधुनिक संगीत संस्कृति के अनुरूप प्रस्तुत करना है। इस प्रारूप में संगीत के साथ रोशनी,मंचीय प्रस्तुति और सामूहिक भागीदारी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए आयोजक भक्ति संगीत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में शामिल होने से पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में दीनदयाल उपाध्याय को राष्ट्र सेवा का सच्चा अनुयायी बताते हुए उनके अंत्योदय के विचार का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय समाज के सबसे निचले तबके के व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे और उनका अंत्योदय दर्शन आज भी जनकल्याण से जुड़े प्रयासों के लिए प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने तथा सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराने का आह्वान भी किया। इसके बाद शाम को आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी ने दिनभर चल रहे जयंती कार्यक्रमों में सांस्कृतिक और संगीत का एक अलग आयाम जोड़ दिया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। वह भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारक के रूप में भी उनकी पहचान रही। उन्होंने संगठनात्मक और वैचारिक गतिविधियों के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। वर्ष 1940 के दशक में उन्होंने ‘राष्ट्र धर्म’ नामक मासिक पत्रिका शुरू की थी। उनके राजनीतिक और सामाजिक विचारों में अंत्योदय की अवधारणा को प्रमुख स्थान प्राप्त था।

उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिकता का मेल देखने को मिला। एक ओर कार्यक्रम में भक्ति गीतों और कीर्तनों की प्रस्तुति हुई,वहीं दूसरी ओर युवाओं की भागीदारी और आधुनिक संगीत शैली ने इसे सामान्य धार्मिक आयोजन से अलग रूप दिया। प्रधानमंत्री का युवाओं के बीच बैठकर कार्यक्रम का हिस्सा बनना भी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।

प्रधानमंत्री पहले भी युवाओं के बीच भक्ति संगीत के इस नए प्रारूप का उल्लेख कर चुके हैं। इस तरह के आयोजनों में युवा पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत के साथ सुनते और सामूहिक रूप से उसमें भाग लेते हैं। इससे भक्ति संगीत को नए श्रोताओं तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम इसी प्रवृत्ति का एक उदाहरण रहा, जहां दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर भक्ति,संगीत और युवा सहभागिता एक साथ दिखाई दी।

शुक्रवार शाम का यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों से अलग एक सांस्कृतिक अवसर के रूप में भी सामने आया। दर्शकों के बीच बैठकर भक्ति गीत सुनना, तालियाँ बजाना और खंजरी बजाना उनके इस कार्यक्रम में सहज सहभागिता को दर्शाता रहा। वहीं आयोजन के जरिए पारंपरिक भक्ति संगीत को आधुनिक प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं के बीच पहुँचाने का प्रयास भी दिखाई दिया। दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी और भक्ति संगीत के बदलते स्वरूप को भी सामने रखा।