नई दिल्ली,4 जुलाई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उद्घाटन करते हुए देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नई दिशा देने वाली संशोधित ‘उड़ान’ योजना की भी शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क केवल यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास,पर्यटन,व्यापार और रोजगार के नए अवसरों का भी आधार बनता है। सरकार का लक्ष्य देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को मजबूत हवाई नेटवर्क से जोड़ना है,ताकि विकास का लाभ देश के हर हिस्से तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री के जोधपुर पहुँचने पर उनका स्वागत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने किया। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें टर्मिनल की आधुनिक सुविधाओं,वास्तुशिल्प विशेषताओं और यात्री सेवाओं की जानकारी दी। निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री ने औपचारिक रूप से टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया और इसे देश को समर्पित किया।
करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह नया टर्मिनल भवन जोधपुर के नागरिक उड्डयन ढाँचे को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगा। 23 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह अत्याधुनिक टर्मिनल हर वर्ष लगभग 20 लाख यात्रियों को सँभालने की क्षमता रखता है। बढ़ती हवाई यात्राओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस टर्मिनल का निर्माण किया गया है,जिससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक,सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।
नए टर्मिनल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तुकला है,जिसमें राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और शाही विरासत की झलक दिखाई देती है। भवन के डिजाइन में पारंपरिक मेहराब,झरोखे और राजस्थानी स्थापत्य कला के अन्य प्रमुख तत्वों को आधुनिक निर्माण शैली के साथ जोड़ा गया है। इससे यह टर्मिनल केवल एक परिवहन केंद्र नहीं,बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक बन गया है।
टर्मिनल भवन के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसमें ऊर्जा की बचत करने वाली आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया है। जल संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं और हरित भवन निर्माण की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार,इस टर्मिनल को पाँच सितारा जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह रेटिंग उन भवनों को दी जाती है,जो ऊर्जा दक्षता,पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के मानकों पर खरे उतरते हैं।
नए टर्मिनल के शुरू होने से जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। जोधपुर पहले से ही देश और विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी ऐतिहासिक धरोहर,किलों,महलों और सांस्कृतिक विरासत के कारण लोकप्रिय है। बेहतर हवाई सुविधाओं के कारण यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे होटल,परिवहन,हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों और निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
टर्मिनल के उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना के लिए सरकार ने कुल 28,840 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना का उद्देश्य अगले दस वर्षों में देश के विमानन क्षेत्र का विस्तार करना और अधिक से अधिक शहरों तथा दूरस्थ क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि मजबूत हवाई नेटवर्क आर्थिक विकास,क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संशोधित ‘उड़ान’ योजना के तहत देशभर में व्यापक और टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य केवल बड़े शहरों तक विमान सेवाओं को सीमित रखना नहीं,बल्कि छोटे शहरों और पिछड़े क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क का हिस्सा बनाना है। इससे ऐसे क्षेत्रों में निवेश,पर्यटन,शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।
योजना के अंतर्गत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का बेहतर उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि देश के कई हिस्सों में ऐसी हवाई पट्टियाँ मौजूद हैं,जिनका अभी तक पूरी क्षमता के साथ उपयोग नहीं हो पाया है। इन्हें विकसित कर नियमित विमान सेवाओं से जोड़ने पर यात्रा का समय कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
संशोधित योजना में क्षेत्रीय हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने शुरुआती वर्षों में इन हवाई अड्डों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए विकसित हवाई अड्डे वित्तीय चुनौतियों के कारण प्रभावित न हों और वहाँ नियमित विमान सेवाएँ सुचारु रूप से संचालित होती रहें।
दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में हवाई संपर्क को मजबूत बनाने के लिए योजना के तहत 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि पर्वतीय, सीमावर्ती और ऐसे क्षेत्र जहाँ पारंपरिक हवाई अड्डों का निर्माण कठिन है,वहाँ हेलीकॉप्टर सेवाएँ लोगों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इससे न केवल आम नागरिकों को लाभ मिलेगा,बल्कि आपदा प्रबंधन,चिकित्सा आपातकाल और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
संशोधित ‘उड़ान’ योजना को सरकार के क्षेत्रीय संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य देश के हर नागरिक को सस्ती और सुलभ हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के माध्यम से कई छोटे शहर पहली बार नियमित विमान सेवाओं से जुड़े हैं। अब इसके नए स्वरूप के जरिए सरकार विमानन क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने तथा हवाई यात्रा को देश के विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल और संशोधित ‘उड़ान’ योजना दोनों मिलकर देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नई गति देंगे। एक ओर जहाँ आधुनिक हवाई अड्डों के निर्माण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी,वहीं दूसरी ओर छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक हवाई सेवाओं के विस्तार से आर्थिक गतिविधियों,पर्यटन,व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों के माध्यम से भारत का विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत तथा प्रतिस्पर्धी बनकर उभरेगा।
