मोहसिन रेजाई (तस्वीर क्रेडिट@SitioAlManar)

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने मोहसिन रेजाई को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया

तेहरान,10 अगस्त (युआईटीवी)- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा होसैनी खामेनेई ने पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है,जब ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दे बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव,अमेरिका के साथ संबंधों में जारी खींचतान और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अनुभवी सैन्य अधिकारी की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक पोस्ट में मोहसिन रेजाई को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने रेजाई के लंबे प्रशासनिक और सैन्य अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बहुमूल्य अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। सर्वोच्च नेता ने रेजाई को ईरान-इराक युद्ध के दौरान चले आठ वर्षीय ‘पवित्र रक्षा’ अभियान के शुरुआती कमांडरों में से एक बताया।

आधिकारिक आदेश रविवार को जारी किया गया। इस आदेश में मोजतबा खामेनेई ने रेजाई के अनुभव और लंबे समय तक देश की सुरक्षा व्यवस्था में निभाई गई भूमिका की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि रेजाई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे और अपने कार्यकाल में उल्लेखनीय सफलता हासिल करेंगे। सर्वोच्च नेता ने उन्हें देश की सेवा में समर्पित रहने की कामना भी की।

इस नियुक्ति की जानकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी ने भी दी है। एजेंसी के अनुसार,आधिकारिक आदेश में रेजाई को 1980 के दशक में हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों में शामिल बताया गया है। ईरान में उस युद्ध को ‘पवित्र रक्षा’ के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध 1980 से 1988 तक चला था और आधुनिक ईरानी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य घटनाओं में गिना जाता है।

मोहसिन रेजाई का ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में लंबा अनुभव रहा है। वह 1981 से 1997 तक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कमांडर रहे। इस दौरान उन्होंने ईरान की सैन्य रणनीति और सुरक्षा नीति के महत्वपूर्ण दौर में संगठन का नेतृत्व किया। उनके लंबे सैन्य अनुभव और ईरान की सुरक्षा संरचना की गहरी समझ को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आईआरजीसी के नेतृत्व के बाद भी रेजाई ईरान की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में वह एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के सदस्य हैं और सुप्रीम काउंसिल फॉर इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन के सचिव के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस तरह सैन्य क्षेत्र के साथ-साथ प्रशासनिक और आर्थिक मामलों का उनका अनुभव भी व्यापक है।

सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में रेजाई की नियुक्ति को ईरान की सुरक्षा नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह परिषद ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े प्रमुख मामलों के समन्वय का काम करती है। देश के संवेदनशील रणनीतिक फैसलों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परिषद में सरकार,सेना,खुफिया एजेंसियों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की औपचारिक अध्यक्षता ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन करते हैं। हालाँकि,परिषद में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के जरिए सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों में सर्वोच्च नेतृत्व की रणनीतिक प्राथमिकताओं को परिषद के निर्णयों में शामिल किया जाता है।

रेजाई की नियुक्ति से पहले इस पद की जिम्मेदारी मोहम्मद बागेर जोलघाद्र के पास थी। आधिकारिक आदेश में सर्वोच्च नेता ने उनके योगदान की भी सराहना की और लगातार किए गए प्रयासों तथा सेवा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। आदेश में मोजतबा खामेनेई ने उम्मीद जताई कि जोलघाद्र की तरह नए प्रतिनिधि भी देश के हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाएँगे।

मोजतबा खामेनेई ने अपने आदेश में रेजाई से अपेक्षा जताई कि वह नई जिम्मेदारी को पूरी क्षमता और समर्पण के साथ निभाएँगे । उन्होंने उन्हें सफलता की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे ईरान की जनता के समर्पित सेवक बने रहें। सर्वोच्च नेता की ओर से जारी यह संदेश नियुक्ति की राजनीतिक और संस्थागत अहमियत को भी दर्शाता है।

रेजाई की नियुक्ति ऐसे समय हुई है,जब ईरान को कई स्तरों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के साथ तनाव,खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ,होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों का असर ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में लंबे सैन्य अनुभव वाले व्यक्ति की मौजूदगी को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा,परमाणु कार्यक्रम और सैन्य गतिविधियों को लेकर मतभेद हैं। हाल के समय में खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ा है। ईरान अपने समुद्री और क्षेत्रीय हितों की रक्षा पर जोर देता रहा है,जबकि अमेरिका वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देता है।

ऐसी परिस्थितियों में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। परिषद सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय का काम करती है। सेना,खुफिया एजेंसियों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि की मौजूदगी परिषद को ईरान की रणनीतिक नीति निर्माण की महत्वपूर्ण संस्था बनाती है।

मोहसिन रेजाई का सैन्य अनुभव इस संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। आईआरजीसी के कमांडर के रूप में उन्होंने लंबे समय तक ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व किया। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उनकी भूमिका और उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक मामलों में उनकी सक्रियता ने उन्हें देश की सत्ता संरचना में एक अनुभवी व्यक्ति के रूप में स्थापित किया है।

हालाँकि,नई नियुक्ति को केवल सैन्य अनुभव के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। रेजाई पिछले कई वर्षों से आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाते रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में उनकी मौजूदगी सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक नीतियों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में भी देखी जा सकती है।

ईरान में सर्वोच्च नेता का प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी देता है। मोजतबा खामेनेई द्वारा रेजाई को सीधे नियुक्त किए जाने से यह संकेत मिलता है कि सर्वोच्च नेतृत्व सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े संवेदनशील मामलों में अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को देखते हुए परिषद की गतिविधियाँ महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

फिलहाल मोहसिन रेजाई ने नई जिम्मेदारी सँभालने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में गई है,जिसके पास दशकों का सैन्य, राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय तनाव और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बीच वह परिषद में अपनी भूमिका किस तरह निभाते हैं और ईरान की सुरक्षा एवं विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में उनका कितना प्रभाव दिखाई देता है।