बगदाद,29 जून (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में लगातार बदलते घटनाक्रम के बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इराक की राजधानी में इराकी राष्ट्रपति निजार अमेदी और प्रधानमंत्री अली अल-जैदी से अलग-अलग मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात,ईरान-अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन और भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। इन बैठकों में क्षेत्रीय स्थिरता,समुद्री सुरक्षा, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और युद्ध की स्थिति को टालने जैसे अहम मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
इराक के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार,राष्ट्रपति निजार अमेदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान केवल संवाद और आपसी समझ के जरिए ही संभव है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रहा है,ऐसे में सभी पक्षों को ऐसी ठोस और टिकाऊ समझ विकसित करनी चाहिए,जो केवल तत्काल तनाव कम करने तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में भी शांति और स्थिरता की मजबूत नींव रख सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबित विवादों को सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से सुलझाना ही सभी देशों के हित में होगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने इसके बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इराक की नीति युद्ध और टकराव को समाप्त करने तथा क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम करने की रही है। उन्होंने कहा कि यदि देशों के बीच मतभेद बातचीत के माध्यम से दूर किए जाते हैं,तो इससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास,निवेश और लोगों की खुशहाली के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इराक भविष्य में भी ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करेगा,जो क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने में सहायक हों।
बैठक के दौरान सैयद अब्बास अराघची ने भी इराक की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में विभिन्न संकटों को नियंत्रित करने और संवाद का माहौल बनाने में इराक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार,तेहरान अपने अरब पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में इराक के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा भी व्यक्त की।
इन बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया था। अमेरिका ने शुक्रवार और शनिवार को ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी पक्ष का कहना था कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ईरान की ओर से लगातार बढ़ती गतिविधियों के जवाब में की गई। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर बढ़ा दिया और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार को लेकर चिंता पैदा कर दी।
हालाँकि,सैन्य टकराव के बीच अब दोनों देशों ने कूटनीतिक रास्ता अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को कम करने और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कतर की राजधानी दोहा में वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी है।
बताया जा रहा है कि इस वार्ता में दोनों पक्ष जहाजों की सुरक्षित आवाजाही,समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में किसी भी तरह की सैन्य गलतफहमी से बचने के उपायों पर चर्चा करेंगे। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं,ताकि व्यापारिक जहाज बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें। साथ ही तकनीकी स्तर पर बातचीत का सिलसिला भी जारी रहेगा,जिससे दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्रगति हो सके।
जानकारी के अनुसार,मूल रूप से अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी और उसका मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे थे,लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में अचानक बढ़े तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े नए घटनाक्रमों को देखते हुए बातचीत का स्थान बदलकर कतर की राजधानी दोहा कर दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल दोनों देशों के लिए समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता परमाणु मुद्दे जितनी ही महत्वपूर्ण बन चुकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहाँ किसी भी प्रकार का तनाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि उसका असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार,वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका,ईरान,खाड़ी देशों और अन्य वैश्विक शक्तियों की नजर इस क्षेत्र की सुरक्षा पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोहा में होने वाली बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है,तो इससे न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम हो सकता है,बल्कि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करने का भी रास्ता खुल सकता है। वहीं इराक की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरती दिखाई दे रही है।
फिलहाल सभी की निगाहें दोहा में प्रस्तावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि यह बातचीत सफल रहती है तो पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने,समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने और क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने की संभावना मजबूत हो सकती है। वहीं यदि वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है,तो क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियाँ पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
