बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@tukeshratre)

इजरायल चुनाव में किसी भी गठबंधन को नहीं मिला बहुमत,नेतन्याहू और विपक्ष के बीच सरकार बनाने की चुनौती बढ़ी

यरूशलेम,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- इजरायल में हुए 2026 के आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुँचा दिया है। 26वीं नेसेट यानी इजरायली संसद के लिए हुए चुनाव में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है। शुक्रवार सुबह केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक,प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली हैं,जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 सीटों पर जीत हासिल हुई है। वहीं,अरब राजनीतिक दलों के गठबंधन के खाते में 19 सीटें गई हैं। इस तरह संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आँकड़ा किसी भी गठबंधन के पास नहीं है।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। हालाँकि,मौजूदा आँकड़ों को देखते हुए सरकार बनाने की राह आसान नजर नहीं आ रही है। किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन हासिल करना और अलग-अलग राजनीतिक गुटों के बीच सहमति बनाना बेहद अहम हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार गठन की बातचीत लंबी खिंच सकती है और इस पूरी प्रक्रिया में दो महीने से अधिक का समय भी लग सकता है।

इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, कुल 77.9 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पिछले कई दशकों में मतदान का यह सबसे ऊँचा प्रतिशत बताया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि इस बार इजरायल के मतदाताओं ने राजनीतिक भविष्य को लेकर काफी सक्रियता दिखाई। हालाँकि,मतदान में बड़ी भागीदारी के बावजूद चुनाव परिणाम किसी एक गठबंधन के पक्ष में स्पष्ट जनादेश देने में सफल नहीं रहे।

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव परिणामों के बाद सभी राजनीतिक दलों से जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की अपील की है। बुधवार को उन्होंने राजनीतिक नेताओं से कहा कि देश को एक और चुनाव की स्थिति में पहुँचने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार गठन की प्रक्रिया में शामिल सभी नेताओं को खुले मन से बातचीत करनी चाहिए और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाधान तलाशना चाहिए।

हर्जोग ने कहा कि चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर मतदान कराने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से बातचीत के दौरान लचीला रुख अपनाने और आपसी सहमति बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उनके मुताबिक,मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को यह समझना होगा कि सरकार गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए समझौते और सहयोग की जरूरत है। राष्ट्रपति की इस अपील को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि संसद में किसी भी गठबंधन के पास बहुमत नहीं है और राजनीतिक खींचतान के कारण सरकार गठन में देरी हो सकती है।

दूसरी ओर,प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के प्रमुख नेता गादी आइसेनकोट ने नई सरकार बनाने को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है। दोनों नेताओं का दावा है कि अगली सरकार का नेतृत्व वही करेंगे। चुनाव से पहले और मतदान के दौरान दोनों पक्षों ने मतदाताओं के सामने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं रखी थीं। अब नतीजे आने के बाद सरकार गठन को लेकर दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।

इस सप्ताह की शुरुआत में यरूशलेम स्थित लिकुड पार्टी के चुनाव मुख्यालय में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने भारी बहुमत हासिल करने का दावा किया था। उन्होंने देश में एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने उन राजनीतिक दलों की आलोचना की,जो अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने के पक्ष में हैं। नेतन्याहू ने ऐसी राजनीतिक व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए इसका विरोध किया था। उनके इस बयान से साफ है कि सरकार गठन के दौरान अरब दलों के समर्थन का मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बना रह सकता है।

वहीं,विपक्षी खेमे की ओर से भी सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें की जा सकती हैं। 48 सीटों के साथ विपक्षी गठबंधन बहुमत के आँकड़े से पीछे है। ऐसे में उसे अन्य राजनीतिक दलों के सहयोग की जरूरत होगी। अरब गठबंधन के पास 19 सीटें होने के कारण सरकार गठन की बातचीत में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालाँकि, अलग-अलग दलों की विचारधारा और राजनीतिक शर्तें किसी साझा सहमति तक पहुँचने में बाधा बन सकती हैं।

गौरतलब है कि मंगलवार को हुए ये चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में पहली बार आयोजित किए गए हैं। इस हमले के बाद देश की राजनीति, सुरक्षा नीति और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2022 के चुनावों के बाद से इजरायल का राजनीतिक माहौल भी काफी बदल चुका है। सुरक्षा, युद्ध, राष्ट्रीय नेतृत्व और सरकार की नीतियाँ चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे बने रहे हैं।

फिलहाल, चुनाव परिणामों ने इजरायल के सामने एक जटिल राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि नई सरकार किस गठबंधन के नेतृत्व में बनेगी। यदि किसी भी पक्ष को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाता है, तो देश में दोबारा चुनाव कराने की संभावना भी बनी रह सकती है। ऐसे में राष्ट्रपति हर्जोग की कोशिश होगी कि सभी दल आपसी सहमति से सरकार गठन का रास्ता निकालें और इजरायल को एक और चुनावी प्रक्रिया से गुजरने से बचाया जा सके।