वाशिंगटन,10 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बहस छेड़ दी है। इस बार मुद्दा नोबेल शांति पुरस्कार है,जिसे लेकर ट्रंप ने खुलकर कहा है कि उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए। उनका दावा है कि उन्होंने दुनिया के कई बड़े और खतरनाक संघर्षों को न केवल सुलझाया,बल्कि ऐसे युद्धों को भी रोका जो किसी भी वक्त विनाशकारी रूप ले सकते थे। इनमें भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को टालना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि चाहे लोग उन्हें पसंद करें या न करें,लेकिन सच्चाई यह है कि उनके कार्यकाल में कई ऐसे संघर्ष खत्म हुए या थमे,जिनके बारे में पहले यह माना जा रहा था कि उनका समाधान संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने यह सब बिना बड़े सैन्य अभियानों और युद्ध छेड़े किया,बल्कि कूटनीति,दबाव और सीधी बातचीत के जरिए हालात को सँभाला।
ट्रंप ने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि लोग मुझे पसंद करें,लेकिन सच्चाई यह है कि मैंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं।” उनके मुताबिक,इनमें से कई संघर्ष 25 से लेकर 36 साल तक चले आ रहे थे। उन्होंने कहा कि ये ऐसे विवाद थे,जो दशकों से जमे हुए थे और जिन पर दुनिया लगभग हार मान चुकी थी। ट्रंप का दावा है कि उनकी रणनीति ने इन जटिल हालात को बदल दिया।
दक्षिण एशिया का जिक्र करते हुए ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात को अपनी सबसे अहम कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह इलाका दुनिया के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में से एक माना जाता है,क्योंकि यहाँ दो परमाणु संपन्न देश आमने-सामने हैं। ट्रंप के मुताबिक,उस समय हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हो रहा था और विमानों को गिराया जा चुका था। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते दखल न दिया जाता,तो यह तनाव एक बड़े युद्ध में बदल सकता था।
ट्रंप ने कहा, “यह संकट बहुत तेजी से शांत हुआ और सबसे अहम बात यह रही कि इसमें परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ।” उन्होंने इसे अपनी नीति की सबसे बड़ी जीत बताया। उनके अनुसार,परमाणु हथियारों वाले देशों के बीच टकराव को रोकना किसी भी नेता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है,क्योंकि ऐसी स्थिति में नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
उन्होंने दावा किया कि इस हस्तक्षेप के जरिए लाखों लोगों की जान बचाई गई। ट्रंप ने कहा, “मैंने इसे बिना परमाणु हथियारों के,बिना लंबा युद्ध छेड़े कर दिखाया। मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है।” उनके अनुसार,अगर बचाई गई जानों की संख्या को देखा जाए,तो यह अपने आप में नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य है।
ट्रंप ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के एक सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद यह बात स्वीकार की थी कि ट्रंप की पहल से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टल गया और कम-से-कम एक करोड़ लोगों की जान बची। ट्रंप ने कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यहाँ आए थे और उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान से जुड़े कम-से-कम 10 मिलियन लोगों की जान बचाई है।”
ट्रंप के मुताबिक, उनकी विदेश नीति का मूल मंत्र लंबे समय तक चलने वाले युद्धों के बजाय सीधी बातचीत और दबाव बनाकर समाधान निकालना रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया ने पहले ऐसे कई उदाहरण देखे हैं,जहाँ युद्ध सालों तक चलते रहे,हजारों-लाखों लोग मारे गए और अंत में फिर बातचीत की मेज पर ही समाधान निकला। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने इस प्रक्रिया को उलट दिया और पहले ही बातचीत के जरिए टकराव को रोक दिया।
अपने बयान में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी जिक्र किया,जिन्हें राष्ट्रपति बनने के कुछ ही समय बाद नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ओबामा को खुद भी नहीं पता कि उन्हें वह पुरस्कार क्यों दिया गया। उन्होंने कहा कि वे पुरस्कार के पीछे नहीं भागते,लेकिन अगर रिकॉर्ड और उपलब्धियों के आधार पर देखा जाए,तो उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए।
ट्रंप ने कहा, “अगर कोई नेता युद्ध रोकता है,अगर वह बड़े संघर्षों को खत्म करता है,तो सैद्धांतिक रूप से उसे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।” हालाँकि,उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे शेखी नहीं बघार रहे हैं और उनके लिए सबसे अहम बात पुरस्कार नहीं,बल्कि लोगों की जान बचाना है।
अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनके प्रयासों की तारीफ की थी। ट्रंप के अनुसार,पुतिन ने उनसे कहा था कि जिन युद्धों को वे खुद दस साल में नहीं रोक पाए,उन्हें ट्रंप ने खत्म कर दिया। ट्रंप ने इस टिप्पणी को अपनी कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बताया।
यह बयान ऐसे समय में आया है,जब ट्रंप अपनी विदेश नीति को लेकर लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन युद्ध,ईरान से जुड़े तनाव और मध्य पूर्व के हालात को लेकर उनकी रणनीति पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि उनकी नीति का मकसद लंबे सैन्य अभियानों से बचना और संघर्षों को बढ़ने से पहले ही रोकना है।
उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों वाले देशों के बीच तनाव को रोकना सबसे जरूरी होता है,क्योंकि एक छोटी सी चूक भी पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा सकती है। ट्रंप के अनुसार,उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हालात उस मुकाम तक न पहुँचें,जहाँ से वापसी मुश्किल हो जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ नोबेल शांति पुरस्कार की दावेदारी भर नहीं है,बल्कि यह उनकी विदेश नीति का बचाव भी है। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी कूटनीति आक्रामक दिख सकती है,लेकिन उसका मकसद युद्ध टालना और ताकत के दम पर शांति कायम करना है।
हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के कई दावे विवादित रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके कदमों को हमेशा सकारात्मक नजर से नहीं देखा गया। इसके बावजूद,ट्रंप अपने रिकॉर्ड को लेकर आश्वस्त नजर आते हैं। उनका कहना है कि इतिहास उनके कामों का सही मूल्यांकन करेगा।
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि वे अपनी उपलब्धियों को लेकर खुलकर बात करने से नहीं हिचकते। यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और नोबेल समिति उनके दावों को किस नजर से देखती है,लेकिन फिलहाल ट्रंप यह साफ कर चुके हैं कि उनके मुताबिक,उन्होंने दुनिया को कई बड़े युद्धों से बचाया है और यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
