नकवी से ट्रॉफी विवाद पर बीसीसीआई सचिव ने दी सफाई (तस्वीर क्रेडिट@tejutandel12)

भारत ने जीता महिला एशिया कप 2026,नकवी से ट्रॉफी विवाद पर बीसीसीआई सचिव ने दी सफाई

दुबई,14 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को फाइनल मुकाबले में एकतरफा अंदाज में हराकर महिला एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी और प्रभावी गेंदबाजी के दम पर श्रीलंका को 72 रनों से मात दी। हालाँकि,खिताबी जीत के बाद ट्रॉफी समारोह को लेकर भी चर्चा हुई। भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया और मोहसिन नकवी मैच के दौरान एक ही स्थान पर नजर आए। अब सैकिया ने इस मुलाकात और ट्रॉफी विवाद को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

देवजीत सैकिया ने बताया कि मैच के दौरान उनका मोहसिन नकवी से मिलना किसी विशेष घटना का हिस्सा नहीं था,बल्कि यह एक सामान्य औपचारिकता थी। उनके मुताबिक,वह टॉस से लेकर मुकाबला खत्म होने तक रॉयल बॉक्स में अपनी सीट पर मौजूद थे। मैच के दौरान कई लोग वहाँ आए और उनसे मुलाकात की। इसी दौरान मोहसिन नकवी भी वहाँ पहुँचे और कुछ समय के लिए उनके पास बैठे।

सैकिया ने बताया कि मैच के दौरान राजीव शुक्ला भी उनके साथ आकर बैठे थे। इसके बाद एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी भी वहाँ पहुँचे और डिप्टी चेयरमैन खालिद के पास बैठ गए। सैकिया के अनुसार,रॉयल बॉक्स में मौजूद लोगों से मिलना और बातचीत करना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने साफ किया कि नकवी से उनकी मुलाकात को किसी विशेष राजनीतिक या क्रिकेट संबंधी घटनाक्रम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

बीसीसीआई सचिव ने कहा कि भारतीय क्रिकेट की ओर से किसी व्यक्ति से मिलने या बातचीत करने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि मैच के दौरान जो भी व्यक्ति वहाँ आया,उनसे बातचीत हुई। ऐसे में मोहसिन नकवी का वहाँ आना भी उसी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबले पर पूरा ध्यान था और टीम की जीत ही सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य था।

ट्रॉफी समारोह को लेकर उठे विवाद पर भी देवजीत सैकिया ने खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष की ओर से इस मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास किया गया था,लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हो सकी। इसके बावजूद बीसीसीआई को इस बात का कोई पछतावा नहीं है। उनका कहना था कि भारतीय टीम के लिए सबसे अहम बात मैदान पर प्रदर्शन करना और खिताब जीतना था,जिसमें टीम पूरी तरह सफल रही।

फाइनल मुकाबले की बात करें तो भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार शुरुआत की। टीम ने निर्धारित 20 ओवर में पाँच विकेट खोकर 183 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। भारतीय पारी में शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों सलामी बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और टीम को बड़े स्कोर की नींव दी।

शेफाली वर्मा ने महज 39 गेंदों में 68 रनों की आक्रामक पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ-साथ शानदार टाइमिंग भी देखने को मिली। दूसरी ओर स्मृति मंधाना ने भी 39 गेंदों पर 59 रन बनाकर भारतीय पारी को मजबूती दी। दोनों के बीच हुई साझेदारी ने श्रीलंका की गेंदबाजी को पूरी तरह दबाव में ला दिया। भारतीय बल्लेबाजों ने पावरप्ले से ही रन गति तेज रखी और बाद के ओवरों में भी स्कोर को लगातार आगे बढ़ाया।

183 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। टीम के बल्लेबाज नियमित अंतराल पर विकेट गंवाते रहे और लक्ष्य से काफी दूर रह गए। पूरी श्रीलंकाई टीम 111 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने 72 रनों से मुकाबला जीतकर खिताब पर कब्जा कर लिया।

भारतीय गेंदबाजी में श्री चरणी ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने चार विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं दीप्ति शर्मा ने भी तीन विकेट हासिल किए और विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। दोनों गेंदबाजों के प्रदर्शन के कारण श्रीलंका की बल्लेबाजी बिखर गई और टीम लक्ष्य तक पहुँचने में नाकाम रही।

भारत की इस जीत में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला। पहले बल्लेबाजों ने 183 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और इसके बाद गेंदबाजों ने श्रीलंका को 111 रन पर समेटकर मुकाबला पूरी तरह भारत के पक्ष में कर दिया। पूरे मैच में भारतीय टीम ने शुरुआत से अंत तक दबदबा बनाए रखा।

खिताब जीतने के साथ भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर एशियाई क्रिकेट में अपनी मजबूती साबित की। हालाँकि,मैदान के बाहर ट्रॉफी समारोह को लेकर चर्चा जरूर रही, लेकिन बीसीसीआई सचिव के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय पक्ष का मुख्य ध्यान मुकाबला जीतने पर था। देवजीत सैकिया ने भी यही बात दोहराई कि ट्रॉफी कौन देगा,यह उनके लिए प्राथमिक मुद्दा नहीं था। भारतीय टीम का लक्ष्य मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करना था और टीम ने शानदार जीत के साथ इस लक्ष्य को हासिल कर लिया।