भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई का सर्वोच्च सम्मान (तस्वीर क्रेडिट@rishi171256)

भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई का सर्वोच्च सम्मान,विमान को हाईजैक होने से बचाकर दिखाई थी बहादुरी

अबू धाबी,28 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को उनकी असाधारण बहादुरी और यात्रियों की जान बचाने के साहसिक प्रयास के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने सम्मानित किया है। फ्लाईदुबई की एक उड़ान को हाईजैक होने से बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले कैप्टन मच्छार समेत विमान के अन्य चालक दल के सदस्यों को प्रथम श्रेणी के प्रतिष्ठित ‘ऑर्डर ऑफ जायद द्वितीय’ से नवाजा गया है। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने चालक दल के सदस्यों को इस सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उस घटना के बाद दिया गया है,जिसमें विमान के सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन मच्छार पर हमला कर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी।

दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने चालक दल को यह सम्मान प्रदान किया। दुबई मीडिया कार्यालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की। संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व ने चालक दल के सदस्यों की तत्परता,जिम्मेदारी और पेशेवर दक्षता की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस सम्मान के जरिए संकट की घड़ी में अपनी जिम्मेदारी निभाने और लोगों की जान बचाने के लिए चालक दल के साहस को मान्यता दी गई है।

सम्मान दिए जाने के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ने विमान के चालक दल के सदस्यों से मुलाकात की। इस अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नेतृत्व ने विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चालक दल द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की।

कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि उन्होंने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हार नहीं मानी और विमान को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास जारी रखे। घटना के दौरान पैदा हुए खतरे के बीच उनकी भूमिका ने यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को स्थिति सँभालने का अवसर दिया। विमान को सुरक्षित हवाई अड्डे तक पहुँचाने और संभावित बड़े हादसे को टालने में चालक दल की सामूहिक कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हुई।

यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी। विमान दुबई से इजरायल के तेल अवीव की ओर जा रहा था। इसी दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस अप्रत्याशित घटना से विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया।

संयुक्त अरब अमीरात के अभियोजकों की जाँच के अनुसार,आरोपी की कथित मंशा विमान को इजरायल के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त करने और बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान पहुँचाने की थी। जाँच से जुड़े इन आरोपों ने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया। हालाँकि,आरोपी की मंशा से संबंधित जानकारी अभियोजकों के निष्कर्षों के रूप में सामने आई है।

हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी कैप्टन मच्छार ने स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश नहीं छोड़ी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद विमान में मौजूद चालक दल के अन्य सदस्यों और यात्रियों ने हस्तक्षेप किया और कथित हमलावर को काबू में करने में मदद की। संकट के दौरान सभी ने मिलकर हालात को सँभालने का प्रयास किया।

घटना के बाद विमान को उसके निर्धारित गंतव्य की ओर ले जाने के बजाय सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की तरफ मोड़ दिया गया। वहाँ विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। इस तरह एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया और विमान में सवार यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों की जान बच गई।

इस घटना ने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और चालक दल की आपातकालीन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता के महत्व को भी सामने रखा। उड़ान के दौरान किसी अप्रत्याशित हमले या खतरे से निपटना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसी स्थिति में पायलटों को सीमित समय के भीतर यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने पड़ते हैं। कैप्टन मच्छार और चालक दल के अन्य सदस्यों ने कठिन परिस्थितियों में मिलकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप विमान को सुरक्षित उतारा जा सका।

घटना के बाद दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने अस्पताल में कैप्टन मच्छार से मुलाकात की थी। उन्होंने पायलट के साहस और मानव जीवन की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उस समय भी कैप्टन मच्छार के प्रयासों को लेकर संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व की ओर से प्रशंसा व्यक्त की गई थी।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन मच्छार की बहादुरी की सराहना की थी। उनकी भूमिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और यह मामला विमान में यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए असाधारण प्रयासों के रूप में चर्चा में आया।

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कैप्टन मच्छार के स्वस्थ होने के बाद उन्हें देश के नागरिक वीरता सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है। इससे स्पष्ट है कि इस घटना में उनके साहस और जिम्मेदारी को कई देशों के नेतृत्व ने सराहा है।

संयुक्त अरब अमीरात की ओर से दिया गया ‘ऑर्डर ऑफ जायद द्वितीय’ कैप्टन मच्छार और विमान के अन्य चालक दल सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सम्मान है। यह सम्मान उस कठिन परिस्थिति में उनके योगदान को रेखांकित करता है,जब विमान और उसमें सवार लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। कैप्टन मच्छार ने घायल होने के बावजूद अपना धैर्य बनाए रखा और अन्य लोगों के साथ मिलकर विमान को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई। उनकी बहादुरी ने न केवल यात्रियों की जान बचाने में मदद की,बल्कि संकट की स्थिति में कर्तव्यनिष्ठा और साहस का उदाहरण भी पेश किया।