ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (तस्वीर क्रेडिट@Nexo_Latino)

शी जिनपिंग के रुख का ईरान ने किया स्वागत,पेजेश्कियन बोले- समझौते पर लौटकर बातचीत आगे बढ़ाने को तैयार

तेहरान,26 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया है। पेजेश्कियन ने शी जिनपिंग के उस रुख की सराहना की,जिसमें उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान ईरान-अमेरिका के बीच हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर लौटने और बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान भी संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने के दृष्टिकोण का समर्थन करता है और पहले से तय प्रतिबद्धताओं के सम्मान के साथ गंभीर वार्ता आगे बढ़ाने के लिए जरूरी परिस्थितियाँ तैयार करने पर जोर देता है।

पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विचारशील और जिम्मेदार समर्थन की सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति ने इस्लामाबाद समझौता-पत्र पर लौटने और बातचीत तथा कूटनीति के जरिए मतभेदों को हल करने की बात कही है। पेजेश्कियन के अनुसार,ईरान भी इसी दृष्टिकोण को साझा करता है। उन्होंने समझौते पर वापस लौटने,पहले से तय वादों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने तथा गंभीर, ठोस और नतीजे देने वाली बातचीत के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बनाने के महत्व पर जोर दिया।

यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। दोनों देशों के बीच तनाव का एक अहम मुद्दा जून में हुए समझौते के क्रियान्वयन को लेकर है। ईरान लगातार इस समझौते को बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का आधार मान रहा है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करता है तो वह भी समझौते के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। दूसरी ओर,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर सार्वजनिक रूप से कड़ा रुख अपनाया है और दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बनी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। चीन लंबे समय से ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के कारण क्षेत्रीय मामलों में प्रभाव रखने वाला देश है। ऐसे में शी जिनपिंग की ओर से समझौते पर लौटने और कूटनीति के जरिए मतभेदों को सुलझाने की अपील को ईरान ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। पेजेश्कियन का ताजा बयान यह बताता है कि तेहरान सैन्य तनाव के बीच बातचीत के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। हालाँकि,ईरान का जोर इस बात पर है कि बातचीत समान परिस्थितियों में हो और पहले से तय प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाए।

पेजेश्कियन इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भी ईरान की स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा था कि ईरान आतंकवाद का समर्थक नहीं,बल्कि आतंकवाद और आक्रामकता का शिकार है। उन्होंने कहा था कि ईरान पर युद्ध थोपा गया है और देश अपनी रक्षा करने का अधिकार बनाए रखेगा। पेजेश्कियन ने साथ ही यह भी कहा कि ईरान शांति हासिल करने के लिए बातचीत और कूटनीति से पीछे नहीं हटेगा।

संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान पेजेश्कियन ने ईरान की रक्षा क्षमता और देश की संप्रभुता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने लोगों और देश की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दबाव और धमकी की भाषा में बातचीत स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक,ईरान बातचीत के लिए तैयार है,लेकिन किसी भी वार्ता को आपसी सम्मान और संप्रभु अधिकारों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

ईरानी राष्ट्रपति का यह रुख उनके हालिया बयानों से भी जुड़ा हुआ है,जिनमें उन्होंने एक तरफ अमेरिका के साथ अविश्वास की स्थिति का उल्लेख किया है,जबकि दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है। तेहरान की ओर से यह संकेत दिया जाता रहा है कि सैन्य दबाव के बीच भी कूटनीतिक समाधान की संभावना खत्म नहीं हुई है। हालाँकि,इसके लिए ईरान अमेरिकी पक्ष से पहले की प्रतिबद्धताओं को लागू करने की अपेक्षा करता है।

इस बीच क्षेत्रीय स्तर पर भी कई देश अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल करने के प्रयास किए हैं। ईरान की ओर से समझौते पर लौटने की इच्छा जताए जाने के बाद अब चीन के रुख ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया को एक और आयाम दिया है। हालांकि, समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं और केवल बयानबाजी से किसी अंतिम समाधान तक पहुँचना संभव नहीं है।

फिलहाल पेजेश्कियन का शी जिनपिंग के रुख का स्वागत करना यह संकेत देता है कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन जुटाने के साथ-साथ अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना भी बनाए रखना चाहता है। तेहरान का जोर समझौते पर लौटने, प्रतिबद्धताओं का पालन करने और परिणाम देने वाली बातचीत पर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस अपील पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों पक्ष पुराने समझौते के ढांचे को आधार बनाकर आगे की बातचीत के लिए कोई साझा रास्ता तलाश पाते हैं।