कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक पर पार्किंग कर्मचारी ने किया लोहे की रॉड से हमला (तस्वीर क्रेडिट@DharamvirNews)

कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक पर पार्किंग कर्मचारी ने किया लोहे की रॉड से हमला,सिर में गंभीर चोट और हाथ में फ्रैक्चर का आरोप

गुरुग्राम,14 सितंबर (युआईटीवी)- हरियाणा के गुरुग्राम में कारगिल युद्ध के एक पूर्व सैनिक ने पार्किंग कर्मचारी पर लोहे की रॉड से हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन अमित कुमार गुप्ता का दावा है कि मैग्नम ग्लोबल पार्क में पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद एक कर्मचारी ने उन पर लोहे की रॉड से दो बार हमला किया। उनके अनुसार,एक वार उनके हाथ पर और दूसरा सिर पर किया गया,जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि हमलावर ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

अमित कुमार गुप्ता 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना के ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में शामिल रहे थे। उन्होंने पुलिस में दर्ज शिकायत में घटना से संबंधित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हमले के बाद उन्हें स्थानीय पुलिस से समय पर पर्याप्त मदद नहीं मिली। उन्होंने अस्पताल में तैयार की गई चिकित्सा-कानूनी मामले यानी एमएलसी रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस रिपोर्ट में उनके सिर से खून बहने और कोहनी में लगी गंभीर चोट का सही तरीके से उल्लेख नहीं किया गया।

गुप्ता के मुताबिक,यह घटना गुरुवार रात करीब आठ बजे हुई। वह अपने परिवार के साथ मैग्नम ग्लोबल पार्क स्थित गोंजो रेस्टोरेंट में रात का खाना खाने पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट के पास अपने परिवार को उतारने के बाद वह अपनी कार पार्क करने के लिए जगह तलाशने गए। यहीं से पार्किंग को लेकर विवाद शुरू हुआ।

गुप्ता ने आरोप लगाया कि पार्किंग कर्मचारियों ने उन्हें बार-बार अलग-अलग जगहों पर वाहन ले जाने के लिए कहा। कभी उन्हें वैलेट पार्किंग की ओर भेजा गया, तो कभी बेसमेंट और बहुमंजिला पार्किंग सुविधा में जाने को कहा गया। उनके अनुसार,काफी देर तक अलग-अलग जगहों पर भेजे जाने के बाद भी उनकी कार पार्क नहीं कराई गई। उन्होंने दावा किया कि आखिरकार पार्किंग कर्मचारियों ने उनकी गाड़ी पार्क करने से इनकार कर दिया।

सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार,जब वह अपनी कार को पीछे करने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक पार्किंग अटेंडेंट ने उनकी गाड़ी की विंडशील्ड पर प्रहार किया। गुप्ता का आरोप है कि कर्मचारी का यह व्यवहार ऐसा था,जिससे उन्हें लगा कि वह जानबूझकर उनकी कार को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद उन्होंने आपत्ति जताने के लिए अपनी कार से बाहर निकलने का फैसला किया।

गुप्ता के मुताबिक,कार से बाहर निकलने के बाद विवाद तेजी से बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्किंग कर्मचारी ने लोहे की एक रॉड उठा ली और उन पर हमला कर दिया। गुप्ता के अनुसार,कर्मचारी ने पहले उनके हाथ पर लोहे की रॉड से वार किया और इसके बाद उनके सिर पर हमला किया। उन्होंने दावा किया कि हमले में उन्हें काफी खून बहा और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

पूर्व वायुसेना अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावर ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उनका कहना है कि घटनास्थल पर सुरक्षा गार्ड और अन्य पार्किंग कर्मचारी मौजूद थे,लेकिन इसके बावजूद तत्काल किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। गुप्ता के मुताबिक, जिस समय उन पर हमला हुआ,उस दौरान वह खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें सँभलने का भी पर्याप्त मौका नहीं मिला।

घटना के बाद पुलिस की मदद लेने के लिए उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क किया। हालाँकि,गुप्ता का दावा है कि शिकायत करने के बावजूद पुलिसकर्मी करीब 30 मिनट तक मौके पर नहीं पहुँचे। उन्होंने पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर असंतोष जताया और कहा कि एक घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता की जरूरत थी। इस दौरान स्थिति को और गंभीर होने से रोकने में रेस्टोरेंट के एक शेफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। गुप्ता के अनुसार,शेफ ने बीच-बचाव किया और विवाद को आगे बढ़ने से रोका।

इसके बाद गुप्ता को इलाज के लिए एम्बुलेंस से मेदांता अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि हमले के कारण उनके सिर और कोहनी में गंभीर चोटें आईं। उनकी कोहनी की चोट इतनी गंभीर थी कि सर्जरी करनी पड़ी। उनके अनुसार,घायल हड्डी को स्थिर करने और जोड़ने के लिए प्लेटों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इस घटना को अचानक हुआ हमला बताया और कहा कि उन्होंने किसी तरह की ऐसी स्थिति पैदा नहीं की थी,जिससे उनके ऊपर इस तरह का हमला किया जाए।

गुप्ता ने अस्पताल की चिकित्सा-कानूनी रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एमएलसी में सिर से खून बहने और कोहनी की गंभीर चोट का सही विवरण दर्ज नहीं किया गया। उनका कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट किसी भी आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है,इसलिए चोटों का सही रिकॉर्ड होना जरूरी है। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जाँच करने और चिकित्सकीय रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी की भी जाँच कराने की माँग की है।

पूर्व सैनिक ने आरोपी पार्किंग कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पुलिस से हत्या के प्रयास और गंभीर चोट पहुँचाने जैसी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि हमला जिस तरीके से किया गया, उसमें उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने यह भी माँग की है कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जाँच की जाए,ताकि विवाद और हमले की पूरी घटना सामने आ सके।

इस मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि शिकायतकर्ता भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का हिस्सा रहे हैं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण हवाई अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य कारगिल क्षेत्र में भारतीय ठिकानों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों को पीछे हटाने में थल सेना की मदद करना था। ऊँचाई वाले दुर्गम इलाकों में चलाए गए इस अभियान में भारतीय वायु सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

गुप्ता ने अपने सैन्य अनुभव का जिक्र करते हुए इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उनके अनुसार,सार्वजनिक स्थान पर पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद इस स्तर तक पहुँच गया कि उन पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता तो घटना के परिणाम और गंभीर हो सकते थे।

घटना को लेकर अब पुलिस की जाँच महत्वपूर्ण होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जाँच के दौरान की जानी बाकी है। पुलिस के सामने सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान,पार्किंग कर्मचारियों से पूछताछ और अस्पताल के चिकित्सा रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य अहम हो सकते हैं। इन सभी पहलुओं की जाँच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस तरह शुरू हुआ और हमले की पूरी घटना किन परिस्थितियों में हुई।

फिलहाल,सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पुलिस से न केवल हमले के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की है,बल्कि घटना के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया और मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज चोटों की भी जाँच कराने का आग्रह किया है। मामले में सामने आने वाले पुलिस और चिकित्सकीय जाँच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।