राँची,21 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद शुक्रवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। विधानसभा के एक पदाधिकारी को धमकी भरा ई-मेल मिलने के बाद तत्काल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट करते हुए झारखंड जगुआर के बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वॉड को विधानसभा परिसर भेजा गया। टीम ने पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया और विभिन्न स्थानों की बारीकी से जाँच की। हालाँकि,तलाशी के दौरान किसी भी तरह की संदिग्ध या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई।
धमकी भरा ई-मेल मिलने की सूचना सामने आते ही विधानसभा परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वॉड ने विधानसभा भवन और उससे जुड़े विभिन्न हिस्सों की गहन जाँच की। सुरक्षा टीम ने परिसर में मौजूद भवनों,आसपास के क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों को विशेष रूप से जाँच के दायरे में रखा। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा अधिकारियों ने हर संभावित स्थान की जाँच की और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि कहीं कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री तो मौजूद नहीं है।
काफी देर तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली,लेकिन खतरे को देखते हुए परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। तलाशी अभियान पूरा होने के बाद विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। प्रवेश और निकास के रास्तों के साथ-साथ परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी और अन्य सुरक्षा मानकों की भी जांच की गई।
धमकी के मामले में विधानसभा के एक पदाधिकारी की ओर से राँची के विधानसभा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जाँच शुरू कर दी है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि ई-मेल आखिर किस स्थान से भेजा गया और इसके लिए किस डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल किया गया। ई-मेल के तकनीकी विवरण,डिजिटल फुटप्रिंट और उससे जुड़ी अन्य उपलब्ध जानकारियों को खंगाला जा रहा है।
जाँच एजेंसियाँ धमकी भेजने वाले व्यक्ति तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ई-मेल भेजने के पीछे किसी एक व्यक्ति का हाथ है या किसी समूह ने मिलकर यह धमकी दी है। साथ ही यह पहलू भी जाँच के दायरे में है कि धमकी वास्तविक खतरे से जुड़ी है या फिर इसका मकसद केवल दहशत फैलाना और सरकारी संस्थान के कामकाज को प्रभावित करना है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले करीब छह महीनों के दौरान रांची के कई महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को इसी तरह की धमकियाँ मिल चुकी हैं। राजधानी के राँची कलेक्ट्रेट,सिविल कोर्ट और पासपोर्ट कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। इन मामलों में भी संबंधित परिसरों में सुरक्षा एजेंसियों और बम निरोधक दस्तों की ओर से तलाशी अभियान चलाए गए थे। हालाँकि,इन घटनाओं में भी किसी तरह की विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री मिलने की सूचना सामने नहीं आई थी।
लगातार सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को धमकी भरे ई-मेल मिलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अब विधानसभा को मिली ताजा धमकी के बाद जांच एजेंसियाँ पिछले मामलों से भी इसकी संभावित कड़ी तलाश रही हैं। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या पहले की घटनाओं और विधानसभा को मिली धमकी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यम,ई-मेल के पैटर्न या भाषा में कोई समानता है।
जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि पहले जिन संस्थानों को धमकियाँ मिली थीं,उनके मामलों में इस्तेमाल किए गए ई-मेल पते, डिजिटल नेटवर्क या तकनीकी संकेतों का मौजूदा मामले से कोई संबंध है या नहीं। यदि किसी तरह की समानता सामने आती है,तो इससे धमकी भेजने वाले व्यक्ति या समूह तक पहुँचने में जाँचकर्ताओं को मदद मिल सकती है।
झारखंड विधानसभा राज्य की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। ऐसे में परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्वाभाविक रूप से गंभीरता बढ़ गई है। विधानसभा परिसर में विधायकों,अधिकारियों,कर्मचारियों और अन्य लोगों की नियमित आवाजाही होती है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों ने धमकी को हल्के में न लेते हुए तत्काल व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
सुरक्षा अधिकारियों ने तलाशी के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रवेश और निकास व्यवस्था पर भी ध्यान दिया। परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी,संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया गया। अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं,ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि का तत्काल पता लगाया जा सके।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती धमकी भरा ई-मेल भेजने वाले की पहचान करना है। इसके लिए ई-मेल के तकनीकी विवरण की जाँच की जा रही है। डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदेश कहाँ से भेजा गया, किस उपकरण या डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल हुआ और भेजने वाले ने अपनी पहचान छिपाने के लिए किसी तकनीकी उपाय का सहारा लिया या नहीं।
विधानसभा परिसर में तलाशी के दौरान संदिग्ध सामग्री नहीं मिलने से तत्काल किसी खतरे की पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ जाँच पूरी होने तक मामले को गंभीरता से ले रही हैं। पुलिस धमकी की विश्वसनीयता और इसके पीछे की मंशा का पता लगाने में जुटी है। इसके साथ ही पिछले महीनों में राँची के अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों को मिली धमकियों के साथ इसका संबंध भी तलाशा जा रहा है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने राँची के महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। हालाँकि,हर धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ तलाशी अभियान चलाकर संभावित खतरे को जाँचती रही हैं,लेकिन बार-बार इस तरह के ई-मेल आने से इनके स्रोत और उद्देश्य का पता लगाना जरूरी हो गया है। विधानसभा को मिली ताजा धमकी के मामले में भी पुलिस इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
फिलहाल विधानसभा परिसर में चलाए गए सर्च ऑपरेशन में कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और जाँच एजेंसियाँ तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि धमकी के पीछे कौन है,इसे किस उद्देश्य से भेजा गया और क्या इसका संबंध राँची के अन्य सरकारी संस्थानों को पहले मिली धमकियों से है।
